खानदान 48

खानदान 48

रमेश की घटिया बक़वास सुनने के बाद अब बिना ही कुछ बोले सुनीता घबराई हुई सी ऊपर आ गई थी। सुनीता ने ऊपर कमरे में आते वक्त दर्शनाजी के चेहरे पर खिली हुई मुस्कुराहट देखी थी..जैसे कि कोई मोर्चा फतह कर लिया हो.. उनकी आँखों में जीत की खुशी थी। रमेश ने इतनी बदतमीज़ी और घटिया...
कानू और रिश्तेदार

कानू और रिश्तेदार

पहले जब बच्चे छोटे हुआ करते थे… तो हम अक्सर ही मायके चक्कर लगा कर आ जाया करते थे.. हर गर्मियों की छुट्टियों में दो महीने से कम नहीं रहा करते थे.. माँ के घर। जैसे- जैसे बच्चे बड़े हुए, उनकी स्कूलों की पढ़ाई बढ़ गई.. और हमारा माँ के घर और बच्चों का नानी के घर जाना थोड़ा...
एक दूत स्वर्गलोक से

एक दूत स्वर्गलोक से

आ गया गाँव!.. बस! रोक दो काका बैलगाड़ी.. यहीँ तक आना था.. मुझे। चलो! अच्छा! हुआ.. जो आप की यह बैलगाड़ी मुझे मिल गई.. नहीं तो इतना लम्बा सफ़र पैदल ही तय करना पड़ता। वो सड़क बनाने की बात चल रही थी.. न क्या हुआ काका उसका.. “ बस! देखो! बिटिया अगले साल तक बन तो जानी...
खानदान 48

खानदान 47

सुनीता मायके में ही थी, और जुड़वाँ बच्चों की माँ बनने वाली थी.. यह खुशखबरी अब रमेश को सुनीता ने फ़ोन पर ही दे दी थी। एक बात यहाँ सुनीता की भी समझ नहीं आ रही थी.. ऐसा आदमी जिसे न तो बात करने की तमीज़ थी.. और न ही खड़े होने की अक्ल थी.. उसके साथ परिवार बढ़ाने का सोचा भी...
खानदान 48

खानदान 46

समय के चलते मुकेशजी के यहाँ नई खुशखबरी ने जन्म लिया था। अभिमन्यू और संस्कृति तो पहले से ही थे.. सुनीलजी को वक्त ने एक और सुपुत्र.. सिद्धांत के जन्म से सम्मनित किया था। अब सुनीलजी तीन बच्चों के पिता थे। इसी दौरान विनितजी का भी किसी काम से दिल्ली जाना हुआ था.. जाना तो...
खानदान 48

खानदान 45

दर्शनाजी सुबह-सुबह अपने प्रवचनों के साथ शुरू हो गईं थीं। जो कोई भी घटना घट जाया करती थी.. उसकी दिमाग़ में पूरी रिकॉर्डिंग कर घटित घटना को कर्म से लेकर उस पर सारे दिन अपनी बिना सिर-पैर की बक़वास जारी रखतीं थीं.. जब तक कि कोई नया मसला हत्थे नहीं चढ़ जाया करता था। इस...