नया साल

साल बदला नजारे वहीं हैं वक्त बदला​ इरादे वहीं हैं बदला है मौसम पर मंजर वहीं है बदला है घाव पर खंजर वहीं है नया कुछ नहीं है यहां सब वही है हवा में घुला हलाहल वही है नए साल पर ये वादा करे हम पुराना नहीं नया कुछ करे हम इंसानियत को फिर से जिंदा करे हम इसी राह पर सदा ही...

तुम

मेरी कविता में तुम्हारा स्थान है, क्युकी मेरी दुनिया तुम्हारे बिन विरान है, ज़ुबा कुछ भी कहे लेकिन, ये दिल हमेशा से तुम पे मेहरबान...
खानदान 60

खानदान 60

सुनीता पिताजी की कोई भी मदद न होने के कारण बहुत ही दुखी हो गई थी। मायका मुसीबत में होने के कारण चाह कर भी कोई भी मदद नहीं कर पा रही थी, सुनीता अपने परिवार की। अंदर ही अंदर बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी.. सुनीता को। “ रमेश बता रिया था.. चौधरी.. दो लाख रुपये मांगें...

निम्न राजनीति

सात दिनों तक देश के एकजुटता का द्योतक सत्ता पक्ष विपक्ष का खत्म हुआ अब सूतक खत्म हुआ अब सूतक आरोप हैं रहे लगाये भला हांथ का साथ देश कहां कब तक पाये कह पंक्षी कविराय कहां तक दुश्मन पाये मात लाभ हानि के फेर में जब टिके न दिन भी सात || ~कुमार...