Posted on

कितने प्यारे हैं ये पेड़

कितने प्यारे हैं ये पेड़
सब के मन को भाते हैं
परोपकार की भावना इनमें
सब को छाया देते हैं
जब इनमें लगते हैं फल
सबका जी ललचाता है
नहीं पुछते कभी ये हमसे
क्यों मेरे फल खाते हो ?
सबको देते हैं शुद्ध हवा
तन को स्वस्थ बना देता है
जब चलती है ठंडी हवा
सबको राहत मिलती है
पेड़ों के बागों में पहुँचकर
सबका मन खिल जाता है
दुख – सुख में है देते साथ
सबसे अच्छे मित्र यही हैं
ये कुछ भी है लेते नहीं
सबको सदा देते रहते हैं
कितने प्यारे हैं ये पेड़
सब के मन को भाते हैं |
– सूर्यदीप कुशवाहा

Posted on

स्वच्छ भारत बनाना है

स्वच्छ भारत बनाना है
बापू का सपना
अब पूरा कर जाना है
स्वच्छता की अलख
हमें सब में जलाना है
प्रधान सेवक ने यह ठाना है
स्वच्छ भारत बनाना है
नई इबारत गढ़ने को
अब हम तैयार है
इधर – उधर ना फेकेंगे
अब आदत ये बदलेंगे
कूड़ेदान का करेंगे प्रयोग
कचरा नहीं फैलायेंगे
ज़िससे बीमारी भागेगी
भारत में खुशहाली छायेगी
विकास की बयार चहुंओर बहेगी
जग में पहचान बढ़ेगी
हम सब स्वच्छता अपनायेंगे
भारत को स्वर्ग बनायेंगे
फिर विश्वगुरु कहलायेंगे
इसीलिये सबको कह रहा हूँ
स्वच्छ भारत बनाना है |
– सूर्यदीप कुशवाहा