खानदान 69

खानदान 69

रंजना के जाने के बाद सुनीता को रमेश को लेकर अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। रमेश के चेहरे पर सुनीता रंजना को लेकर एक निराली सी ख़ुशी और चमक देख रही थी। “ कौन थी… ये! मम्मी पापा के साथ!”। प्रहलाद और नेहा ने सुनीता से सवाल किया था।” अच्छी दीदी थी!”। ख़ुद ही सवाल का...
खानदान 69

खानदान 68

रमेश और सुनीता प्रहलाद के साथ स्कूल से लौट रहे थे.. अचानक ही रमेश गाड़ी में ज़ोर-ज़ोर से बोलना शुरू हो गया था,” उसका भाई बॉक्सर है..!!.. गोल्ड मैडलिस्ट है.. !! .. उसकी मौसी मिनिस्टर है.. इस जायदाद का एक और वारिस आ गया है.. !!.. देखना वो आएगी.. बैठेगी मेरे साथ गाड़ी...
तुम्हारी खुशबू .. तुम्हारा प्यार

तुम्हारी खुशबू .. तुम्हारा प्यार

कभी सपने में भी नहीं सोचा था.. ऐसा कुछ हो जाएगा.. तुम यूँ अचानक ही हमेशा के लिये छोड़कर हमें कहीं और चली जाओगी। वैसे देखा जाए.. माँ!.. तुम चुपके से ही छोड़कर चलीं गयीं। एक-साल से भी ऊपर हो आया है.. तुम्हारी झलक तक देखने को नहीं मिली है। हाँ!. आ जाती हो तुम भूले से...
खानदान 69

खानदान 67

हरियाणे से गाड़ी खरीदने के बाद रमेश हमेशा की तरह दिल्ली पहुँच गया था। मुकेशजी सफ़ारी गाड़ी को देखते ही हैरान और चिन्तित हो गये थे.. आख़िर financier थे.. गाड़ियों का बिज़नेस था.. मुकेशजी का। मुकेशजी गाड़ी को देखते ही समझ गये थे.. गाड़ी फाइनेंस की है.. चोरी की। उन्होंने...
खानदान 69

खानदान 66

“ ऐसी ही सफ़ारी हम रमेश को भी दिलवा देंगें”। दर्शनाजी ने सुनीता से कहा था। हालाँकि सुनीता को विनीत की नई सफ़ारी से कोई भी लेना-देना नहीं था.. लेकिन दर्शनाजी अपने परिवार के नाटकों के हिसाब से ही दिमाग़ लगाए जा रहीं थीं। गाड़ी कंपनी के नाम थी.. इसलिये रमेश को बहला दिया...

गोमती_नदी

वजूद खतरे में है पर सपने सजाए जा रहे हैं नदी तालाब बन गई है पर किनारे सजाए जा रहे हैं