by Rachna Siwach | Mar 6, 2019 | Uncategorized
रंजना के जाने के बाद सुनीता को रमेश को लेकर अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। रमेश के चेहरे पर सुनीता रंजना को लेकर एक निराली सी ख़ुशी और चमक देख रही थी। “ कौन थी… ये! मम्मी पापा के साथ!”। प्रहलाद और नेहा ने सुनीता से सवाल किया था।” अच्छी दीदी थी!”। ख़ुद ही सवाल का...
by Rachna Siwach | Mar 4, 2019 | Uncategorized
रमेश और सुनीता प्रहलाद के साथ स्कूल से लौट रहे थे.. अचानक ही रमेश गाड़ी में ज़ोर-ज़ोर से बोलना शुरू हो गया था,” उसका भाई बॉक्सर है..!!.. गोल्ड मैडलिस्ट है.. !! .. उसकी मौसी मिनिस्टर है.. इस जायदाद का एक और वारिस आ गया है.. !!.. देखना वो आएगी.. बैठेगी मेरे साथ गाड़ी...
by Rachna Siwach | Mar 4, 2019 | Uncategorized
कभी सपने में भी नहीं सोचा था.. ऐसा कुछ हो जाएगा.. तुम यूँ अचानक ही हमेशा के लिये छोड़कर हमें कहीं और चली जाओगी। वैसे देखा जाए.. माँ!.. तुम चुपके से ही छोड़कर चलीं गयीं। एक-साल से भी ऊपर हो आया है.. तुम्हारी झलक तक देखने को नहीं मिली है। हाँ!. आ जाती हो तुम भूले से...
by Rachna Siwach | Mar 2, 2019 | Uncategorized
हरियाणे से गाड़ी खरीदने के बाद रमेश हमेशा की तरह दिल्ली पहुँच गया था। मुकेशजी सफ़ारी गाड़ी को देखते ही हैरान और चिन्तित हो गये थे.. आख़िर financier थे.. गाड़ियों का बिज़नेस था.. मुकेशजी का। मुकेशजी गाड़ी को देखते ही समझ गये थे.. गाड़ी फाइनेंस की है.. चोरी की। उन्होंने...
by Rachna Siwach | Mar 2, 2019 | Uncategorized
“ ऐसी ही सफ़ारी हम रमेश को भी दिलवा देंगें”। दर्शनाजी ने सुनीता से कहा था। हालाँकि सुनीता को विनीत की नई सफ़ारी से कोई भी लेना-देना नहीं था.. लेकिन दर्शनाजी अपने परिवार के नाटकों के हिसाब से ही दिमाग़ लगाए जा रहीं थीं। गाड़ी कंपनी के नाम थी.. इसलिये रमेश को बहला दिया...
by Amit Pandey | Mar 2, 2019 | Uncategorized
वजूद खतरे में है पर सपने सजाए जा रहे हैं नदी तालाब बन गई है पर किनारे सजाए जा रहे हैं