खानदान 32

खानदान 32

अपने दूसरे नम्बर के देवर की बात सुनकर दर्शनाजी ने उसको पलट कर जवाब न देते हुए बस! दादी के अफ़सोस में रोना शुरू कर दिया था। कहना तो न चाहते हैं, पर हरियाणा प्रदेश की ख़ासकर गाँवो में इतनी बुरी संस्कृति है.. कि अगर कोई बहु पलट कर बोल जाय, तो उसका पीट-पीट कर बुरा हाल कर...
कानू और रेल

कानू और रेल

छुक-छुक करती आई रेल, उसमें बैठीं कानू बेन! बच्चों के इम्तेहान आने वाले हैं.. यहाँ भोपाल में पढ़ाई का आख़िरी महीना चल रहा है। आख़िरी महीने में ही इम्तेहान शुरू होने से पहले यहाँ के स्कूलों में बच्चों को पिकनिक वगरैह ले जाया जाता हैं। सो हमारी भी बिटिया स्कूल की तरफ से...
खानदान 32

खानदान 31

दादी नहीं रहीं.. यह ख़बर सुन रामलालजी के परिवार की रोज़ वाली रौनक में थोड़ी सी भी कमी न आई थी। चलो! कोई बात नहीं, नहीं होगा दादी से लगाव! होता है।” सौ बरस की होंन वाली होगी”। दर्शनाजी ने अपनी सासु-माँ के लिये कहा था। उनका कहना था, कि श्रीमती लौंगश्री लगभग सौ बरस की...
खानदान 32

खानदान 30

विनीत और रामलालजी का एक गुट बन गया था, और दर्शनाजी और रमेश का दूसरा गुट। रामलालजी का चाहे कोई भी गुट क्यों न हो .. पर फ़ैसले उनकी धर्म-पत्नी जी के ही होते थे। इधर रमेश फैक्ट्री से सम्बंधित कारोबार में शामिल था ही नहीं.. बस! ऊपर के ही थोड़े- बहुत काम की ज़िम्मेदारी...
खानदान 32

खानदान 29

सुबह के साढ़े-सात बजे का समय पर्दा रामलालजी के परिवार से उठता है.. “ कुछ बनया के नहीं! लेट हो जंगा मैं”। रामलालजी ने दर्शनाजी को आवाज़ लगाई थी। रामलालजी दर्शनाजी से फैक्ट्री जाने से पहले पूछ रहे थे.. कि कुछ चाय-नाश्ता तैयार हुआ कि नहीं.. काम के लिये देरी हो रही है।...
खानदान 32

खानदान 28

पता नहीं क्यों सुनीता और रमेश का तालमेल बैठ ही नहीं पा रहा था।अब तो दोनों के जीवन में प्रहलाद भी आ गया था.. फ़िर भी पति-पत्नी का रिश्ता न जाने क्यों मज़बूती ही नहीं पकड़ रहा था। सुनीता के विचार किसी और दिशा में थे, वहीं रमेश और ही किसी विचारों का इंसान था। दोनों का...