बारिश

बेहद आकुल व्याकुल बैठे उन, बेबस शान्त नितान्त अनेक मन | मन ही मन विस्मित हो हो कर , वह रह जाते मन मसोसकर || हे ! इन्द्रदेव हे ! वरुणदयामय, करो दया इन आर्त जनों पर | असमय बारिस और हवा से, दुस्प्रभाव पड़ता फसलों पर || ~ कुमार...

हिन्दू नववर्ष

सुगम है नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, यह वर्षारंभ है मन के मांगल्य का उत्सव पंक्षी भी हैं करते पेड़ों पर कलरव मंद सुगंधित हवा बह रही, वृक्षों पर नव पल्लव चमके, भ्रमर गुंजित मधुकर गुंजित | कोयल मंजरियों पर कुहके शक्ति उपासना मन में पुलकित || ~कुमार...

होली मुबारक

मन में उमंग और तन में तरंग है, देह पर नेह और हर्ष संग संग है | होली पर रोली और बोली का ही रंग है, बाजत है बाजने ढोल और मृदंग है || ~कुमार...

महिला दिवस…

प्रकृति, शक्ति, ममता, क्षमा दया, तपस्या, आराधना कितने कितने रूप हैं बहन, मित्र और मां ~कुमार...

निम्न राजनीति

सात दिनों तक देश के एकजुटता का द्योतक सत्ता पक्ष विपक्ष का खत्म हुआ अब सूतक खत्म हुआ अब सूतक आरोप हैं रहे लगाये भला हांथ का साथ देश कहां कब तक पाये कह पंक्षी कविराय कहां तक दुश्मन पाये मात लाभ हानि के फेर में जब टिके न दिन भी सात || ~कुमार...