by Virender 'Veer' Mehta | Feb 18, 2019 | Uncategorized
0 “तुम! तुम्हे…. तुम्हे यहाँ का पता किसने दिया?” आज महीनों बाद अपनी दहलीज पर कासिम को देखते ही एक बार फिर से अपना किया हुआ गुनाह उसकी आँखों के सामने आ गया। चोरी किये पैसे को अकेले ही संभालने के चक्कर में वो दोस्त पर जानलेवा हमला कर घटनास्थल से भाग...
by Rachna Siwach | Feb 17, 2019 | Uncategorized
अनिताजी ने बेटी के पास तरह-तरह का सामान देखते हुए.. खुश हुईं थीं.. और कहा था,” अपना, तेरा और हमारा कुछ नहीं है.. जो कुछ भी है.. सब अपना ही होता है.. बस!.. तू खुश रहना सीख”। “ पर माँ!. इन से सब ड्रामों से मेरा घर तो बसेगा ही नहीं”। सुनीता ने अनिताजी से कहा था। “ उसकी...
by Rachna Siwach | Feb 17, 2019 | Uncategorized
पैसे आने से बच्चे भी खुश थे.. और रमेश भी खुश थे.. पर सुनीता खुश नहीं थी.. अन्दर ही अन्दर मन में कह रही थी.. ये पैसे तो हमारे हैं ही नहीं। ऐसा लग रहा था.. सुनीता को जैसे घर में टेम्पररी खुशी आ गई हो। यह बात कुछ हज़म नहीं हुई थी.. दर्शनाजी ने रमेश के हाथ में पैसे दे...
by Rachna Siwach | Feb 15, 2019 | Uncategorized
दर्शनाजी और रमेश हरियाणे के लिये निकल गए थे। जब भी माँ-बेटा हरियाणे जाया करते थे… घर का माहौल बदल जाता था। रामलालजी अपनी धर्मपत्नि की गैर हाज़िरी में बहुत खुश रहा करते थे। सुनीता और रमा भी एक दूसरे के साथ अच्छी तरह से ही रहतीं थीं। घर में तरह-तरह के भोजन बनने लग जाया...
by Kumar Gaurav | Feb 14, 2019 | Uncategorized
लौ जगी जो देश प्रेम की अप्रतिम प्रेम कहानी थी, हंसकर फांसी की सजा सुनी वो बेख़ौफ जवानी थी || ~कुमार...
by Rachna Siwach | Feb 13, 2019 | Uncategorized
चाहे कुछ भी हो!.. सुनीता की अलमारी में से मुकेशजी की मेहनत की कमाई के सोने के चोरी होने का सबको बेहद बुरा लगा था। अब घर में एक ही दामाद हो.. और वो भी इस तरह की हरकत कर बैठे तो बुरा तो लगता ही है। पर सुनीता को सही तरीके से समझाना भी ज़रूरी हो गया था। हर माँ-बाप यही...