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महागठबंधन, हास्य कविता

**महागठबंधन**     

साइकिल चली है हाथी को घुमाने

हाथ चला है हासुये को बढ़ाने

मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने।

झाड़ू का अता पता नही

तीन फूल के आगे कोई टिका नही

लालटेन आ रहा अंधेरा हटाने

मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने।

कंघी सम्हाल रहा तीर धनुष

किसान घुमा रहे हर बैल

चापाकल पर लगे है चस्मा नहाने

मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने।

कार भी लगे है चाँद तारे देखने

उगते सूरज भी तैयार है हाथ मुट्ठियों में समाने

बाघ भी लगे है अब घड़ी देखने

मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने।

बुआ भतीजा गले मिलाये

राहुल लालू गीत सुनाये

प्रियंका लगी है कांग्रेस बचाने

मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने।

दीदी केजरीवाल सबको सुहाये

अजित सिंह ,चौटाला डुबकी लगाए

कन्हैय्या भी लगे देशद्रोही गिनाने

मोदी जी को हराने महा गठबंधन बनाने।

कमल ,स्टॅलिन साथ मे आये

राव, ओवैसी ईद मनाये

देवगौड़ा को है अब कांग्रेस सुहाने

मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने।

अब्दुल्ला, मुफ़्ती में रास है अब

पवार ओर उद्धव भी खास है अब

पटनायक भी लगे है अब शंख बजाने

मोदी जी को हराने महागठबंधन बनाने।

  $$ सुमन सौरभ $$         जोहार

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मन -हिंदी कविता


आप दुखी इसीलिये है क्यूंकि मन मे आपका निवास है, आप मन की सुन नही पा रहे ,उस ओर चल नही पा रहे,पर हमेसा मन की गलती हो जरूरी नही, शायद मन आपको समझता हो, आपकी मदद करता हो ,आपको अपनाता हो, मन के अच्छे कामो के लिये एक छोटी सी कविता मन के ऊपर, एक गिलहरी प्रयास मेरे द्वारा……..


🙏मन🙏

“मन जो चाहता है वो कर नही पा रहा है।
मन जो चाहता है वो समझा नही पा रहा है।
मन जो चाहता है वो बता नही पा रहा है।
मन जो चाहता है वो देख नही पा रहा है।
मन जो चाहता है वो सुन नही पा रहा है।
पर इसमें भी मन की गलती नही
गीत गुनगुनाने को बहुत है।
मन की आकांक्षा बहुत है।
उड़ानों की अभिलाषा बहुत है।
उलझनो में फसने की इच्छा बहुत है।
पर मन ना चाहते हुए भी
संयमित बहुत है।
मर्यादित बहुत है।
सुशोभित बहुत है।
संलग्न बहुत है।
मन को भी चिंता आपकी, इसिलये खुद को ना बनने देता वासुकि।
इसिलये वो खुद नही देखता सप्तरंगी सपने,क्यूंकि समझता है आपको अपने।
पर मन का कोई थाह नही,
मन उसका है जिसमे मन का वास नही। “

सुमन सौरभ ।।
जोहार।