स्वामी अनेकानंद भाग 62

स्वामी अनेकानंद भाग 62

सुबह का सूरज निकलने के साथ-साथ दोनों भाई नाश्ता पानी करते और कदम खंडी पर पहुंचते। आनंद की आंखें अचानक ही बिल्लू के बताए कोमल सपने से जा मिलतीं। कदम खंडी की साढे़ सात बीघा जमीन जैसे आनंद को आ कर बार-बार सैल्यूट मारती और मालिक होने के गर्व से भर देती। कदम खंडी पर कोठी...
स्वामी अनेकानंद भाग 62

स्वामी अनेकानंद भाग 61

नब्बो बकरी चराने नहीं आई थी। धीरज बेचैन था। वह बार-बार गांव की ओर देख रहा था। खेत में काम करने का उसका मन ही न कर रहा था। धीरज चिंता मग्न था। क्या हुआ जो नब्बो नहीं आई – वह जानने की जिज्ञासा से लड़ रहा था। उसे बुरे-बुरे खयाल सता रहे थे। क्या उनके प्यार की खबर...
स्वामी अनेकानंद भाग 62

स्वामी अनेकानंद भाग 60

सूनी-सूनी आंखों से राम लाल ठहर गए दृश्य का जायजा ले रहा था। कल्लू चुनावों में व्यस्त था। उसके पास मग्गू और आचार्य घनानंद जैसे दो समर्थ खिलाड़ी थे। उसका चुनाव जीतना तय था। कदम मोहन मकीन की सेवा में व्यस्त था। स्वामी अनेकानंद का झूठ पर्ण कुटीर में तालों के भीतर बंद था।...