आरोप !

आरोप !

कहानी . विस्तार – प्रथम :- संयोग तो देखिए …कि हम दोनों दो तने तूफानों की तरह …आमने-सामने खड़े थे ! वो मुझे उड़ा ले जाने के लिए आतुर खड़ी थी ! तो मैं भी उसे …उठा कर ले भागने की मुहीम बना रहा था ! वह चाह रही है कि किसी तरह वह …मुझे अपनी आँखों...
खानदान 53

खानदान 53

क्या कर रही थी.. सुनीता!.. अरे! सासु-माँ ने ही तो चोरी करवाई थी.. और उन्हीं से उनके वफादार कुत्ते रमेश की शिकायत करने लगी हुई थी। अरे!.. पगली!.. तेरे आदमी में दिमाग़ था, ही कब!.. माँ के हाथ के इशारों पर चलने वाली कठपुतली से ज़्यादा कुछ भी नहीं था.. रमेश!.. काश! तूने...
नानी घर कानू

नानी घर कानू

“ आ जाओ!.. छुट्टियाँ शुरू हो गयीं हैं”। “ कैसे आएँ माँ!.. तुम तो जानती ही हो हम क़ानू को अकेला छोड़ कर नहीं आ सकते”। “ अरे! दामाद जी हैं!.. तो सही!, उनके संग छोड़ आओ!”। “ नहीं माँ!.. हमारी बिटिया कानू हमें छोड़कर और किसी के भी साथ नहीं रह सकती”। इस बार भी गर्मियों की...
खानदान 53

खानदान 52

रमेश और सुनीता प्रहलाद और नेहा संग सब इंदौर वापिस आ गए थे.. माँ-बापू ने सुनीता को हमेशा की तरह से काफ़ी सारी विदा देकर रमेश के साथ इंदौर भेज दिया था.. दर्शनाजी भी संग ही आईं थीं। “ भरत का सुन दी ही मेरी चीख निकली थी, मैंने सोचा था.. आप नहीं रहोगे”। रेल में साथ-साथ...
प्यार का तराना !

प्यार का तराना !

कविता !! रात का अवसान आ चुका है – नीद किसी कर्ज ही तरह बाकी है ! तंग आ चुका हूँ, सपनों के खाखों में – तेरे अंग भरते-भरते ! प्यार का मुकाम तो कई बार आ चुका है ! तेरा आना किसी फर्ज की तरह बाकी है !! तेरे फूल -से अंगों को , सींचा है भावनाओं की –...
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में ज्योतिष विज्ञान की प्रासंगिकता

आधुनिक परिप्रेक्ष्य में ज्योतिष विज्ञान की प्रासंगिकता

आज का युग विज्ञान का युग है और विज्ञान दिनबदिन प्रगति की और अग्रसर है। नई तकनीके ईजाद हो रही है, ज्ञान का शोध करके नये-नये आविष्कार किये जा रहे है जो मानव जीवन स्तर में नई क्रांति ला रहे है। इन सबसे ज्योतिष विज्ञान भी अछूता नहीं रहा है। हजारों वर्षों से इस पर...