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जवानी

लौ जगी जो देश प्रेम की अप्रतिम प्रेम कहानी थी,
हंसकर फांसी की सजा सुनी वो बेख़ौफ जवानी थी ||
~कुमार गौरव

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मां शारदे

वींणा पांणि मातु आजु यहि वरदान दे,
तेरी दिव्य ज्योति सदा यूंहि जलती रहे |
ग्यान का प्रकाश नित नवल उछास,
मन मन्दिर के अंदर अबाध बहता रहे ||
ग्यान दे प्रकाश दे नवल विश्वास दे,
कि तम का विनाश हो न मन ये उदास हो |
भारत की भूमि फिर ध्यानवान कर दे,
ध्यानवान कर दे प्रकाशवान कर दे |
कि अहं के भान का तू निदान कर दे,
भारत की भूमि फिर से उद्यान कर दे ||
~कुमार गौरव

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सफर

जितना कम सामान रखेगा
सफर तेरा आसान रहेगा
भारी वजन वालों को
मैने अक्सर फंसते देखा है ||
सफर की तप्त राहों में
मैने उसे हंसते देखा है ||
~कुमार गौरव