हाँ, तुम बिछड गये

जब तुम पडे थे अंतिम शय्या मेंबिलख रहे थे सब आस पासतुम्हारी साँसे भी मौन थी जैसे तुम हमारे प्यार को मौन करके जा रहे होमैं कितना अब रो लूँ, चीख चिल्ला लूँ भला अब कैसे तुम जग पाओगे फिर से शोर मचा पाओगे कैसे अब नहीं कर पाउँगी मैं, तुमसे अनगिनत बातें जिनके शब्द...

ग़ज़ल – आज तुम्हें एक रीत सुनाते है !

चलो आज तुम्हें एक ‘रीत’ सुनाते हैधक -२ धड़कनों की ‘प्रीत’ सुनाते है, क़लम से स्याही का क्या है रिश्ताशब्दों से बुना सुंदर ‘गीत’ सुनाते हैं, जो अब तक हुआ तेरे-मेरे बीच मेंवो बीते कल का ‘अतीत’ सुनाते हैंं, खास नहीं जोड़ा...

ग़ज़ल – ऐ खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है !

ऐ-खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है,मक़ाम हासिल की गज़ब ‘काविश’ लगी है ! देख वो अंधी शौहरत दुब गया उसमे मैं,फिर भी और ज्यादा की ‘कशिश’ लगी है ! भूल बैठा इंसानियत के तौर तरीको को,क्योकि मन में अपनों से ‘रंजिश’ लगी है ! अब नहीं है...
सबसे मिली

सबसे मिली

पर्दा उठता है.. स्वर्ग लोक का एक सुन्दर दृश्य.. सभी मकान लाइन से बने हैं.. एक ख़ास मकान का महूर्त दिखाया जा रहा है। घन्टी बजती है.. टींग!!  टोंग!!… मम्मीजी! गेट खोलिए! लगता है.. मेहमान आने शुरू हो गए!”। “ हाँ! हाँ! ला! ठहर देखूं”। मम्मीजी दरवाज़े तक जातीं...

लेख– आख़िर हम मानवीय मूल्यों को क्यों बिसारते जा रहें?

बीते दिनों उसी राजधानी नई दिल्ली के पांडव नगर और मयूर विहार में दो युवकों की हत्या रोडरेज की वज़ह से कर दी गई। जिस दिल्ली को आम बोलचाल की भाषा में कहते हैं, दिल्ली है दिल वालों की। फ़िर ऐसे में काहे का दिल और दिल्ली? हम मानसिक रूप से इतने कमजोर और असहनशील होते जा...

लेख– शिक्षित और स्वस्थ समाज के लिए हो राजनीतिक पहल

बात शिक्षा और स्वास्थ्य के विषय की होगी। तो यह समझने से पूर्व की हमारी सरकारें इनके प्रति कितना संजीदा हैं। उसके पहले प्लेटो की एक उक्ति स्मरण हो रहीं है। उनके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति शिक्षा की उपेक्षा करता है, तो वह अपने जीवन के अंत तक पंगु की तरह जायेगा। ऐसे में जब...