by Rachna Siwach | Mar 12, 2019 | Uncategorized
सुनीता पुलिस स्टेशन में पुलिस डिपार्टमेंट के लोगों के साथ अपना केस डिसकस करने में लगी हुई थी.. प्रहलाद भी अपनी माँ के साथ आना चाहता था.. पर सुनीता ने बेटे को थाने लाना अपने साथ ठीक न समझा था। वैसे हमारे समाज में महिलाओं का पुलिस स्टेशन में यूँ बैठना अच्छा नहीं समझा...
by Rachna Siwach | Mar 11, 2019 | Uncategorized
नाटक तो खैर! रामलाल विला में छोटे और बडे सारे साल चलते ही रहते थे। इस परिवार में सब कुछ एक तरफ़ छोड़कर बस एक ही बात अच्छी थी.. कि यहाँ पर सभी साल में आने वाले त्यौहार एक अपने अलग ही अंदाज़ में मनाए जाते थे। अब ये तो न कहना चाहये कि त्यौहार आने से पहले नाच-गाने ही शुरू...
by Rachna Siwach | Mar 11, 2019 | Uncategorized
एक नन्हीं तितली जो रोज़ मेरे आँगन में आ जाती है कहीं वो तुम तो नहीं बहुत प्यार से मुझे देख फ़िर एक फूल से दूसरे पर उड़ जाती है कहीं वो तुम तो नहीं तितली को देखते ही तुम्हारी ममता का अहसास हो आता है माँ!! ऐसा लगता है तितली के रूप में कहीं तुम तो नहीं क्या कहती हो तुम...
by Rachna Siwach | Mar 10, 2019 | Uncategorized
हर त्यौहार के साथ ही मुझे अपना बचपन याद आ जाता है। और सारे साल भर के त्यौहार मेरी आँखों के आगे घूम जाते हैं.. कैसे मैं अपने माँ-बापू संग और अपने भाइयों संग ख़ुश होकर सारे त्यौहार मनाया करती थी। सभी त्यौहारों में होली का दिन ख़ास हुआ करता था। माँ! तुम्हें याद है.. जब...
by Rachna Siwach | Mar 9, 2019 | Uncategorized
करवाचौथ जैसे पवित्र त्यौहार को रमेश ने त्यौहार न रखकर नाटक में परिवर्तित कर दिया था। सुनीता का करवाचौथ को लेकर सारा जायका ही ख़राब हो गया था.. नतीजा यह हुआ था.. कि सुनीता ने करवाचौथ का व्रत रखना ही बन्द कर दिया था। हालाँकि सुनीता परिवार में थी.. और दर्शनाजी जैसी...
by Kumar Gaurav | Mar 8, 2019 | Uncategorized
प्रकृति, शक्ति, ममता, क्षमा दया, तपस्या, आराधना कितने कितने रूप हैं बहन, मित्र और मां ~कुमार...