Posted on

ग़ज़ल – आज तुम्हें एक रीत सुनाते है !

चलो आज तुम्हें एक ‘रीत’ सुनाते है
धक -२ धड़कनों की ‘प्रीत’ सुनाते है,

क़लम से स्याही का क्या है रिश्ता
शब्दों से बुना सुंदर ‘गीत‘ सुनाते हैं,

जो अब तक हुआ तेरे-मेरे बीच में
वो बीते कल का ‘अतीत‘ सुनाते हैंं,

खास नहीं जोड़ा मैंने उन लम्हों से
जो जोड़ा है वो ‘व्यतीत‘ सुनाते हैं,

बहुत ही छुपाया जहां से तुमको
पर छिप ना सके वो ‘मीत‘ सुनाते हैं,

मालूम नहीं तू दिल में या जहन में
मगर हार को बदल दे ‘जीत‘ सुनाते हैं,

तुम समझो या न समझो हमको
कैसे बस गयी वो ‘मनमीत‘ सुनाते हैं,

सूरज की चाँद से क्या है चुप्पी
उस ‘मजबूर’ की वो ‘बातचीत‘ सुनाते हैं

-© Sanjeet Kushwaha

Posted on

ग़ज़ल – ऐ खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है !

ऐ-खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है,
मक़ाम हासिल की गज़ब ‘काविश‘ लगी है !

देख वो अंधी शौहरत दुब गया उसमे मैं,
फिर भी और ज्यादा की ‘कशिश‘ लगी है !

भूल बैठा इंसानियत के तौर तरीको को,
क्योकि मन में अपनों से ‘रंजिश‘ लगी है !

अब नहीं है मोहब्बत किसी की मोहब्बत
श्याद तभी दिलों में इक ‘लर्ज़िश‘ लगी है !

नफरतो ने बना लिया क्या उम्दा महल
बे-शुमार शरर की मेरी ‘नवाज़िश‘ लगी है !

ऐ-खुदा जहां में ये कैसी आतिश लगी है !
उर्दू शब्दों के अर्थ
आतिश = आग
काविश = ज़ोर
कशिश = आकर्षण
लार्जिश = कंपन
रंजिश = नाराज़गी
नवाज़िश = मेहरबानी
शरर = चिंगारी

– © Sanjeet Kushwaha