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बारिश

बेहद आकुल व्याकुल बैठे उन,
बेबस शान्त नितान्त अनेक मन |
मन ही मन विस्मित हो हो कर ,
वह रह जाते मन मसोसकर ||
हे ! इन्द्रदेव हे ! वरुणदयामय,
करो दया इन आर्त जनों पर |
असमय बारिस और हवा से,
दुस्प्रभाव पड़ता फसलों पर ||
~ कुमार गौरव

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हिन्दू नववर्ष

सुगम है नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा,
यह वर्षारंभ है मन के मांगल्य का उत्सव
पंक्षी भी हैं करते पेड़ों पर कलरव
मंद सुगंधित हवा बह रही,
वृक्षों पर नव पल्लव चमके,
भ्रमर गुंजित मधुकर गुंजित |
कोयल मंजरियों पर कुहके
शक्ति उपासना मन में पुलकित ||
~कुमार गौरव

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होली मुबारक

मन में उमंग और तन में तरंग है,
देह पर नेह और हर्ष संग संग है |
होली पर रोली और बोली का ही रंग है,
बाजत है बाजने ढोल और मृदंग है ||
~कुमार गौरव