सहायक  कानू

सहायक कानू

बचपन एक ऐसी चीज़ होता है.. जो इंसान कभी नहीं भुला पाता। बचपन की वो खट्टी-मीठी यादें.. यादों में हमेशा के लिये अमर होकर रह जातीं हैं। हमें भी हमारा अनमोल बचपन अक्सर याद आता है.. और फ़िर बहुत देर के लिये हम अपनी मीठी यादों में खो-कर रह जातें हैं। बचपन भी कभी-कभी ही हमसे...

वो कुमुद है न सूरज के खिल पायेगी

वो कुमुद है न सूरज के खिल पायेगी मैं तो चंदा हूं कैसे वो मिल पाएगी जब मैं हो कर जवा चांदनी से खिला वो तो मारे हया से सिकुड़ जाएगी मैं तो चंदा हूं कैसे वह मिल पाएगी वह कुमुद है न सूरज के खिल पायेगी मैं तो चंदा हूं कैसे वो मिल पाएगी जब...

योगेश्वर

दुनिया को प्रेम सिखाया कर्म को पूजा तुमने बताया प्रेम की भाषा जो न समझा तुमने उसको हथियार दिखाया लीला कर लीलाधर तुमने करुणा करना सिखलाया गीता में योगेश्वर तुमने निःस्वार्थ कर्म है...

“ऊपर वाला जब भी देगा देगा छप्पर फाड़ कर”

ऊपर वाला जब भी देगा देगा छप्पर फाड़ कर दुनिया में है तुमको भेजा देगा छप्पर फाड़ कर अच्छे काम सदा तुम करना बुरे काम से करना तौबा सच्चाई की ताकत रखना जीवनभर है उस पर चलना मानवता की सेवा करना मानवता के लिये लड़ना मानवता से बढ़कर कोई काम नहीं इस दुनिया में पथरीली राहों पर...
और तुम चलीं गईं

और तुम चलीं गईं

बहुत सी बातें करनी थीं, तुमसे और तुम चलीं गयीं, मन की मन में ही रह गई और तुम चलीं गयीं, मन होता है लेने आऊँ तुमको बिन बताये न जाने कहाँ पर तुम चलीं गयीं, न जाने क्या सोचा तुमनें कुछ भी न कहा, और तुम चलीं गईं क्या सोच रहीं थीं? कह तो देतीं! मुड़ कर एक बार देख तो लेतीं,...
खानदान 61

खानदान 61

घर मे वही माहौल था.. आधे दिन सास की चिक-चिक, सुनीता का दिमाग़ इसी तैयारी में लगा रहता था.. नीचे जाकर कौन सी बात का क्या जवाब देना है। बच्चों में शाम हो जाया करती थी.. शाम होते ही रमेश के माँ की सीख के हिसाब से नाटक शुरू हो जाया करते थे,” रमेश आज या फ़िर उस बिल्ली ने...