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मां शारदे

वींणा पांणि मातु आजु यहि वरदान दे,
तेरी दिव्य ज्योति सदा यूंहि जलती रहे |
ग्यान का प्रकाश नित नवल उछास,
मन मन्दिर के अंदर अबाध बहता रहे ||
ग्यान दे प्रकाश दे नवल विश्वास दे,
कि तम का विनाश हो न मन ये उदास हो |
भारत की भूमि फिर ध्यानवान कर दे,
ध्यानवान कर दे प्रकाशवान कर दे |
कि अहं के भान का तू निदान कर दे,
भारत की भूमि फिर से उद्यान कर दे ||
~कुमार गौरव