by Rachna Siwach | Jan 25, 2019 | Uncategorized
अब माँ की कही हुई बातों पर सुनीता आराम से अमल कर रही थी। बाहरी अमल करते हुए सुनीता अपने संग सेतू को लिये घूम रही थी। सुनीता की सोच उसके चेहरे पर छपती जा रही थी.. जिसको देख अनिताजी ने एक बार सुनीता को फ़िर से समझाया था,” कोई बात नहीं घूमने दे लड़की के साथ! पर तू आराम...
by Tanya Tripathi | Jan 25, 2019 | Uncategorized
आसमां में बिजली कड़कने लगी है, कुछ दिनो की हाड़ कंपा देने वाली ठंड जब बादल बिल्कुल शांत थे बस सर्दी होती हल्की सी धूप निकलती और फिर से रात हो जाती कहा कुछ अलग हो रहा था वैसे ही जैसे अलग हो कर तुम कौन सा कुछ अलग कर रहे हो? मगर देखो बादलों से रहा नही गया और पूरे मौसम को...
by Kumar Gaurav | Jan 25, 2019 | Uncategorized
आज के व्यापारिक युग में, बिकने की ही होड़ लगी है बिक रहे सब औने पौने | हर युवा व्यापार हो गया, जो बिका वो पाया ठौर ठिकाने, बिना बिका बेकार हो गया || ~ कुमार...
by Rachna Siwach | Jan 25, 2019 | Uncategorized
घर में गेट का डिज़ाइन सुनीता के सामने रोज़ रमेश के द्वारा दिखाया जाता था। रमेश गेट को लेकर काफ़ी सीरियस था। आख़िर एक दिन सुनीता ने पूछ ही लिया था,” किस के घर के लिये बन रहा है.. गेट!”। “ अरे! वो अपनी है! न सेतू! बस! उन्हीं के लिये बना रहा हूँ। अरे! इतनी क्या पूछताछ कर...
by Nitesh Verma | Jan 24, 2019 | Uncategorized
आह!एक सुंदर सपना टूट गया, मेरा जीवन मुझसे रुठ गया, लड़ता रहता हूँ तेरी यादों से, जबसे तेरा सुंदर साथ छुट गया, आह!एक सुंदर सपना टूट...
by Amit Pandey | Jan 24, 2019 | Uncategorized
दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ भव्य कुम्भ दिव्य भव्य कुम्भ दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ दिव्य दिव्य है कहानी किसकी दृढ़ ये विश्वास है ज्ञान की ये धरती अध्यात्म से बलवान है दिव्य है पवित्रता भव्य ये श्रृंगार है दिव्य है पवित्रता भव्य ये श्रृंगार है भव्य कुम्भ दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ...