by Rachna Siwach | Apr 9, 2019 | Uncategorized
अब तीन हिस्सेदार तैयार थे.. विनीत, रमेश और दर्शनाजी। दर्शनाजी हालाँकि माँ थीं, देखजाय तो उन्हें हिस्से की क्या ज़रूरत थी.. पर अब विनीत के सामने खड़े होकर कहने लगीं थीं,” विनीत! मेरा फैसला कर दे! मन्ने मेरा तीसरा दे! दे!”। दर्शनाजी अब विनीत के सामने खड़े होकर अपने...
by Rachna Siwach | Apr 8, 2019 | Uncategorized
रामलाल विला में अब सभी पैसों से संवंधित चीज़ों का ठेकेदार अब विनीत ही हो गया था.. कारण यह था, कि बाबूजी कोई भी बटवारा नहीं करके गए थे.. फैक्ट्री का सारा financial control अब विनीत के ही हाथ मे था। रमेश को तो फैक्ट्री के पैसों के बारे में थोड़ा बहुत बस, उड़ती सी ख़बर...
by Sanskriti Verma | Apr 8, 2019 | Uncategorized
After the storm, My heart smiled and laughed, When it watched the sky as the rainbow came. My soul danced and I asked why? It then replied- Can’t you see the magic of the Colors that are just perfectly aligned? Can’t you feel the magic of the Nature that constantly...
by Kumar Gaurav | Apr 6, 2019 | Uncategorized
सुगम है नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, यह वर्षारंभ है मन के मांगल्य का उत्सव पंक्षी भी हैं करते पेड़ों पर कलरव मंद सुगंधित हवा बह रही, वृक्षों पर नव पल्लव चमके, भ्रमर गुंजित मधुकर गुंजित | कोयल मंजरियों पर कुहके शक्ति उपासना मन में पुलकित || ~कुमार...
by Rachna Siwach | Apr 5, 2019 | Uncategorized
रामलालजी की शोक सभा समाप्त हो चुकी थी.. घर आए सभी मेहमान अपने-अपने घरों को चले गए थे। अब रामलालजी के घर में एक नए तरह के माहौल ने जन्म ले लिया था.. जिस माहौल में सुकून और ख़ुशी दोनों ही झलक रहीं थीं। रमेश को भो रंजना और उसकी माँ ने हिस्से के लिये सिखाना भड़काना शुरू...
by Rachna Siwach | Apr 5, 2019 | Uncategorized
जब भी तुम आती हो कुछ कहना चाहती हो मैं तुम्हें समझे बगैर ही ख़ुश हो जातीं हूँ कि तुम मिलने आ जाती हो पर तुम्हारी बातों में कितनी सच्चाई झलकती है.. माँ!! तुम्हारा यूँ आना और मुझसे चुपके से कुछ कहना सच हो जाता है फ़िर अचानक से गायब हो जाती हो एक बार फ़िर मुझे तुम याद...