खानदान 41

खानदान 41

अब माँ की कही हुई बातों पर सुनीता आराम से अमल कर रही थी। बाहरी अमल करते हुए सुनीता अपने संग सेतू को लिये घूम रही थी। सुनीता की सोच उसके चेहरे पर छपती जा रही थी.. जिसको देख अनिताजी ने एक बार सुनीता को फ़िर से समझाया था,” कोई बात नहीं घूमने दे लड़की के साथ! पर तू आराम...

बारिश और तुम्हारा मनुहार

आसमां में बिजली कड़कने लगी है, कुछ दिनो की हाड़ कंपा देने वाली ठंड जब बादल बिल्कुल शांत थे बस सर्दी होती हल्की सी धूप निकलती और फिर से रात हो जाती कहा कुछ अलग हो रहा था वैसे ही जैसे अलग हो कर तुम कौन सा कुछ अलग कर रहे हो? मगर देखो बादलों से रहा नही गया और पूरे मौसम को...

व्यापार

आज के व्यापारिक युग में, बिकने की ही होड़ लगी है बिक रहे सब औने पौने | हर युवा व्यापार हो गया, जो बिका वो पाया ठौर ठिकाने, बिना बिका बेकार हो गया || ~ कुमार...
खानदान 41

खानदान 40

घर में गेट का डिज़ाइन सुनीता के सामने रोज़ रमेश के द्वारा दिखाया जाता था। रमेश गेट को लेकर काफ़ी सीरियस था। आख़िर एक दिन सुनीता ने पूछ ही लिया था,” किस के घर के लिये बन रहा है.. गेट!”। “ अरे! वो अपनी है! न सेतू! बस! उन्हीं के लिये बना रहा हूँ। अरे! इतनी क्या पूछताछ कर...

सुन्दर सपना टूट गया

आह!एक सुंदर सपना टूट गया, मेरा जीवन मुझसे रुठ गया, लड़ता रहता हूँ तेरी यादों से, जबसे तेरा सुंदर साथ छुट गया, आह!एक सुंदर सपना टूट...
दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ

दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ

दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ भव्य कुम्भ दिव्य भव्य कुम्भ दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ दिव्य दिव्य है कहानी किसकी दृढ़ ये विश्वास है ज्ञान की ये धरती अध्यात्म से बलवान है दिव्य है पवित्रता भव्य ये श्रृंगार है दिव्य है पवित्रता भव्य ये श्रृंगार है भव्य कुम्भ दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ...