खानदान 65

खानदान 65

घर में पुलिस आ जाए.. या फ़िर पुलिस का बाप!.. माँ-बेटों के ड्रामे बुलंदी पर थे। वैस देखा जाए.. तो कमाल ही था.. एक अनपढ़ गँवार औरत ने सारे घर को अपने पालतू कुत्ते के साथ मिलकर छोटी अँगुली पर नचा रखा था। प्रॉपर्टी न हो गई.. जैसे तमाशा ही हो गया हो.. फैक्ट्री क्या खड़ी कर...

कानू और नन्हें किराएदार

Image by OpenClipart-Vectors on Pixabay पेड़- पौधों का तो हमें बचपन से ही शौक था.. सिर्फ़ देखने का.. लगाने का नहीं। बड़े हुए, ब्याह के बाद ही भोपाल आ गए थे। संयुक्त परिवार होने के कारण हमें हमारे सास-ससुर ने ऊपर कमरा बनवा कर दे दिया.. साथ में एक बड़ी और खुली छत्त भी...
खानदान 65

खानदान 64

सुबह आराम से आठ बजे दोबारा चाय पीकर सो जाना.. दोपहर को फैक्ट्री के लिये तैयार होकर मातारानी के साथ मिलकर सारे घर की चुगली करना और सबको बेहिसाब गालियाँ देकर काम पर जाना रमेश का रोज़ का रूटीन बन गया था। रमेश की माँ अपने फ़ायदे के लिये रमेश का बुरी तरह से फ़ायदा उठाये चल...
सन्देश !!

सन्देश !!

आप के मन की बात !! कि अब हम जाग्रत हैं ….कि अब हम समर्थ हैं ….कि अब हम हरगिज़-हरगिज़ गुलाम नहीं बनेगे ….कि अब हम अपने भारत की संरचना अपने रंग-ढंग से करेंगे ….और अब हम मानेंगे नहीं …… हम ….अब …जंग लड़ेंगे …..!! आप मान...

विजय गीत

शौर्य के पथ पे आज हमारा हो रहा है गुणगान,हर एक हिन्दुस्तानी को है अपने वायुसेना पे अभिमानकि दुनिया में है बढ़ा दिया तुमनेभारत मां का सम्मान,ये राष्ट्र तुम्हे करता है कोटि कोटि...
खानदान 65

खानदान 62

घर में ज़मीन बेच-बेच कर अच्छे पैसे आ रहे थे.. रमेश का एन्जॉयमेंट भी अच्छा चल रहा था। अब ऐसे ज़मीन बेच कर आए हुए पैसों से घर तो सुनीता का बसना ही नहीं था.. और वैसे भी एक-एक रुपये की ख़बर दर्शनाजी के पास थी.. आख़िर सासू-माँ उस्तादों की उस्ताद थीं.. रमेश के पैसे उड़ाने...