by Rachna Siwach | Jan 12, 2019 | Uncategorized
अपने दूसरे नम्बर के देवर की बात सुनकर दर्शनाजी ने उसको पलट कर जवाब न देते हुए बस! दादी के अफ़सोस में रोना शुरू कर दिया था। कहना तो न चाहते हैं, पर हरियाणा प्रदेश की ख़ासकर गाँवो में इतनी बुरी संस्कृति है.. कि अगर कोई बहु पलट कर बोल जाय, तो उसका पीट-पीट कर बुरा हाल कर...
by Rachna Siwach | Jan 10, 2019 | Uncategorized
छुक-छुक करती आई रेल, उसमें बैठीं कानू बेन! बच्चों के इम्तेहान आने वाले हैं.. यहाँ भोपाल में पढ़ाई का आख़िरी महीना चल रहा है। आख़िरी महीने में ही इम्तेहान शुरू होने से पहले यहाँ के स्कूलों में बच्चों को पिकनिक वगरैह ले जाया जाता हैं। सो हमारी भी बिटिया स्कूल की तरफ से...
by Rachna Siwach | Jan 10, 2019 | Uncategorized
दादी नहीं रहीं.. यह ख़बर सुन रामलालजी के परिवार की रोज़ वाली रौनक में थोड़ी सी भी कमी न आई थी। चलो! कोई बात नहीं, नहीं होगा दादी से लगाव! होता है।” सौ बरस की होंन वाली होगी”। दर्शनाजी ने अपनी सासु-माँ के लिये कहा था। उनका कहना था, कि श्रीमती लौंगश्री लगभग सौ बरस की...
by Rachna Siwach | Jan 8, 2019 | Uncategorized
विनीत और रामलालजी का एक गुट बन गया था, और दर्शनाजी और रमेश का दूसरा गुट। रामलालजी का चाहे कोई भी गुट क्यों न हो .. पर फ़ैसले उनकी धर्म-पत्नी जी के ही होते थे। इधर रमेश फैक्ट्री से सम्बंधित कारोबार में शामिल था ही नहीं.. बस! ऊपर के ही थोड़े- बहुत काम की ज़िम्मेदारी...
by Rachna Siwach | Jan 8, 2019 | Uncategorized
सुबह के साढ़े-सात बजे का समय पर्दा रामलालजी के परिवार से उठता है.. “ कुछ बनया के नहीं! लेट हो जंगा मैं”। रामलालजी ने दर्शनाजी को आवाज़ लगाई थी। रामलालजी दर्शनाजी से फैक्ट्री जाने से पहले पूछ रहे थे.. कि कुछ चाय-नाश्ता तैयार हुआ कि नहीं.. काम के लिये देरी हो रही है।...
by Rachna Siwach | Jan 6, 2019 | Uncategorized
पता नहीं क्यों सुनीता और रमेश का तालमेल बैठ ही नहीं पा रहा था।अब तो दोनों के जीवन में प्रहलाद भी आ गया था.. फ़िर भी पति-पत्नी का रिश्ता न जाने क्यों मज़बूती ही नहीं पकड़ रहा था। सुनीता के विचार किसी और दिशा में थे, वहीं रमेश और ही किसी विचारों का इंसान था। दोनों का...