कितने प्यारे हैं ये पेड़

कितने प्यारे हैं ये पेड़ सब के मन को भाते हैं परोपकार की भावना इनमें सब को छाया देते हैं जब इनमें लगते हैं फल सबका जी ललचाता है नहीं पुछते कभी ये हमसे क्यों मेरे फल खाते हो ? सबको देते हैं शुद्ध हवा तन को स्वस्थ बना देता है जब चलती है ठंडी हवा सबको राहत मिलती है पेड़ों...

मानवता

वसंत का आरंभ था।। कनेर की एक मोटी,मजबूत डालदेख कर, मधुछत्र डाल दिया गया।। मधुमक्खियां दूने उत्साह से काम कर रही थीं।। छोटे-बड़े असंख्य फूलों से मकरंद चूसा गया।। दिन रात एक हो गए।। लंबे समय से चली आ रही मेहनत-मशक्कत ने मूर्त रूप लिया और छत्ता बनके तैयार हुआ।। भारी भरकम...

लेख– गणतंत्र में गण की पूछ कहीं कम तो नहीं हो रहीं?

संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत होती है, हम भारत के लोग। इसका निहितार्थ यहीं है, कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और कच्छ से लेकर असम तक हम सब एक है। ऐसे में जब हम गणतंत्र दिवस इस वर्ष मनाने जा रहें। फ़िर हमें विचार करना चाहिए, कि क्या हम सभी वास्तव में एक है। फ़िर वह...

You Are Not Alone

You’re not alone,You’re not a mess,You’re not broken.You’re healing,You’re growing,You’re becoming bold,fearless, powerful,kind, loving,passionate and morewarm than cold.So take small steps,Don’t be afraid,Bid farewell to your...

गणतंत्र मुबारक

सबको हो गणतंत्र मुबारक, तंत्र के सजग गंण बने हम बन सजग तंत्र के जागृत नागरिक हक के संग कर्तव्य निभाएं सत्य निष्ठा जागृत मन से सब अपने अपने फर्ज निभायें तब होवे गणतंत्र मुबारक सबको हो गणतंत्र मुबारक || ~कुमार...