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स्वामी अनेकानंद भाग 73

स्वामी अनेकानंद भाग 73

मग्गू और कल्लू उसके घर के एकांत में बैठे पी रहे थे। "चुनावी मोर्चा हर रोज कठिन होता जा रहा है कल्लू।" मग्गू के माथे पर चिंता रेखाएं उभर आई थीं। "लगता नहीं कि इस बार पार पड़ेगी।" मग्गू का कंठ स्वर कांप गया था। "विलोचन ने इस बार पूरा दमखम लगा दिया है। बबलू ने जान झोंक...

जंगल में दंगल संग्राम पंद्रह

जंगल में दंगल संग्राम पंद्रह

सर्पों ने हमला किया था। लेकिन न जाने कहां से और कैसे वही लपलपाती रोशनी की लहर दौड़ी थी और हमला करते सर्प जलकर भस्म हो गए थे। सर्पों में भगदड़ मच गई थी। मणिधर की भी घिघ्घी बंध गई थी। चारों ओर सर्पों की लाशें ही लाशें बिछ गई थीं।

पूस की रात

पूस की रात

- प्रेमचंद हल्कू ने आकर स्त्री से कहा - सहना आया है| लाओ, जो रूपए रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे| मुन्नी झाड़ू लगा रही थी| पीछे फिर कर बोली - तीन ही रूपए हैं, दे दोगे तो कम्बल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे| अभी...

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