पश्चाताप

0 “तुम! तुम्हे…. तुम्हे यहाँ का पता किसने दिया?” आज महीनों बाद अपनी दहलीज पर कासिम को देखते ही एक बार फिर से अपना किया हुआ गुनाह उसकी आँखों के सामने आ गया। चोरी किये पैसे को अकेले ही संभालने के चक्कर में वो दोस्त पर जानलेवा हमला कर घटनास्थल से भाग...
खानदान 57

खानदान 57

अनिताजी ने बेटी के पास तरह-तरह का सामान देखते हुए.. खुश हुईं थीं.. और कहा था,” अपना, तेरा और हमारा कुछ नहीं है.. जो कुछ भी है.. सब अपना ही होता है.. बस!.. तू खुश रहना सीख”। “ पर माँ!. इन से सब ड्रामों से मेरा घर तो बसेगा ही नहीं”। सुनीता ने अनिताजी से कहा था। “ उसकी...
खानदान 57

खानदान 56

पैसे आने से बच्चे भी खुश थे.. और रमेश भी खुश थे.. पर सुनीता खुश नहीं थी.. अन्दर ही अन्दर मन में कह रही थी.. ये पैसे तो हमारे हैं ही नहीं। ऐसा लग रहा था.. सुनीता को जैसे घर में टेम्पररी खुशी आ गई हो। यह बात कुछ हज़म नहीं हुई थी.. दर्शनाजी ने रमेश के हाथ में पैसे दे...
खानदान 57

खानदान 55

दर्शनाजी और रमेश हरियाणे के लिये निकल गए थे। जब भी माँ-बेटा हरियाणे जाया करते थे… घर का माहौल बदल जाता था। रामलालजी अपनी धर्मपत्नि की गैर हाज़िरी में बहुत खुश रहा करते थे। सुनीता और रमा भी एक दूसरे के साथ अच्छी तरह से ही रहतीं थीं। घर में तरह-तरह के भोजन बनने लग जाया...

जवानी

लौ जगी जो देश प्रेम की अप्रतिम प्रेम कहानी थी, हंसकर फांसी की सजा सुनी वो बेख़ौफ जवानी थी || ~कुमार...
खानदान 57

खानदान 54

चाहे कुछ भी हो!.. सुनीता की अलमारी में से मुकेशजी की मेहनत की कमाई के सोने के चोरी होने का सबको बेहद बुरा लगा था। अब घर में एक ही दामाद हो.. और वो भी इस तरह की हरकत कर बैठे तो बुरा तो लगता ही है। पर सुनीता को सही तरीके से समझाना भी ज़रूरी हो गया था। हर माँ-बाप यही...