by Kumar Gaurav | Jan 23, 2019 | Uncategorized
अब बोलो कौन सी एकेडमी बनायी जाये, जहाँ इंसान को इंसानियत सिखाई जाये | दर्द से परेशान इंसान को मदद का हाथ चाहिए, हांथ उठते हैं पर ये सोंच कि चलो एक वीडियो बनाई जाये | ~कुमार...
by Mahesh Tiwari | Jan 22, 2019 | Uncategorized
कहते हैं, एक दृश्य हज़ार शब्दों के बराबर होता है, और दृश्य-श्रव्य संचार का सशक्त माध्यम होता है। तो सिनेमा जो उपयुक्त का मिला-जुला स्वरूप है। क्या आज के दौर में अपने उद्देश्य को सार्थक कर पा रहा। तो इसका जवाब काफ़ी हद तक नकारात्मक ही मिलेगा, क्योंकि सामाजिक और...
by Shivam Patel | Jan 21, 2019 | Uncategorized
न जाने कब कहां कैसे बढ़ा था हमारे दरमियां जो मामला था वो लड़की नूर में डूबी हुई थी मैं सुब्ह-ए-सर्द का कोहरा घना था सफर में ही समझ आया यह हमको मैं खुद में बन गया एक रास्ता था वो जन्मों तक हमारी ही रहेंगी मैं सदियों से इसे सच मानता था वह जो पहचानते भी अब नहीं है उनसे...
by Rachna Siwach | Jan 21, 2019 | Uncategorized
सुनीता प्रहलाद के लालन-पालन में लगी रहती थी.. और रमेश शाम को सज-धज कर तैयार हो कर सफ़ेद रंग की मारुति कार में बैठकर जो सुनीता दहेज में लेकर आई थी.. निकल जाता था। सुनीता ने कभी रमेश से उसके जाने पर कोई भी सवाल नहीं पूछा था। लेकिन थोड़ा-थोड़ा रमेश के व्यवहार में बदलाव...
by Major Krapal Verma | Jan 21, 2019 | Uncategorized
कहानी “बलवंत का क्या बुरा है ….?” मैंने अनु को सुना कर जोरों से कहा था . मेरा यही उद्देश्य था कि अनु के जहन में बसे अनुराग के अति प्रिय प्रतबिंब को तोड़ डालूँ . मैंने अनु की व्यथा को भांप लिया था . अनु के कजरारे नयनों से बहते गरम-गरम आंसूओं ने मुझे...
by Rachna Siwach | Jan 21, 2019 | Uncategorized
फैक्ट्री का कबाड़ा बेच-बेच कर रमेश के पास अब पैसे आना शुरू हो गए थे.. इन पैसों से रमेश अब प्रहलाद और अपना छोटा-मोटा ख़र्चा चला रहा था। रमेश के पास लगभग कितने पैसे आते हैं.. यह जानकारी सुनीता को छोड़कर सारे घर को थी.. कारोबार जो था.. उनका। इन पैसों से सुनीता और...