कानू संग होली

कानू संग होली

होली है, हो रंग बरसे… भीगे कानू रानी रंग बरसे होली है…. अरे केने मारी पिचकारी कानू की भीगी अंगिया ओ रंग रसिया, रंग रसिया हो हर मौसम और उससे जुड़े तीज त्यौहार और खान-पान सबका एक अलग ही मज़ा होता है। साल के पूरे आठ महीने गर्मी चलती है.. उसके बाद जब शरद ऋतु का आगमन होता...

ढूढता हूँ

मेरे “दर्द” का इलाज ढूंढता हूं ,इस शहर में कोई खास ढूूंढता हूं,मेरे “दर्द” को बेहतर जाने मुझसे,किसी को अपने इतने पास ढूंढता...
खानदान 71

खानदान 71

रंजना नाम के काँटे को सुनीता के गृहस्थ में फंसे लगभग एक साल हो आया था।” ये लड़की पापा को आप के लिये सिखाती है.. और आप की जगह लेना चाहती है!”। प्रहलाद ने सुनीता से रमेश के लिये कहा था। प्रहलाद समझने लगा था.. कि रमेश रंजना पर पैसे लुटाने लगा है। बच्चों को भी अब रमेश के...
पंछी

पंछी

जी करता है नन्हीं चिड़िया बनकर तुमसे मिलने आऊँ माँ फ़िर किसी टहनी पर तुम संग नया नीड़ बनाऊँ माँ मानव बन कर देख लिया अब पंछी बन कर रहेंगें तुम संग तुम उड़ना दूर गगन में मइया तुम्हें देख उड़ना सीखेंगे फ़िर हम कितना अच्छा होगा यह जीवन अपना तुम चिड़िया हम नन्हें चूज़े...
खानदान 71

खानदान 70

सुनीता का थोड़े से दिनों के लिये बीच में दिल्ली जाना हुआ था.. सुनीता ने एक बार फ़िर अपनी माँ अनिताजी को रंजना के विषय में बता दिया था।” माँ!.. रमेश कहता है.. मेरा रिश्ता है.. रंजना के साथ!”। अनिताजी ने पूरी विस्तार से कहानी सुनी थी..  कहानी सुनने के बाद अनिताजी...

महागठबंधन, हास्य कविता

**महागठबंधन**      साइकिल चली है हाथी को घुमाने हाथ चला है हासुये को बढ़ाने मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने। झाड़ू का अता पता नही तीन फूल के आगे कोई टिका नही लालटेन आ रहा अंधेरा हटाने मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने। कंघी सम्हाल रहा तीर धनुष किसान...