नही चाहिये इतने बड़े बाल

आज कविता बहुत तैयार होकर घर के पास वाले पार्लर में गई सिर्फ वही जान सकती थी उसके मन में क्या है। पार्लर जाकर वो कुर्सी में बैठी ही थी पार्लर वाली दीदी -जी मैडम बताइये कविता-इन बालो की लंबाई कम कर दीजिए पार्लर वाली दीदी-मैडम, आपके बाल इतने सुंदर है आप क्यों इन्हें छोटा...

मुझे ऐसे शहर में घर नहीं चाहिये!

मुझे ऐसे शहर में घर नही चाहिए सिलवटों में चादरों की बिक जाए प्यार जहाँ, मुझे ऐसे शहर में घर नहीं चाहिए| स्पर्शों में हवस हो सम्मान की ना हो जगह, मुझे ऐसे शहर में घर नहीं चाहिए| गूंजती रहीं हों जहाँ सिसकियाँ सन्नाटों में, फंस गयी हों हिचकियाँ शोरगुल के काँटों में,...
खानदान 36

खानदान 36

विनीत की दो बेटियों के बाद घर में पोता हुआ था.. न ही प्रहलाद का कोई नामकरण ही करवाया गया था, और अब जब बच्चे का पहला जन्मदिन आ रहा था. तो घर में कोई भी जन्मदिन को लेकर उल्लास और रौनक ही नज़र नहीं आ रही थी। अनिताजी के बार-बार सुनीता के लिये फ़ोन आ रहे थे,” बेटा! प्रहलाद...
लेख – पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य, क्यों भूल रहें इसे हम!

लेख – पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य, क्यों भूल रहें इसे हम!

ठंड का मौसम चल रहा। कुछ क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है, तो कुछ जगह ठंड अपने वास्तविक स्वरूप को भी धारण नहीं कर पा रही। ऐसे में बात अब सिर्फ़ ठंड के मौसम तक सीमित नहीं रहीं। बीते कुछ वर्षों से कोई भी मौसम अनुकूल अवस्था मे नहीं दिखाई पड़...
कानू का पासपोर्ट

कानू का पासपोर्ट

आज इतवार का दिन था.. सभी घर पर थे, और फूल छुट्टी मनाने का मन हो रहा था। अब सभी संडे मनाने के मूड में आ गए थे, तो हमनें भी सोचा था, चलो! पूरा परिवार इकट्ठा है, तो क्यों न भोजन में आज कुछ विशेष बनाया जाय। अब भोजन भी सारे परिवार की पसन्द का होना चाहये था.. ऐसे थोड़े ही...
खानदान 36

खानदान 35

खैर! जो भी हो प्रहलाद दादी-दादा के लाड़ में दिन रोज़ बड़ा हो रहा था। अब क्योंकि रमेश दर्शनाजी का ख़ास था.. इस हिसाब से तो कहना चाहये कि प्रहलाद का लालन-पालन एकदम शाही ढँग से हो रहा था। फैक्ट्री में से रमेश कबाड़ा बेच कर रुपये-पैसों का इंतेज़ाम तो कर ही रहा था.. आमदनी...