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“ऊपर वाला जब भी देगा देगा छप्पर फाड़ कर”

ऊपर वाला जब भी देगा
देगा छप्पर फाड़ कर
दुनिया में है तुमको भेजा
देगा छप्पर फाड़ कर
अच्छे काम सदा तुम करना
बुरे काम से करना तौबा
सच्चाई की ताकत रखना
जीवनभर है उस पर चलना
मानवता की सेवा करना
मानवता के लिये लड़ना
मानवता से बढ़कर
कोई काम नहीं इस दुनिया में
पथरीली राहों पर चलकर
पैरों में छाले भी पड़ेंगे
फिर भी तुम घबराना मत
खुदा के नेक बन्दे बनना
राह से भटकोगे नहीं
मानव का फर्ज़ निभाना
जीवन सफल बनाना तुम
अब तुम मत डरना
सबका भला ही करना
ऊपर वाला जब भी देगा
देगा छप्पर फाड़ कर |
~ सूर्यदीप कुशवाहा