by Dr. Radheshyam Lahoti | Feb 11, 2019 | Uncategorized
नेतृत्व का उद्देश्य लोगों को सही रास्ता बताना है! हुकूमत करना नहीं अक्सर हम देखते हैं कि कोई सामाजिक संस्था हो या कोई संगठन या कोई कोई राजनीतिक पद, इन सब पर जो भी व्यक्ति मनोनयन, चयन या निर्वाचन द्वारा जब काबिज़ होता हैं तो उसके बाद उसका रुतबा ही बदल जाता हैं उसको ऐसा...
by Kumar Gaurav | Feb 10, 2019 | Uncategorized
वींणा पांणि मातु आजु यहि वरदान दे, तेरी दिव्य ज्योति सदा यूंहि जलती रहे | ग्यान का प्रकाश नित नवल उछास, मन मन्दिर के अंदर अबाध बहता रहे || ग्यान दे प्रकाश दे नवल विश्वास दे, कि तम का विनाश हो न मन ये उदास हो | भारत की भूमि फिर ध्यानवान कर दे, ध्यानवान कर दे प्रकाशवान...
by Kumar Gaurav | Feb 8, 2019 | Uncategorized
जितना कम सामान रखेगा सफर तेरा आसान रहेगा भारी वजन वालों को मैने अक्सर फंसते देखा है || सफर की तप्त राहों में मैने उसे हंसते देखा है || ~कुमार...
by Rachna Siwach | Feb 8, 2019 | Uncategorized
मुकेशजी और अन्य घर के सदस्य भरत को पास के ही श्मशानघाट लेकर गए थे.. भरत को जलाया नहीं दफनाया गया था.. क्योंकि वह अभी नन्हा शिशु था। घर में माहौल दुःखद था, जो होना ही था। घर के बड़े सुपुत्र होने का सुनीलजी ने बखूबी फ़र्ज़ अदा करते हुए.. उसी दिन रात को किसी को भी भूखा...
by Rachna Siwach | Feb 8, 2019 | Uncategorized
बार-बार कुछ पलों के लिये नीला होना भरत का.. केवल सुनीता ने ही देखा था। इसके बावजूद भरत का पेट भी फूल रहा था। सुनीता के कमरे में लगातार अस्पताल की नर्स राउंड लगाया करती तो थीं.. पर उनको भरत को लेकर यह बात किसी ने भी न बताई थी। बच्चे का पेट भी फुला हुआ था। दोनों बच्चों...
by Rachna Siwach | Feb 6, 2019 | Uncategorized
बबलू सुनीता को लेने एक बार फ़िर इंदौर आ गया था। ससुराल वालों का फ़र्ज़ अब मायके में पूरा होने जा रहा था.. कमाल की बात तो यह थी.. कि किसी ने भी फूटे मुहँ यह न बोला था,” अरे! नहीं! नहीं!.. प्रहलाद की ज़िम्मेदारी कर तो दी उन्होनें, अब ऐसे बार-बार अच्छा नहीं लगता है। इस...