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“ऊपर वाला जब भी देगा देगा छप्पर फाड़ कर”

ऊपर वाला जब भी देगा
देगा छप्पर फाड़ कर
दुनिया में है तुमको भेजा
देगा छप्पर फाड़ कर
अच्छे काम सदा तुम करना
बुरे काम से करना तौबा
सच्चाई की ताकत रखना
जीवनभर है उस पर चलना
मानवता की सेवा करना
मानवता के लिये लड़ना
मानवता से बढ़कर
कोई काम नहीं इस दुनिया में
पथरीली राहों पर चलकर
पैरों में छाले भी पड़ेंगे
फिर भी तुम घबराना मत
खुदा के नेक बन्दे बनना
राह से भटकोगे नहीं
मानव का फर्ज़ निभाना
जीवन सफल बनाना तुम
अब तुम मत डरना
सबका भला ही करना
ऊपर वाला जब भी देगा
देगा छप्पर फाड़ कर |
~ सूर्यदीप कुशवाहा 

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कितने प्यारे हैं ये पेड़

कितने प्यारे हैं ये पेड़
सब के मन को भाते हैं
परोपकार की भावना इनमें
सब को छाया देते हैं
जब इनमें लगते हैं फल
सबका जी ललचाता है
नहीं पुछते कभी ये हमसे
क्यों मेरे फल खाते हो ?
सबको देते हैं शुद्ध हवा
तन को स्वस्थ बना देता है
जब चलती है ठंडी हवा
सबको राहत मिलती है
पेड़ों के बागों में पहुँचकर
सबका मन खिल जाता है
दुख – सुख में है देते साथ
सबसे अच्छे मित्र यही हैं
ये कुछ भी है लेते नहीं
सबको सदा देते रहते हैं
कितने प्यारे हैं ये पेड़
सब के मन को भाते हैं |
– सूर्यदीप कुशवाहा

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स्वच्छ भारत बनाना है

स्वच्छ भारत बनाना है
बापू का सपना
अब पूरा कर जाना है
स्वच्छता की अलख
हमें सब में जलाना है
प्रधान सेवक ने यह ठाना है
स्वच्छ भारत बनाना है
नई इबारत गढ़ने को
अब हम तैयार है
इधर – उधर ना फेकेंगे
अब आदत ये बदलेंगे
कूड़ेदान का करेंगे प्रयोग
कचरा नहीं फैलायेंगे
ज़िससे बीमारी भागेगी
भारत में खुशहाली छायेगी
विकास की बयार चहुंओर बहेगी
जग में पहचान बढ़ेगी
हम सब स्वच्छता अपनायेंगे
भारत को स्वर्ग बनायेंगे
फिर विश्वगुरु कहलायेंगे
इसीलिये सबको कह रहा हूँ
स्वच्छ भारत बनाना है |
– सूर्यदीप कुशवाहा