by Major Krapal Verma | May 5, 2026 | स्वामी अनेकानंद
बिस्तर पर ध्यान मग्न बैठे मोहन मकीन को अमेरिका से लौटी विभूति ने आंखें भर-भर कर देखा था। आई आहट से सचेत हो मोहन मकीन ने आंखें खोली थीं। सामने खड़ी अपनी प्रिय बेटी विभूति को उन्होंने फौरन पहचान लिया था। विभूति ने भी देखा था कि उसके महान पापा मोहन मकीन की आंखों में जो...
by Major Krapal Verma | May 3, 2026 | स्वामी अनेकानंद
पूरे छह दिन लगा कर राधू रंगीला ने लच्छीपुरा गांव का सेट तैयार किया था। आज सातवें दिन शूटिंग शुरू हो रही थी। मानस और प्रतिष्ठा का कोई रोल न था। अत: वो दोनों दर्शक दीर्घा में साथ-साथ बैठे शूटिंग होते देख रहे थे। सबसे पहले कैमरे में गांव लच्छीपुरा का बोर्ड दिखाई दिया था।...
by Major Krapal Verma | May 3, 2026 | स्वामी अनेकानंद
सुबह का सूरज निकलने के साथ-साथ दोनों भाई नाश्ता पानी करते और कदम खंडी पर पहुंचते। आनंद की आंखें अचानक ही बिल्लू के बताए कोमल सपने से जा मिलतीं। कदम खंडी की साढे़ सात बीघा जमीन जैसे आनंद को आ कर बार-बार सैल्यूट मारती और मालिक होने के गर्व से भर देती। कदम खंडी पर कोठी...