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मैं आसमान पर उगे भोर के तारे को देख रहा हूँ !

०१४ नरेन्द्र मोदी शपथ ग्रहण

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी.

उपन्यास – अंश :-

कुल मिला कर कांग्रेस का खूब बैण्ड बजा है , मित्रो !

कुल ४४ सीटें मिलीं हैं . इन की कभी इतनी शर्मनाक हार नहीं हुई …? पटनायक बच गए . ममता की भी इज्जत बच गई . लेकिन जय ललिता की जीत और अरविन्द केजरीवाल की हार महत्व रखती हैं ….?

लो जी ! मुझे अब बधाई -सन्देश आने लगे हैं . देश में बी जे पी की जीत के डंके बज रहे हैं ! लोग जश्न मना रहे हैं . बधाई -सन्देश भी आने लगे हैं . एक उत्सव उठ खड़ा हुआ है . एक प्रसन्नता की लहर है – जो गाँव-गाँव …गली-गली …शहर-शहर …और डगर-डगर चलती ही चली जा रही है ….और देश-वासियों को ख़ुशी से ओत-प्रोत कर शुभ-सन्देश सुना रही है !!

अरे,रे ! मेरे तो कान बज उठे हैं …? मैं ये क्या सुनने लगा हूँ …? देश से ही नहीं – विदेश से भी …बधाई-सन्देश …? अमेरिका से ओबामा जी का सन्देश है …तो ब्रिटैन से कोम्रान बोल रहे हैं ! ‘गोधरा’ काण्ड की वजह से मेरा आना-जाना रोकना शायद उन्हें अब बुरा लगा होगा …? पाकिस्तान से नवाज़ शरीफ का सन्देश है ..बंगला देश से सन्देश है …और सन्देश आते ही जा रहे हैं ….

“ओह,अमित …..! क्या करिश्मा कर डाला …तूने ….मेरे ….” मैंने लपक कर अमित को बांहों में भर लिया है . “ओह, मोदी के मन-मीत ….मेरे राजदूत ….तू महान है,मेरे …….!!” मैं कहता ही जा रहा हूँ . “असंभव को तूने …संभव कर दिखाया , मेरे मित्र …!” मेरी आँखें सजल हो आईं हैं .

“मैंने तो कुछ भी नहीं किय ….” अमित की आँखें भी छलछला आई है ! ” मम….माँ …से मिलने का …प्रश्न है …? कब ….?” वह कह नहीं पा रहा है . पर चेतावनी है -उस की जिस से पहले कि मैं …फिर भूल जाऊं …?

“चलते हैं ….???” मैंने तुरंत ही स्वीकार में सर हिला दिया है .

अचानक ही मेरी आँखों के सामने मेरा विगत उग आता है !!

६३ साल का मैं -नरेन्द्र मोदी …अपनी ९० साल की बूढी -माँ -हीरा बैन से मिलने जा रहा हूँ …? उस हीरा बाई से मिलने जा रहा हूँ – जिसे मैंने पडौस में बर्तन रगड़ते देखा है …हम छह भाई-बहिनों को पालते-संभालते देखा है …? मैं पलकें ढालता हूँ …तो पाता हूँ …कि हम कृष्ण-बलराम …कंस -बध के बाद …यशोदा -माँ के पास लौट रहे हैं …!!

हंस पड़ा हूँ,मैं ….और अमित चौक पड़ा है ….!!

शनिवार १७ मई है …और हम बडोधरा …में लोगों के साथ …जीत का जश्न मना रहे हैं ! ठीक आठ बजे हमें दिल्ली के लिए रवाना होना है . दस बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर हमारा स्वागत हुआ है ! और अब आठ अलग-अलग स्थानों पर लोगों से मिलते हुए …पार्टी आफिस हो कर …साढ़े दस बजे हम यहाँ पहुंचे हैं ! लोगों से मिलने के बाद हम ने पार्लियामेंट्री बोर्ड की मीटिंग अटेंड की है ! और अब हम वाराणसी के लिए निकले हैं ! यह हमारी संस्कृति का उत्कृष्ट बिंदु है – बनारस ! लोगों का किया स्वागत …और दिया सौहार्द अविस्मर्णीय हैं ! गंगा आरती का उत्सव बे-जोड़ है ! और अब हमारा लौटना भी एक ऐतिहासिक घटना जैसा ही है …!!

पार्टी को २८२ सीटें मिलीं हैं ! एक इतिहास ही रचा गया है …१९९८ …के बाद …!!

“हम मानते हैं …कि …हम हारे हैं ….!!” सोनिया और राहुल जी के बयान हैं . “हम जिम्मेदार हैं – इस हार के ….!!” कह कर वो लोग अंदर चले गए हैं .

कोई क्या कर लेगा ….? पार्टी उन की है ….उन्हीं की रहेगी …? है कोई माई का लाल जो …..

मुझे ही क्यों आप को भी तो याद होगा …श्री मणिशंकर का वो बयान …. जो उन्होंने …मेरा नाम पी एम् के लिए आते ही दिया था …..

“मैं दावे के साथ कह सकता हूँ,मित्रो ! कि ये श्रीमान मोदी जी …२१-वीं …शदी में तो …प्रईमिनिस्टर बन ही नहीं सकते …?” तालियाँ बजीं थीं …और बजती ही रहीं थीं ! “हाँ,भाई !” तालियाँ रुकीं थीं तो वो फिर बोले थे .” एक निमंत्रण मैं ..उन्हें अपनी ओर से दिए देता हूँ !” जमा लोगों के कान खड़े हो गए थे . “लकी चांस है – हम लोगों के बीच चाय बेचने का ,,,?” लोग फिर हँसे थे . “चूंकि ये …चायवाले हैं ….इन्होने स्टेशनों पर चाय बेचीं है …? हाँ,हाँ …!”

“पार्टी की केन्टीन का ठेका दे देते हैं,इन्हें ….?” भीड़ में से कोई बोला था . “चाय …वाले भी …चले हैं – पी एम् बनने ?”

इस के बाद तो मेरा खुल कर ही उपहास हुआ था ….!! प्रिंस राहुल के साथ मुझे बिठा कर लोगों ने खूब ही मेरी गरीबी में जूते मारे थे ….!! कहाँ …राजा भोज ….और कहाँ …कंगला तेली …..???? विचित्र वक्त था ….

बहुत आहात को गया था मैं ,मित्रो ! मेरा स्वाभिमान तो लहूलुहान हो सड़क पर लेट गया था …उठने से नाट गया था …और जंग करने पर उतारू था …!! और तब ..हाँ,हाँ तब मैंने कांग्रेस के विरिद्ध जंग छेडने की सोची थी …और तभी १५ सितम्बर २०१३ को मैंने पहली बार रेवाडी में …जनरल वी के सिंह को साथ ले कर …सेवानिब्रत -सैनिकों से अपनी बात कहने का साहस किया था .

” मैं जानता हूँ दोस्तों ! कि हमारा देश चारों ओर से दुशमनों से घिरा है ? और मैं यह भी जानता हूँ ,दोस्तों कि …हम हैं किस हाल में …? लेकिन मुझे गर्व भी है कि …हमारे सैनिकों ने हमेशा ही देश की लाज बचाई है ….और वो कारनामे किए हैं – जिन्हें असंभव कहा जा रहा है …? मैं वचन देता हूँ कि … सैनिकों का वेल्फैअ र …देखना मेरी प्राथमिकता होगी ….और …….”

खूब तालियाँ बजीं थीं ! उसी दिन …जी हाँ, उसी दिन मुझे याद है कि मेरा और सैनिकों का एक खून का रिश्ता कायम हो गया था ! मुझे लागा था कि मैं इन्हीं में से एक हूँ …एक लड़ाका हूँ …जिसे न अपनी जांन की परवाह है …और न मान की !!

और इन सैनिकों द्वारा उत्साहित हुआ में …लौटा था और २९ सितम्बर को ही दिल्ली में ‘विकास-रेली’ को सम्बोधित कर रहा था ! मैं दिल खोल कर बोला था . मैंने सब से पहले अपनी गरीबी को दिल्ली की सडकों पर लोगों के मुआईने के लिए बखेर दिया था ! मैने खुले शब्दों में कहा था कि मैं …’कांग्रेस-प्रिंस’ की तरह मुंह में सिल्वर -स्पून ले कर पैदा नहीं हुआ हूँ ! कि मैं तो मज़दूर हूँ …आप में से ही एक हूँ …पर हूँ मैं ..लड़ाका …काल -उन का जो चोर हैं …देश को लूट रहे हैं …ढो-ढो कर बाहर ले जा रहे हैं …और जिन्होंने …देश खाली कर दिया है …..और ….और …? मुझे कहते हैं – -‘कर ले केन्टीन में नौकरी …चाय वाले की …?’ हँसे थे -लोग ….खूब हँसे थे ! कांग्रेस के अहंकार पर हँसे थे …लोग ….!!

चहरे उड़ गए थे उस दिन …कांग्रेसियों के ….!! सुपर हिट थी -विकास -रैली …!!!!

अब प्रेस हरकत में आया था ! मेरे कहे को मिटाने के लिए …और मोदी का नाम मिटाने केलिए एक जुट हो ….अखबार ,टी वी …और मीडिया ये बताने लग पड़े थे कि …मोदी का कद बहुत छोटा था …और राहुल – ‘वाज़ ए नेचुरल चोईस’ ! लोग चाहते ही राहुल को हैं …फिर मोदी …? बी जे पी अभी भी अपनी की गलती सुधार् ले तो …ये देश हित में होगा ? विदेश तो पहले ही मोदी के नाम से कूदता है ….????

“अरे,हाँ ! अमित …वो ‘कोब्रा -पोस्ट’ और ‘गिलोल’ कहाँ पहुंचे …? ” मैं अचानक ही पूछ बैठा था. बहुत दिनों से मेरे ‘चरित्रहनन ‘ की कोई कोशिश नज़र न आई थी ? “क्या हुआ उस नए …’शगूफे’ का ….?” मैने पूछा था .

कई लम्बे पलों तक अमित मुझे घूरता ही रहा था ! न जाने क्या था उस की उस द्रष्टि में …जो मुझे डरा गया था …? कुछ सोच कर अमित बोला था .

“कहने को तो …बहुत बुरा हुआ ? पर जो हुआ ….सो भी ठीक हुआ ….!!” अमित एक दार्शनिक की तरह बोल रहा था . “पकड़ा गया ….!” वह रुका था . “अपनी बेटी की सहेली के साथ ….इस बदकार ने …बदफैली की …?” रोष था ,अमित की आवाज़ में . “मोदी को चरित्रहीन साबित करते-करते खुद चरित्रहीन बन गया …? अब तो इसे …राम भी नहीं बचा सकता …?” चुप हो गया था ,अमित .

“घटिया तो है …?” मैंने स्वीकारा था . “लेकिन ये व्यवसाई है -पत्रकार नहीं ? कांग्रेस से खूब कमाया है …लेकिन ….अब तो आसमान से गिरे …और खजूर में भी नहीं अटके ….? गए …रसातल को ….??” मैं तनिक टीस आया था ! गिरता आदमी मुझे कभी से भला …नहीं लगता .

“नीच लोगों का मज़मा है ! बदलेगा तो कभी नहीं !!” अमित कह रहा था. “अभी भी …वो अनिरुद्ध बहल …और आशीष खेतान …लगे हुए हैं …लेकिन …”

“बंबई की महा-गर्जना -रैली में ….अगर …गर्जना ही न हो …तो कैसा रहेगा ..?” सोनिया जी की किचिन कैबिनेट का प्रश्न था .

सारे नए- पुराने खिलाडी …इस प्रश्न का उत्तर लाने के लिए दौड़े थे ….!!

“अब की बार हमें सफलता अवश्य मिलेगी …?” ‘गुलेल’ के मालिक आशीष खेतान कह रहे थे . “मैंने पूरा एविडेंस फीड कर दिया है ! उठने दो इस बार पर्दा …! नरेन्द्र मोदी जेल में बैठे नज़र आएँगे ….?” वो हंस रहे थे .

“इस के बाद हम भी तो हैं …? हैड लाईन्स में नाम छपेगा …और वो वाले ‘फोटो’ भी …? बच्चू को कहीं बैठने तक के लिए जगा नहीं मिलेगी …?” हिन्दू के सम्पादक बोल रहे थे .

“वास्तव में दम तो है …?” अरुणा राय ने स्वीकृति दी थी . “चरित्रहीनता में एक बार इस का नाम आ जाए ….? फिर तो हम इस का राक्षसीकरण …कर डालेंगे ….???”

“ये बैठे हैं – हमारे कर्णधार -श्री भूषन जी …?” टाईम्स आफ इण्डिया के प्रधान सम्पादक मनोज मिटता ने सब का ध्यान आकर्षित किया था . “इन का मानना है कि …इस बार …सुप्रीम कोर्ट इन के पक्ष में …ज़रूर कोई निर्णय लेगा ….?”

“रोना तो इसी बात का है ….?” प्रशांत भूषन कराह उठे थे ! “सुप्रीम कोर्ट …अब हम सब को …संदिग्ध निगाहों से …देखता है …? अब उन के लिए …हम सब चोर ….मोदी और अमित शाह ….शाह हैं !” उन की आवाज़ में करुना थी . “करें …तो क्या करें …? हमें सोसल मीडिया से भी लगातार …चुनौती मिल रही है ….?”

लेकिन इस निराशा का उत्तर भी उन्होंने खोज लिया था ….!!

“दाउद को सुपारी दे दी है ! उस ने अपने शार्प-शूटर को टारगेट दिखा दिया है ! बंबई-रैली में भरपूर वार होगा ! शाहिद बिस्तरा भी अपनी शाहीन फ़ोर्स को लेकर ..रोकेट -लैंचरों से हमला करेगा …तो बंबई में …वाहनों से वाहन टकराएंगे …और ….?” अनुमान लगाए जा रहे थे . “बंबई से अच्छा …बैटिल – ग्राउंड …और है कहाँ …?’

“फिर देख लेंगे ,,,बंबई की रैली को …?’ अफवाहों को कान देते हुए …हमारे कार्यकर्ताओं ने …बात को बहा देना चाहा था .

“मैं मरने से नहीं डरता ,मित्रो !” मैंने कहा था और ठाठ से रैली की थी !!

“२६ मई शाम छह बजे ..के .बाद शपथ-ग्रहण समारोह होना है …?” अमित ने मेरा सोच तोडा था . मैं यथार्थ में लौटा था . मुझे याद आ गया था कि अब वक्त आ गया था -जब मुझे शपथ लेनी थी …दायित्व ओटना था …और …देश का प्रधान मंत्री बनना था …? “कैबिनेट का स्वरुप क्या रखेंगे …?” अमित का औपचारिक प्रश्न था .

“छोटा रखते हैं ! उस के बाद ….” मेरा सुझाव था .

“बेहतर …!” अमित बोला था और एक आश्चर्य की तरह उस ने सारे नाम गिना दिए थे …लिस्ट बता दी थी और …और कहा था ,”४००० हज़ार …गणमान्य लोगों की लिस्ट बनती है – आप के बताए ….?”

“आने दो ! देखने दो संसार को भारत का वैभव …?” मैं चहका था .

“अपना कोई नहीं है ,लिस्ट में …?” अमित ने सूचित किया था ,मुझे .

“ठीक है ! मैं नहीं चाहता कि वो लोग आएं ? ये देश का समारोह है …और ….”

आमित चुप रह गया था .

समारोह ठीक ६ बजे आरम्भ हुआ है …और सात बज कर दस मिनिट पर सब तय भी हो गया है ! मैंने शपथ ग्रहण की है और अब हमारे मनोनीत मिनिस्टरों ने शपथ ली है ! एक छोटी और साफ़-सुथरी कैबिनेट का हमने गठन किया है ! हमने कांग्रेस की किसी भी रीति-नीति को नहीं लिया है …न माना है …? हमारा मन है – एक अलग व्यवस्था देने का …???

पूरे समारोह में मीडिया मेरे अपनों को खोजता रहा है ? लेकिन सफलता न मिल ने पर मेरे पास ही आ गया है …!

“आप का …अपना …कोई …?” प्रश्न मेरे सामने है .
“ये सब मेरे ही तो हैं …?” मैंने हंस कर उत्तर दिया है .

अब एक चुप्पी लौट आई है . सब शांत है . और में इस खामोशी के पेट में प्रजातंत्र का बीज रोपता हूँ. में पत्रकारों से कहना चाहता हूँ कि …’वंश-वाद’ बुरा है …! नेता -देता है …लेता नहीं ! और जो लेता है – वह घोर स्वार्थी है …अँधा है – जो अपनों को ही रेवड़ियां …बांटता है ….और देश का अहित करता है ! यही तो हो रहा है – आप की नज़र के नीचे ,हुजूर …?

आज मैं प्रधान मंत्री बन गया हूँ . ये प्रधान मंत्री बनने का सपना ही तो था -जो …जो मेरी आँखों में हर रोज लहक जाता था …? झुनझुने की तरह बज-बज कर मुझे उत्साहित करता था …? फिर बहुत थकाता भी तो था …?

“अरे, तू …? तेरी ये औकात कि …तू …?” कोई मुझे ललकारता . “नरेन्द्र ! इतना बड़ा सपना क्यों ..देखते हो ….?” प्रश्न आता .

लेकिन मैं क्या करता …? मेरे परमेश्वर ने मुझे प्रेरणा दी …और मुझे हारने भी नहीं दिया …? न जाने कितना कुछ नहीं घट गया है ….लेकिन न तो मैं थका हूँ ….और न ही हारा हूँ …?

“मेरी आँखों में आज भी नींद क्यों नहीं है ….?” मैं पूछ रहा हूँ . “क्या है – जो मुझे सोने नहीं दे रहा है …?”

“साब …?” मुझे किसी ने पुकारा है . “दो …लोग हैं …! आप से मिलना चाहते हैं …? ” उस ने मुझे अपने आने का सबब बताया है . पर मैं समझ ही नहीं पा रहा हूँ. रात के इस नीरव पल में …कौन हैं , ये …जो मुझ से मिलने चले आए हैं ? “कौन हैं …?” मैंने उसे ही पूछा है .

“ये कोई …र-की-बी …और एक औरत है – निक्का …!” उस ने बताया है . “कहते हैं – वह सुबह से ही परेशान हैं ….! किसी ने उन्हे…अंदर ही नहीं आने दिया ….?”

मैं उछल पड़ा हूँ ! मैं द्रवित हो गया हूँ ! मैं प्रसन्नता से कूदना चाहता हूँ . मैं ….मैं ….

“बुलाओ,इन्हें ….!” मैंने आदेश दिया है . मैं बिस्तर से कूद कर बाहर आ गया हूँ . और अब देख रहा हूँ कि रकीब और निक्का …मेरे सामने खड़े हैं ! “त …त ..तुम….! रकीब ….? निक्का ….? ” मैंने उन दोनों को अपनी बांहों में समेट लिया है ! “मेरे …अपने ….?” मैंने कहा है . “तुम …दोनों ….?” मैं कहता रहा हूँ . “अब्बा …?” मैंने प्रश्न किया है .

“नहीं ….रहे ….!!” निक्की बोली है . मेरा दिल-दिमाग एक हादसे को चुप से सह गया है .

आ गया न ….मेरा परिवार ….? और …बिन बुलाए …आया है …????

“इन्हें खिलाओ…पिलाओ …और सुलाओ ….!!” मने आदेश दिए हैं .

फिर अकेला हूँ,मैं …? मैं अब आसमान पर उगे भोर के अकेले तारे को देख रहा हूँ ! और अब आदेश दे रहा हूँ – जब तक सूरज न निकले …तुम टिमटिमाते रहना …? मैं भी अब सोऊँगा नहीं …! घात लगा कर बैठे ये बैईमान …सब सटक जाएंगे …?पूरे देश को निगल जाएंगे …?

“अगर तुम सो गए , नरेन्द्र ? तो सोटी -लँगोटी …सब चली जाएगी ..?” गुरु जी के बोल हैं .

“अब सोना नहीं,बेटे ….?” दादा जी हैं – मेरे पास आ बैठे हैं .

और मैं जाग्रत हूँ ….सचेत हूँ ….अगली जंग के लिए तैयार हूँ ….!!

…………………………………………………………..

श्रेष्ठ साहित्य के लिए -मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!

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कोई चायवाला नहीं -ये चोर है !

नरेन्द्र मोदी

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा -नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास -अंश :-

‘नमो’ का मंत्र पूरे देश में गूँज उठा था !

मीडिया,टी वी ,अखबार और पत्रिकाएँ -नरेन्द्र मोदी के नाम,काम …और सौहरत सम्मान का गुण न्गान कर रहे थे ! पूरे भारत को मैंने अब तक की …की ४३ रैलियों में संबोधित किया था . मैंने उन की सुनी थी और उन्हें अपना मत,पथ …और उद्देश्य कह-कह कर सुनाए-गाए थे ! मेरे उड़ान भरने का कुल समय ४१० घंटों का था ….और ये अबतक की एक मिसाल थी – जो मैंने कायम की थी !

लेकिन नहीं ….! नहीं था -मुझे अभी भी संतोष !

मेरी आँखें खुलीं थीं ! सूरज था कि …ठहर गया था …डूबना ही न चाहता था …? लेकिन उधर चाँद था …जो उदय होने के इंतज़ार में खड़ा -खड़ा सूख रहा था …? करें तो करें क्या -रात को तो दिन ने अंगूठा दिखा दिया था …? और शाम , हाँ,हाँ जीवन की शाम का तो अभी से ढल जाना असंभव ही था ?

कारण ,मित्रो …एक ही था …कि आज माने कि १६ मई २०१४ को चुनाव परिणामों की घोषणा होनी थी !

तो आईये ! आप भी आईये !! साथ-साथ चुनाव -परिणामों का जायजा लेते हैं और देखते हैं – कौन जीता ,कौन हारा …और किसे क्या मिला और क्या नहीं मिला …? हमारा ही नहीं मित्रो ! देश का …पूरे देश का दिल धडक रहा है …नब्ज़ दौड़ रही है …और आशा-निराशा का निराला खेल खेला जा रहा है …? मैं भी उत्साहित हूँ …कि अपनी की मेहनत ..का रंग-पानी देख लूं …सुन लूं …और समझ लूं …!!

कितना कुछ घट गया है …बीते दिनों में ….

“गुप्तचर एजेंसी की रिपोर्ट में तो यहाँ तक कहा गया है कि …नरेन्द्र मोदी को मारने के लिए समान विचारधारा वाले …राजनीतिज्ञों ,नौकर -शाहों …व् …भारतीय सुरक्षा अधिकारियों की मदद भी ली जा सकती है ?” अमित मुझे बता रहा था . “लश्करे-तैयबा तो आप पर नज़र टिकाए ….”

“देश छोड़ कर तो नहीं भागेंगे, अमित ….?” मैंने हंस कर कहा था , लेकिन अमित गंभीर था . “हम अपना प्रोग्राम नहीं बदलेंगे ….?” मैंने जोर दे कर कहा था . “होने दो …घमासान ….!!” मेरा स्वर तीखा था .

किसी भी कीमत पर अब कांग्रेस को चुनाव जीतना था . बी जे पी का चुनाव -प्रचार और …जन-मानस का रुझान जो कह रहा था – उन की समझ में आ रहा था और उन्हें हर मोर्चे पर निराशा ही मिल रही थी !

अमित अखबार देख रहा था और लम्बे समय तक देखता ही रहा था ! मुझे कुछ दाल में काला दिखाई दिया था तो पूछा था ?

“कुछ गंभीर …मामला ….?”

“सोनिया गाँधी की ‘किचिन-कैबिनेट’ का हमला है !” एक लंबी उच्छवास छोड़ते हुए अमित बोला था . “वही पुराना किस्सा …?” अमित ने निराश आँखों से मुझे घूरा था .

“है, क्या ….?” मैंने संयत स्वर में पूछा था .

“किसी भी तरह …’मोदी’ मरे ….? बदनाम हो …उस का नाम …? ताकि …हुई नाम की घोषणा को वापस लिया जा सके …?”

“लेकिन अब क्या नया गुल खिलाया है …?”

“वही ….! प्रशांत भूषन जी सुप्रीम कोर्ट से अर्ज कर रहे हैं कि एक बार …फिर से ‘कोब्रा-पोस्ट’ और ‘गिलोल’ की नई कहानी सुन लें …? इन का संज्ञान लेते हुए सी बी आई से …फिर से जांच कराई जाए …? उन के लिहाज़ से कुछ ऐसा नया है जिस के सामने आते ही ….मोदी …..?”

“चरित्रहीन सिद्ध हो जाएगा ….?” मैं कह कर हंस पड़ा था . “मैं चरित्रहीन हूँ ही नहीं …तो सिद्ध कैसे हो जाऊंगा, मैडम ….?” मैंने उपहास के तौर पर ही सोनिया जी को संबोधित किया था .

“लो,भाई जी ! हो गया ….काम …!!” अमित चहका था . शायद चुनाव -परिणाम आने लगे थे …? “गए.लालू जी ….! हार गए …नितीश जी …..!!” उस ने जय-घोष किया था .

“हे ,भगवान ! तू न्याय तो करता है …?” मैंने बड़े ही विनम्र स्वर में परमात्मा को धन्यवाद दिया था .

सच मानिए कि …७ अक्टूवर की वो घटना मैं जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा …? पटना के गाँधी मैदान में बी जे पी की रैली होनी थी और बिहार सरकार को हर प्रकार की हर सूचना दी जा चुकी थी ! मैं जब पटना हवाई अड्डे पर उतरा था तो मुझे उम्मीद थी कि सी एम् नितीश जी ज़रूर ….ज़रूर ….

“सर, मोदी जी के लिए …बुलेट-प्रूफ …भेजनी है …?” प्रश्न था क्यों कि उन के आदेश नहीं थे .

“भेज दो …वो …पुरानी …! खप जाएगी ….? हा हा हा ….” आदेश थे . और लगा था कि …कुछ होना-जाना ज़रूर था .

उस पुरानी खटारा कार में बैठ कर मैं गाँधी मैदान की ओर निकला ही था कि …किसी बम-बिस्फोट की खबर थी … जो रेलवे स्टेशन पर हुआ था ! मेरा शक साबित हो गया था …? मैं जांन गया था कि आज मेरी जांन की खैर न थी ! लेकिन मैदान छोड़ कर भागना तो मेरी किताब में ही नहीं लिखा …? में …चलता ही रहा था और देख रहा था कि …जनता का जमावड़ा बे-जोड़ था ! पूरा गाँधी मैदान नाक तक भरा था …और भीड़ किसी भी तरह …मैदान में समा न पा रही थी !

लोग इतनी संख्या में मुझे सुनने आए थे – मैं गद -गद हो गया था !

लेकिन तभी …बम धमाका हुआ था …और दशों दिशाएं बोल पड़ीं थीं ! जनता के कान खड़े हो गए थे . मैं अभी मंच पर पहुंचा ही था कि …दूसरा धमाका हुआ …और पूरा मंच चरमरा कर …अस्त-व्यस्त हो गया ? मुझे लगा कि अगले ही पल मेरी मौत आ जाएगी और ….

“बचाओ , मोदी जी को ….?” भीड़ बजाए भागने के मुझे बचाने की गुहार लगा रही थी .

मुझे लोगों के एक कवच ने अपने भीतर भर सुरक्षित कर लिया था ! इस के बाद एक के बाद दूसरा बम फटा था …और जम कर धमाके हुए थे . लोगों को छोटी-मोटी चोटें आईं थीं …पर न तो कोई हिला था न कोई भागा था …? मैं था कि इस द्रश्य को एक अचरज की तरह देखता ही रहा था .

फिर सब शांत हो गया था …और लोग मुझे सुनने के लिए मैदान में आ बैठे थे . मैं बोला था ….मैं भावुक था …जनता का आभारी था …और …जनता …जैसे मेरी बहुत अपनी थी …मुझे सुनती ही रही थी …तालियाँ बजती ही रहीं थीं ….और अंत में एक इतिहास रच गया था – उस दिन !!

लालू जी और नितीस जी की निराशा का ठिकाना न था …?

अनुमान था कि ..जैसे ही बम-ब्लास्ट होंगे …जनता में भगदड़ मच जाएगी …और चूंकि …पाँच लाख से भी ज्यादा लोग …मुझे सुनने पहुंचे थे …अतः …भीड़ बिगड़ने के बाद तो …कुछ भी हो सकता था …? और तब …हाँ.हाँ …तब मुझ पर ह्यूमन-बम का हमल होना था …जिस की सुपारी ‘जींद’ को दी जा चुकी थी !

लेकिन जब भीड़ ने मुझे अपने भीतर भर लिया था …और एक भी आदमी नहीं भागा था ,,,तो …’जींद’ ने हमला नहीं किया था …?

पटना -बिहार में हुई इस हुंकार रैली की गूँज …पूरे भारत के आर-पार पहुँच गई थी …और एक निर्णय हवा पर झूल गया था …!!

“आतंकवाद का भी मुंह काला हो गया …आज …?” अमित शाह का प्रश्न था .

“जाको …राखे ..साईँ -या ….?” मैंने हंस कर अपना ही उत्तर दिया था .

लालू प्रसाद और नितीस जी के लिए आती ये खबर उस हुंकार रैली का जनता का दिया उत्तर थी ! इन्होने मुझे छोटा माना था …मेरा मज़ाक उड़ाया था …लेकिन जनता ने मुझे अपने सर पर उठा लिया था …अपने दिल में बसा लिया था …और आज मुझे …?

चलिए …आने देते हैं ….और परिणाम ….

मेरा नाम पी एम् के लिए आते ही गूगल पर ..१३२८७७ लोगों ने सर्च किया था …जो अब तक का विश्व का एक बड़ा कीर्तिमान है ! तो क्या आप भी मानते हैं कि …मोदी …आज जनता का चहेता …मोदी …मोर्चा मरेगा …और ‘कांग्रेस-मुक्त’ भारत का सपना पूरा करेगा …?

“आप का दुश्मन ‘कांग्रेस’ है ….और कोई नहीं ….!” अमित ने मुझे बताया था .

“तुम थे कहाँ …?” मैंने उसे उल्हाना दिया है . ” तुम …..”

“क्यों…? काम नहीं हुआ ….? क्या है – जो नहीं हुआ ….?” वह अब मुझे उल्टा झिंझोड़ रहा है . “वो हुआ है, भाई जी …जिसे पूरा विश्व आँखें पसारे देख रहा है ….? मूं की खाई है ,कांग्रेस ने ! पूरा दम लगा कर भी ….?”

“लेकिन …लेकिन ….वो एटम-बम्ब तो अभी चलेगा …? अमेरिका में बना ये …बम्ब ..हमें नस्त-नाबूद करने के लिए ही तो है ?”

“कौन-सा अटम-बम्ब ….?” अमित तनिक चौंक पड़ा है . उसे इस नई खोज की अभी तक कोई खबर नहीं है .

“राहुल गाँधी ….!!” मैंने जोर दे कर कहा है .

“प्-ग-ला …है …!” अमित ने हंस कर कहा है . “वो …तो …पागल है,भाई जी !!” वह फिर से हंसा है . “आप तो व्यर्थ में डरे बैठे हैं …?” उस ने मुझे चेताया है . “और अगर एटम-बम्ब फटता है …तो फटे ? डरता कौन है …?” अमित ने मुझे हौसला दिया है .

“हा हा हा …!!” मैं भी अब हंस पड़ा हूँ . “अरे,भाई ! न जाने क्यों ….मुझे आज-कल चींटी भी …हाथी दिखाई देने लगी है ….?”

“आप भारत को देखो,भाई जी ….?” अमित गंभीर है . “अब द्रष्टि को भारत पर केन्द्रित करो …!” उस की राय है

“बी जे पी के …अरुण जैटी’ली भी हार गए ….?” किसी ने चिल्ला कर कहा है .

मेरे तोते उड गए हैं ! अमित कहीं टथस्त है ! मुझे अपने ही लोगों का किया व्यवहार चौंट लेता है ? चालाक आदमी को जन-मानस पहचानता है -ये मेरी धारणा है ! मैं जो भी कर रहा हूँ …पार्टी के लिए है …देश के लिए है …लेकिन कुछ लोग केवल अपने लिए ही सब कुछ करना चाहते हैं …? और नतीज़ा …

“ये ,लो सर …? गए आप के …कपिल सिब्बल ….?” आवाजें आ रही हैं …

अब मना लेगा …मौके पर दिवाली …? ये आदमी भी जो है …वो है ही नहीं …? अब चाटेगा सोनिया की जूती …? न जाने क्यों मुझे गुलामों से नफ़रत है ….? अरे, परमात्मा का दिया सब कुछ्होने के बाद भी …तुम ….

“हार गए …खुर्शीद …?” एक और बड़ी खबर है . ये भी सोनिया जी के ख़ास हैं …और इटली में इन की भी ससुराल है …? इन्हें भी घमंड था …और हारना तो इन के लिए ….

“बाटला हाउस में …मुसलमान युवकों की मौत की खबर सुन कर सोनिया जी …तो रो ही पड़ीं थीं …?” ये इन्ही की उडाई अफवाह थी . मुसलमान के नाम पर ही ये खाते-कमाते हैं …और इन्होने भी अपनी सल्तनत कायम कर ली है ? अब आ कर हारे हैं …? बैठ कर अब देंगे मोदी को गलियां ……

“सुशील सिंदे भी हार गए …और ..सचिन पायलेट भी उड़ गए …?” गंभीर ख़बरें आने लगीं हैं . कांग्रेस के खेमें में खलबली मच गई है ! “लगता है – साफ़ हो जाएगी …कांग्रेस …?’ अमित चहका है .

खुश तो मैं भी खूब हूँ . कांग्रेस वालों ने खूब ही मार दी है -मुझ में …?

“सोनिया जी जीत गईं हैं ….!!” एक धमाका जैसा हुआ है …जैसे कोई बम फटा हो – ऐसा लगा है !

मैंने इस खबर का आदर किया है …उसी तरह …जिस तरह कि देश के लोगों ने …मत-दाताओं ने …और दिग्गज राजनेताओं ने हमेशा ही सोनिया जी को आदर दिया है ..सम्मान दिया है …? ये हमारे देश की सभ्यता है …ये हमारा बड्पपन है …कि हम नारी का सम्मान करते हैं …! लेकिन आप अगर सोनिया जी का चुनाव-प्रचार देखें …तो ..

“बी जे पी वो पार्टी है …जो गंजे को …कंघा बेच देती है …ताकि …वो अपने गंजे सर को खुजा ले …?” सोनिया जी विराम देती हैं . लेकिन लोग उन की इस मज़ाक पर हँसे नहीं थे …? “ये पार्टी – बी जे पी …गंजों को हैअर -कट दिलाती है …?” उन्होंने फिर से संवाद बोला था . लेकिन इस बार भी कोई नहीं हंसा था ? वास्तव में तो लोग असम्प्रक्त थे …उन की बात सुन ही न रहे थे . लेकिन वो वहां उपस्थित थे …!!

ये था …उदहारण जहाँ जनता के साथ उन का कोई संपर्क था ही नहीं ..? उन को जो लिख कर दिया जाता था – वो उसे ही पढ़ देतीं थीं …!

“मैं कहती हूँ कि …अगर बी जे पी चुनाव जीती …तो …नर-संहार होगा …? हज़ारों-हज़ार लोग …मरेंगे …और ….” वो कह रहीं थीं पर खुद भी इस बात का अर्थ न जानतीं थीं . और जिस ने ये भाषण लिखा था – वह भी तो हंस रहा था …?

फिर भी सोनिया जी की जीत हुई है …? ये भारत की संस्कृति की जीत हुई है . मित्रो …!!

“सर ! जसवंत सिंह जी भी ….हुए …पूरे …?” अमित जोरों से हंसा है .

मुझे अच्छा तो नहीं लगा …पर श्री जसवंत सिंह जी का हाल यही होना था – मैं जानता था …? कुछ लोगों के खून में गद्दारी …चली आ रही होती है ? मुझे दादा जी याद आ गए – हमारे तो राजे-रजवाड़े भी ..अंग्रेजों की डयोड़ीयो ..पर जा खड़े हुए हैं …? आज़ाद भारत में अब गुलामों के लिए जगह नहीं मिलेगी – मेरा ये मानना है !

“राहुल जी जीत गए .,सर …?” एक मुनादी जैसी हुई है . लोग खूब हँसे हैं . सब जानते हैं कि राहुल जी क्यों और कैसे जीते हैं …?

और जानता तो मैं भी हूँ ,मित्रो ! मैं तो इस की तलाश में ..कि अमेठी में ऐसा है क्या जो गाँधी परिवार को बार-बार वोट देता है …जिता कर भेजता है …और ….?

“हमने गोद में खिलाया है , राहुल को ….? हमार बचवा …पी एम् बनेगा …? दादा –पर दादा …का ..आशीर्वाद है ! ये लोग तो …?” अब तो आप भी समझ गए होंगे कि किस चतुराई से गाँधी परिवार ने वंश-बेल को बोया है …? इस की जड़ें बहुत गहरी हैं ! वक्त ही उखाड़ पाएगा – शायद …? लेकिन ये वंश-वाद अगर फैला तो …जहर का काम करेगा …? प्रजातंत्र के लिए विष है -ये ….वंश -वाद …?

चलो ! राहुल जीते हैं —बधाईयाँ ….!!

लेकिन इस के साथ ही मैं चाहूँगा कि आप कांग्रेस का प्रचार -प्रसार भी देखें –

“मेरे लिए तो मोदी का आना ..एक खतरे का आना जैसा है …!” ये कांग्रेस के ग्रामीण विकास के मिनिस्टर श्री जयराम रमेश मीडिया से कह रहे हैं . ” क्योंकि …न तो ये आदमी हमारे श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर के भारत का है …न महात्मा गाँधी के भारत का है …न पंडित जवाहर लाल नेहरू के भारत का है …और न ही ये सरदार पटेल के भारत का है …? क्योंकि इस आदमी की विचार-धारा ने …उत्तर-प्रदेश और बिहार में जिस तरह से ..आग लगाई है – वह किसी हादसे से कम नहीं है …?” उन को मुझ पर रोष है . वो फिर कहते हैं ,” ये कोई चायवाला नहीं है ….? ये तो कोरा ठग है …चोर है …! चाय पर चर्चा कर-कर इस ने चाय का जायका ही बिगाड़ दिया …? मैं अब चाय नहीं पीता ….?”

और हमारा मीडिया भी उन्हीं बातों को बताता है – जो असंगत हैं …असंभव है ,,,?

“जीत गई बे जे पी भाई जी ….!!”शोर उठ खड़ा हुआ है . जश्न मन रहे हैं . जय-जयकार होने लगी है …!!

“क्या मैं विजयी हो गया हूँ ….?” मैंने अपने आप से पूछा है .

“तुम नहीं,नरेन्द्र ! भारत विजई हुआ है ..!” दादा जी बोले हैं . “ये देश का भाग्योदय है,बेटे …!!” आवाज़ गुरु जी की है !”

और में ….नत-मस्तक हूँ ……….!!

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श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!

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और अब वक्त का चेहरा -केसरिया था !!

atal bihari vajpayee

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !

भोर का तारा-नरेन्द्र मोदी .

उपन्यास -अंश:-

“भाई जी ! शिवराज सिंह चौहान – सी एम् मध्यप्रदेश ….विरोध में खड़े हो गए हैं ?” मुझे सूचना मिल रही है . “कहते हैं -चाहे जो हो ….पर मोदी नहीं …!!”

मैंने घड़ी में समय देखा था . वक्त ११ बज कर ३५ मिनिट का था ! और वक्त का चेहरा लाल था …..!!

“नया क्या है,नरेन्द्र ….?” आवाज़ दादा जी की थी . “अपने ही तो हराते हैं ….वक्त पर दगा देते हैं …?”

आहत हुआ था -मैं ! मुट्ठियाँ कस आईं थीं ,मेरी ! शिवराज सिंह चौहान का चालाक चेहरा मेरी आँखों के सामने था . लेकिन मैं धीरज खोना न चाहता था …?

“शरद यादव ने …पार्टी से १७ साल पुराना सम्बन्ध तोड़ने की धमकी दी है ! नितीश का सन्देश भी निगेटिव है !! कहा जा रहा है कि …एन डी ए …टूट जाएगी …?” एक और भी बम-विस्फोट हुआ था !

मैंने रीते-रीते आसमान को याचक निगाहों से निहारा था ….!!

टूटता देश ….बंटता हिन्दू ….और भागता स्वराज …मुझे द्रष्टि गोचर हो रहे थे ! नई बात न थी ….और न ही नया कोई कारण था …? ये हमारी – हम भारतीयों की …हिन्दूओं की …आम आदत थी ! हमें अपनो से ही परहेज़ था ….? बहर का कोई भी आए …हम गुलाम बनने को …तैयार खड़े थे …?

“आप को नरेन्द्र मोदी से परहेज़ क्यों है …?” राजनाथ सिंह ने अडवानी जी के सीने पर सीधा प्रश्न अडा दिया था . “होनहार है ….देश-धरम का है …और जनता की आँखों का तारा है …?”

“टूट …जाएगी ….पार्टी , राज !!” अडवानी जी ने भी अपना दुःख व्यक्त किया है . वक्त जा रहा है ! एक बजके बाबन मिनिट हो चुके हैं …! अभी तक कोई राय नहीं बन पाई है ? “मुझे कहना तो नहीं चाहिए …पर जसवंत जी …शौरी …सुषमा …और यहाँ तक कि ….शायद …अटल जी भी ….नहीं चाहते कि ….” रुके थे ,अडवानी जी . “मेरी बात मानो ? वक्त का इंतज़ार करते हैं …? एक सहमती …बनेगी ….तो ….?”

“सहमती तो बन चुकी है, अडवानी जी ….!” राजनाथ सिंह ने उन्हें सूचना दी थी . “जन-जन मोदी को ही चाहता है …! देश ….समाज …और वक्त की मांग है – मोदी ….!! हम चार आदमी न भी चाहें तो क्या होता है ….?”

“जो ठीक समझो …करो !” अडवानी जी का स्वर असम्प्रक्त था . “मैं नहीं आऊँगा …!!”

“आईए …आप …? आशीर्वाद दीजिए …! मेरी गुजारिश है कि ….” कहते हुए चले गए थे – राजनाथ सिंह .

मैंने फिर से समय देखा था ! दो बज कर छह मिनिट हो चुके थे ….?

“मुबारक हो,भाई जी !!” अकाली दल के नेता – प्रकाश सिंह बादल की आवाज़ थी ! “बहुत..बहुत ….बधाई ….? मिलते हैं ….!! दिल्ली में ….” कहते-कहते फोन कट गया था .

क्या था – ये ….? आशा किरण थी ….? या कि कोई चलता-भागता बरसात का झोंका था …? या था -झकझोर देने वाला …झंझावात …? मेरा साहस अब चुकने लगा था ! निराशा फिर से पास आ बैठी थी . में उद्विग्न होने लगा था …!!

“भाई जी ….? मुबारक …!!” ….”भाई जी …? बधाईयाँ …!!” भाई जी ….भाई जी ….भाई जी ….और हाँ …बधाईयाँ …” अनेकानेक सन्देश आने लगे थे . “आप देश के …भविष्य हैं …देश के प्राण हैं ….शान हैं ….और ….” सब कुछ होने लगा था …पर दिल्ली से कोई सन्देश नहीं था …?

“हाँ,हाँ ! विलम्ब है …!!” लो, दिल्ली से भी सन्देश आ गया था . “सुषमा जी …कह रही हैं कि …शायद आज मीटिंग …न हो …? अडवानी जी ………”

दो बज कर पंद्रह मिनिट का समय था ! मेरा हिया काँप उठा था ! मैं सुषमा के सन्देश में किसी साज़िश को तलाशने लगा था !

रह-रह कर मुझे पश्चाताप हो रहा था कि …जिस अडवानी जी की मैंने …राम-भक्त हनुमान जी की तरह …सेवा की …जिन का हर काम किया …हर मुहीम को सिरे चढ़ाया …और हर-हर माईनों में साथ दिया …वही अडवानी जी आज …मेरा रास्ता रोक कर क्यों खड़े हो गए थे …? ये देखिए – उन्हीं का लिखा – ‘मेरा जीवन -मेरा देश’ उन की आत्म-कथा में -पढ़िए ….

“लोगों के समर्थन से दुष्प्रचार के किसी भी अभियान को पराभूत किया जा सकता है – और इसे नरेन्द्र मोदी ने कर दिखाया है ! ” और वही आगे लिखते हैं ,” मैंने पिछले ६० वर्शों के दौरान …भारतीय राजनीति में …ऐसा कोई नेता नहीं देखा है …जिसे राष्ट्रीय … व अन्तर -राष्ट्रीय …इस्तर पर …निरंतर इतने घ्रणित …व् अनैतिक तरीके से बदनाम किया गया हो …जितना कि मोदी को …वर्ष २००२ से किया गया है …? सोनियां गाँधी ने तो सारी मर्यादाएं …पार करते हुए …उन्हें ‘मौत का सौदागर’ तक कह दिया …?” फिर क्या कारण था कि …अडवानी जी ..अपना लिखा …अपना कहा ….और अपना सोचा …सब भूल गए थे …?

और अटल जी तो बीमार थे ….? लेकिन मैं तो जानता हूँ कि …अगर लौह-पुरुष हिल गए हैं …तो ..युग-पुरुष भी दहला गए होंगे ….? पर क्यों ….???

“भाई जी …!” दिल्ली से फोन था . मैं उछल पड़ा था . “चल पड़ो …!” आदेश था . “मीटिंग का समय पाँच बजे से …साढ़े पाँच बजे हो गया है ! पर मीटिंग होगी …अवश्य !!” फोन कट गया था .

मैंने फिर से समय देखा था ! तीन बज के बाईस मिनिट हुए थे ! और हाँ…! वक्त का मुंह मुझे …अब हरा-हरा लगा था ! आई आवाज़ में भी दम दिखा था ? कुछ हुआ लगा था ! मेरा मन तनिक प्रसन्न हुआ था . चेहरा भी खिला था ….? और मैं अहमदाबाद छोड़ कर …दिल्ली की ओर चल पड़ा था ! और मैं देख रहा था कि मेरे प्रशस्त हुए यात्रा -पथ पर …जसोदा बैन पुष्पानजलियाँ …बिछाए मुझे विजय श्री को पाने का वरदान दे रही थी ? उस ने मुझे अजेय बना दिया था …और अपने तप के तेज से …अजर-अमर होने को कहा था !!

अचानक ही मेरा डर जाता रहा था ! मैं स्वस्थ और समर्थ हुआ – नरेन्द्र मोदी , दिल्ली की ओर चल पड़ा था ! मैं ठीक पाँच बज के उनतीस मिनिट पर -गुजरात भवन -दिल्ली पहुंचा था ….और मुझे पता चला था कि …अडवानी जी घर से ..पाँच बज कर तीन मिनिट पर ..यहाँ आने के लिए निकले थे ! पर लौट गए थे !! उन्होंने राजनाथ सिंह को पत्र लिख कर भेजा था . और कहा था कि …’जो होना था …नहीं हो रहा था …?’ ! और पार्टी के लिए वो अब काम नहीं करेंगे …!!

“आप को पता नहीं ,भाई जी …?” कोई मुझे बता रहा था . “अमेरिका ने ख़ास आप के लिए …बम तैयार किया है ! इस का नाम है – राहुल गाँधी !! बन तो जाएंगे पी एम् …आप …! पर …..”

“बनने तो दो,भाई ….?” मैंने सहज भाव से कहा था ….और अपनी तैयारी में जुट गया था .

बोर्ड की मीटिंग हो रही थी . विचार -विमर्श चल रहा था . सब की राय ली जा रही थी ! मोदी के नाम पर सहमती होती ही जा रही थी . एक के बाद एक बोर्ड मेम्बर …मोदी के पक्ष में अपनी राय देते जा रहे थे !

“मेरे विचार से …हमें नरेन्द्र मोदी से अच्छा …और कोई पी एम् के लिए पार्टी में नहीं मिलेगा …?” मुरली मनोहर जोशी ने बोर्ड के मेंबरों को सम्बोधिर कर कहा था . “क्यों न हम ..सर्वसम्मति से ..उन के नाम की घोषणा कर दें …?”

बात मान्य थी ! वक्त पाँच बज कर इक्कावन मिनिट था !! और वक्त का चेहरा …सफ़ेद था …!!

“व्हाई आर यू …बाईटिंग …ए ..बुलेट , सर ….?” राजनाथ सिंह से फोन पर कोई कह रहा था . “अडवानी जी नहीं आ रहे हैं !!” उस ने नई सूचना दी थी . “आप का अपना भी तो कैरिएर …है …?” दो मुहां प्रश्न था . “आप भी ….तो ….?”

“शट -अप ….!!” क्रोध पूर्ण उत्तर दे कर राजनाथ सिंह ने फोन काट दिया था .

बाल-बाल बचे थे – मोदी जी ….? पीछे बैठे विरोधियों का युद्ध जारी था …! अडवानी का तीर खाली जाते देख …खलबली मच गई थी ! अब और कौन-सा बम था – जिसे वो फोड़ते ….?

ठीक छह बज कर बीस मिनिट पर मैं …११ अशोक रोड पहुंचा था ! मीटिंग चल रही थी . मुझे आया देख ख़ुशी की एक लहर-सी दौड़ गई थी ! जमा लोगों ने मुझे नई निगाहों से देखा था ! मुझे बोर्ड के सदस्यों ने अन्दर बुलाया था . एक हल-चल थी . आमोद-प्रमोद था …! शुभ-शुभ-सा सब कुछ था …?

“आप को जिम्मेदारी …दी जा रही है,नरेन्द्र जी …कि आप २०१४ के चुनाव लड़ेंगे …जीतेंगे ….और इस महान भारत देश के …प्रधान मंत्री का पद -भार संभालेंगे …!!” तालियाँ बजने लगीं थीं . “औपचारिक घोषणा की जा रही है ! आप मनोनीत हैं …!!” मुझे बताया गया था .

वक्त छह बज कर उनतीस मिनिट था ! और अब वक्त का चेहरा केसरिया था !!

“हम दिवाली वाले दिन दिवाली मनाते हैं ….पहले नहीं …?” कपिल सिब्बल ने विरोधियों की ओर से कहा था . लेकिन मेरे लिए कोई संकेत …या कोई सन्देश न था …?

“जाओ ! बुड्ढे …के पैर पकड़ो …! आशीर्वाद लो …!!” राजनाथ सिंह कह रहे थे . “भागो …! और हाँ ….! ठीक साढ़े सात बजे … अटल जी के पास …?” उन का इशारा था .

कौन पार्टी में रहा …कौन भागा …कौन रोया …कौन हंसा …और किस ने कोसा …किस ने परोसा …मुझे कुछ याद नहीं ….?

में तो अडवानी जी के चरण पकडे …उन से आशीर्वाद ले रहा था !!

“अटल जी इंतज़ार में हैं ! जाओ ….!!” अडवानी जी ने कहा था .

और मैं भाग लिया था …….

……………………………………..

श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!