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आरोप !

crazy woman

कहानी .

विस्तार – प्रथम :-

संयोग तो देखिए …कि हम दोनों दो तने तूफानों की तरह …आमने-सामने खड़े थे !

वो मुझे उड़ा ले जाने के लिए आतुर खड़ी थी ! तो मैं भी उसे …उठा कर ले भागने की मुहीम बना रहा था ! वह चाह रही है कि किसी तरह वह …मुझे अपनी आँखों में भरे ….और पी ले ? और मैं चाहता हूँ कि …उसे तनिक-सा झटक कर …अपनी चौंच में भर लूं …और ले उडूं ….और कहीं भी …किसी अनाम-से द्वीप में ले जा कर धरू….और फिर निपट अकेला में …उसे कुतर-कुतर कर खा लूं ….पचा लूं !!

“हा-य …..!!” उस ने पहल की है .

“हे- ल्लो …..!!” मैंने भी उत्तर दिया है .

हम कोई अज्ञात स्त्री-परुष नहीं हैं ! हम दोनों ही विश्व -विख्यात हैं ! और ….और ..न ही हम दोनों पागल हैं ! हम दो सुलझे हुए पुरुष और नारी हैं ! हम दोनों पूर्ण प्रशिक्षित हैं ! और ….और हाँ ! हम दोनों अपनी-अपनी आकांक्षाओं से अवगत हैं !!

मुझे उस में अनमोल खजाने दिखाई दे रहे हैं ….तो उस ने भी मुझ में …अपने सुनहरी सपने खोज लिए हैं ! अब हम दोनों खेल-खजानों से …बेहद उपयोगी बन …इशारा करते हैं – हम में सब कुछ – हम में सब कुछ मौजूद है ….उपलब्ध है ….तैयार है ! मात्र हाथ बढाने से ही …हम दोनों को मांगी मुरादें मिल सकती है ….और हम दोनों ……

मैं तो अधीर होने लगा हूँ ! और मैं देख रहा हूँ कि वह भी छटपटाने लगी है !!

“मैं …..कृष ……!” मैंने कहा है , यूं ही .

“जानती हूँ !” वह मुस्कराई है . “कौन नहीं जानता ,तुम्हें ….?” उस ने बड़े ही मोहक अंदाज़ में कहा है . “एक नाम ही नहीं ….अगर …एक लीजेंड कहें ….तो ….?” उस ने अब मुझे आँखों में सीधा देखा है . “आँख उठा कर देखती हूँ तो …हर जर्रे पर लिखा दिखाई देता है . तुम्हारा नाम, कृष …….” वह खिलखिला कर हंस पड़ी है .

अद्भुत हंसी है ….उस की ….! मुक्त-सी ….महकती हुई … मदहोश करती …. उछलती-कूदती ….और मुझे उठती-बिठाती ….उस की ये हंसी ही मुझे पागल बनाने लगाती है !

“क्रेजी ….!” अब उस ने भी अपना परिचय दिया है . “आई ….एम् …रियली …क्रेजी , कृष …….” जैसे उस ने मुझे एक चेतावनी दी है . “मेरी …वो …बहुचर्चित ..चुलबुली …और अज़ब -ग़ज़ब कहानियाँ तो तुम सुन ही चुके होगे ….?” उस का प्रश्न है .

एक स्वीकार के सिवा …और क्या उत्तर दूं …? सच बात है . क्रेजी की कहानियाँ तो वर्ल्ड -ओवर …प्रसिद्ध हैं ! वास्तव में ही पागल औरत है ! लेकिन अगर आप भी ….आज …मेरी तरह ..उस के सामने खड़े होते …तो ज़रूर पागल हो जाते …? उसे ‘किलर ब्यूटी ‘ कहा जा सकता है !

“हाँ,हाँ !” मैंने उत्तर खोज लिया है तो ही बोला हूँ . “वो तो …सभी पढ़ लेते हैं !” मैंने बात को तनिक हल्का किया है . “क्या है कि ….हम लोगों को …कुछ ज्यादा ही …खाया-गाया जाता है !” मैं हंसा हूँ . “लेकिन ,क्रेजी ! मैं भी किसी छाँट …पागल से कम नहीं हूँ ….?” मैं भी अब अपना ही गुणगान कर रहा हूँ !

“वो तो मैं देख ही रही हूँ ….?” क्रेजी भी हंस रही है . “बहुत…..बहुत …पढ़ा है …मैंने तुम्हारे बारे में ….? पर आज जब तुम्हें देखा है ….तो …सच मानो कृष ….मैं दंग रह गई हूँ ! मुग्ध हूँ, मैं ….मर गई हूँ , तुम पर ….!!” उस ने छू लिया है, मुझे .

ओह,गौड …! कैसी अजीव और अनोखी अनुभूति है ,ये …? जैसे कि …आज तक …अभी तक …इस पास खड़े पल तक …मुझे किसी नारी ने …छुआ ही न था …? और अब ….आज …जब छुआ है …तो मैं पिघल जाना चाहता हूँ …घुल जाना चाहता हूँ …इसी स्पर्श ..की तपिश में …और ….और अब झपट पड़ना चाहता हूँ ….क्रेजी …पर …!!

“कहाँ के लिए निकली हो ….?” मैंने उसे यूं ही पूछ लिया है .

“तुम्हारी ही तलाश में ….भटकती …हूँ !” क्रेजी का उत्तर है . है न अजीव -उत्तर …? इसे क्या पता था ….कैसे पता था …कि ..मैं कहाँ जा रहा हूँ …? क्यों जा रहा हूँ …..?

“और ….तुम ….?” उस ने भी मुझे पूछ लिया है .

“अब तो मैं कहीं भी नहीं जा रहा हूँ …….” मैंने कहा है और क्रेजी का हाथ थाम लिया है .

…………………

श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!