Posted on

अटल बिहारी वाजपेयी – एक युग का अंत

atal bihari vajpayee

बाधाएं आती हैं आयें 

घिरें प्रलय की घोर घटायें 

पावों के नीचे अंगारे 

सिर पर बरसें यदि ज्वालायें 

निज हाथों में हँसते हँसते 

आग लगाकर जलना होगा 

कदम मिला कर चलना होगा 

– अटल बिहारी वाजपेयी 

श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म २५ दिसंबर १९२४ को हुआ. अटल जी तिन बार भारत के प्रधानमंत्री बने. पहली बार १९९६ में, १३ दिनों के लिए. फिर १९९८ से १९९९ तक ११ महीनों के लिए और फिर १९९९ से २००४ तक पुरे पांच वर्षों के लिए. 

अटल जी ४ दशकों से भी ज्यादा लोक सभा के सांसद रहे और दो बार राज्य सभा के सदस्य मनोनीत हुए. २००९ में स्वास्थ्य के कारण उन्होंने सक्रीय राजनीती से सन्यास ले लिया. 

२०१५ में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणव मुख़र्जी ने उन्हें भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया.

१६ अगस्त २०१८, ५.०५ मिनट पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्वर्गवासी हो गए.

भारत ने अपना एक महान सपूत खो दिया जिसकी क्षतिपूर्ति संभव नहीं है.

Posted on

गुरु पूर्णिमा का महत्त्व

guru purnimaआज गुरु पूर्णिमा है .. यह त्यौहार गुरु को समर्पित है और इस दिन शिष्य अपने गुरु का धन्यवाद करते है, उनका आदर सत्कार करते हैं| मुख्यतः इसे पुरे भारतवर्ष में और नेपाल में मनाया जाता है| जहाँ भी हिन्दू हैं और भगवन बुध के अनुयायी हैं वहां गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है|

महर्षि वेद व्यास पराशर मुनि और देवी सत्यवती के पुत्र थे. इन्हें आदि गुरु भी माना जाता है.

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मॉस की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है. गुरु पूर्णिमा के दिन कृष्ण द्वैप्याना व्यास का जन्म हुआ था जिन्होंने महाभारत की रचना की. इन्हें आदि गुरु भी माना जाता है. इन्होने वेद को जन मानस की समझ के लिए चार भागो में बांटा – साम वेद, ऋग वेद, अथर्व वेद और यजुर वेद. इन चारो वेदों की १८ पुराणों में व्याख्या की. इनको फिर १०८ उपनिषदों में समझाया. वेदांत सूत्र में वेदों का सार लिखा और भगवत गीता में भी समझाया. महाभारत को भी पांचवा वेद माना जाता है. गुरु व्यास की इन रचनाओं से आप उनकी विद्वता का अनुमान लगा सकते हैं.

गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागु पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय ||