खानदान 95

खानदान 95

अब तीन हिस्सेदार तैयार थे.. विनीत, रमेश और दर्शनाजी। दर्शनाजी हालाँकि माँ थीं, देखजाय तो उन्हें हिस्से की क्या ज़रूरत थी.. पर अब विनीत के सामने खड़े होकर कहने लगीं थीं,” विनीत! मेरा फैसला कर दे! मन्ने मेरा तीसरा दे! दे!”। दर्शनाजी अब विनीत के सामने खड़े होकर अपने...
खानदान 95

खानदान 94

रामलाल विला में अब सभी पैसों से संवंधित चीज़ों का ठेकेदार अब विनीत ही हो गया था.. कारण यह था, कि बाबूजी कोई भी बटवारा नहीं करके गए थे.. फैक्ट्री का सारा financial control अब विनीत के ही हाथ मे था। रमेश को तो फैक्ट्री के पैसों के बारे में थोड़ा बहुत बस, उड़ती सी ख़बर...

The Song of Love and Happiness

After the storm, My heart smiled and laughed, When it watched the sky as the rainbow came. My soul danced and I asked why? It then replied- Can’t you see the magic of the Colors that are just perfectly aligned? Can’t you feel the magic of the Nature that constantly...

हिन्दू नववर्ष

सुगम है नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, यह वर्षारंभ है मन के मांगल्य का उत्सव पंक्षी भी हैं करते पेड़ों पर कलरव मंद सुगंधित हवा बह रही, वृक्षों पर नव पल्लव चमके, भ्रमर गुंजित मधुकर गुंजित | कोयल मंजरियों पर कुहके शक्ति उपासना मन में पुलकित || ~कुमार...
खानदान 95

खानदान 93

रामलालजी की शोक सभा समाप्त हो चुकी थी.. घर आए सभी मेहमान अपने-अपने घरों को चले गए थे। अब रामलालजी के घर में एक नए तरह के माहौल ने जन्म ले लिया था.. जिस माहौल में सुकून और ख़ुशी दोनों ही झलक रहीं थीं। रमेश को भो रंजना और उसकी माँ ने हिस्से के लिये सिखाना भड़काना शुरू...
जब भी तुम आती हो

जब भी तुम आती हो

जब भी तुम आती हो कुछ कहना चाहती हो मैं तुम्हें समझे बगैर ही ख़ुश हो जातीं हूँ कि तुम मिलने आ जाती हो पर तुम्हारी बातों में कितनी सच्चाई झलकती है.. माँ!! तुम्हारा यूँ आना और मुझसे चुपके से कुछ कहना सच हो जाता है फ़िर अचानक से गायब हो जाती हो एक बार फ़िर मुझे तुम याद...