by Major Krapal Verma | May 28, 2026 | स्वामी अनेकानंद
तप:पूत काया, उजड़े बिगड़े बाल, लम्बी लटक आई दाड़ी, निस्तेज हुई आंखें और छुहारे सी सूख गई सुनहरी काया स्वामी जी की तपस्या के प्रमाण थे। घोर तप किया था – स्वामी जी ने – ये अब सर्व मान्य सच था। घोर निराशा के दलदल से बेहोश हुए अरबपति मोहन मकीन का यों साबुत बच...
by Major Krapal Verma | May 25, 2026 | स्वामी अनेकानंद
“गुरु! टेलीग्राम आया है।” कदम ने राम लाल को सूचना दी थी। “बाबू कह रहा है कि आ कर ले जाएं अपना टेलीग्राम।” उसने आदेश को कह सुनाया था। राम लाल जैसे नींद से जागा हो – इस प्रकार की प्रतिक्रिया हुई थी। नई नवेली बनी पर्ण कुटीर तैयार थी। राम लाल...
by Major Krapal Verma | May 23, 2026 | स्वामी अनेकानंद
“मैं और नहीं चल सकती धीरज।” नब्बो ने करुण गुहार लगाई थी। “देख। देख पैरों में कैसे मोटे-मोटे छाले पड़ गए हैं।” नब्बो की आंखें भर आई थीं। धीरज ने मुड़ कर नब्बो के पैरों का जायजा लिया था। दोनों पैर मोटे-मोटे छालों से भरे थे। उसका हिया पसीज गया था।...