by Tanya Tripathi | Jan 18, 2019 | Uncategorized
आज कविता बहुत तैयार होकर घर के पास वाले पार्लर में गई सिर्फ वही जान सकती थी उसके मन में क्या है। पार्लर जाकर वो कुर्सी में बैठी ही थी पार्लर वाली दीदी -जी मैडम बताइये कविता-इन बालो की लंबाई कम कर दीजिए पार्लर वाली दीदी-मैडम, आपके बाल इतने सुंदर है आप क्यों इन्हें छोटा...
by Ankit Bajpai | Jan 18, 2019 | Uncategorized
मुझे ऐसे शहर में घर नही चाहिए सिलवटों में चादरों की बिक जाए प्यार जहाँ, मुझे ऐसे शहर में घर नहीं चाहिए| स्पर्शों में हवस हो सम्मान की ना हो जगह, मुझे ऐसे शहर में घर नहीं चाहिए| गूंजती रहीं हों जहाँ सिसकियाँ सन्नाटों में, फंस गयी हों हिचकियाँ शोरगुल के काँटों में,...
by Rachna Siwach | Jan 18, 2019 | Uncategorized
विनीत की दो बेटियों के बाद घर में पोता हुआ था.. न ही प्रहलाद का कोई नामकरण ही करवाया गया था, और अब जब बच्चे का पहला जन्मदिन आ रहा था. तो घर में कोई भी जन्मदिन को लेकर उल्लास और रौनक ही नज़र नहीं आ रही थी। अनिताजी के बार-बार सुनीता के लिये फ़ोन आ रहे थे,” बेटा! प्रहलाद...
by Mahesh Tiwari | Jan 18, 2019 | Uncategorized
ठंड का मौसम चल रहा। कुछ क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है, तो कुछ जगह ठंड अपने वास्तविक स्वरूप को भी धारण नहीं कर पा रही। ऐसे में बात अब सिर्फ़ ठंड के मौसम तक सीमित नहीं रहीं। बीते कुछ वर्षों से कोई भी मौसम अनुकूल अवस्था मे नहीं दिखाई पड़...
by Rachna Siwach | Jan 17, 2019 | Uncategorized
आज इतवार का दिन था.. सभी घर पर थे, और फूल छुट्टी मनाने का मन हो रहा था। अब सभी संडे मनाने के मूड में आ गए थे, तो हमनें भी सोचा था, चलो! पूरा परिवार इकट्ठा है, तो क्यों न भोजन में आज कुछ विशेष बनाया जाय। अब भोजन भी सारे परिवार की पसन्द का होना चाहये था.. ऐसे थोड़े ही...
by Rachna Siwach | Jan 16, 2019 | Uncategorized
खैर! जो भी हो प्रहलाद दादी-दादा के लाड़ में दिन रोज़ बड़ा हो रहा था। अब क्योंकि रमेश दर्शनाजी का ख़ास था.. इस हिसाब से तो कहना चाहये कि प्रहलाद का लालन-पालन एकदम शाही ढँग से हो रहा था। फैक्ट्री में से रमेश कबाड़ा बेच कर रुपये-पैसों का इंतेज़ाम तो कर ही रहा था.. आमदनी...