by Rachna Siwach | Dec 11, 2018 | Uncategorized
एक दिन सुनीता के मुहँ से यूँहीं निकल पड़ा था,जब सुनीता और रमेश एकसाथ कमरे में अकेले बैठे थे,”ये अम्मा की प्रॉपर्टी!!” और रमेश का इसी बात पर कहना हुआ था,” हाँ! इसके कोई भाई थोड़े ही है,तीन बहनें ही तो हैं.. ये गाँव में। इसका जो भी खेत का पैसा होगा वो...
by Rachna Siwach | Dec 9, 2018 | Uncategorized
अब सुनीता और रमेश के ब्याह को करीबन एक महीना होने को आया था। इतने करोड़पति होने के बावजूद रमेश सुनीता को कहीं अच्छी जगह घूमाने ही नहीं ले गया था,एक आध बार सुनीता ने धीमे से स्वर में रमेश से कहा भी था”हनीमून भी तो होता है”। इस पर रमेश ने पलट कर तुरंत ही...
by Rachna Siwach | Dec 9, 2018 | Uncategorized
सुनीता अपना मन बनाकर रमेश के और उसके परिवार के साथ पूरी तरह से एडजस्ट कर घर बसाने की कोशिश में लगी हुई थी। पारिवारिक नाटक साथ ही साथ चल रहे थे, जिसमें अहम भूमिका निभा रहीं थीं..दर्शनाजी। रमेश को रोज़ शाम को फैक्ट्री से आने के बाद सुनीता ने आज क्या-क्या किया की सारी ख़बर...
by Rachna Siwach | Dec 9, 2018 | Uncategorized
भोपाल हरा-भरा मस्त शहर है। बरसातों का मौसम यहाँ बेहद रँगीन हो जाता है। चारों तरफ़ मस्त फुहार और हरियाली छाई होती है। क़ानू-मानू को बारिशों का मौसम बेहद पसन्द आता है। बारिश में खेलना क़ानू का मन पसन्द काम था। हम तो क़ानू को बारिश में जाने से रोकते ही रह जाते थे,कि क़ानू...
by Rachna Siwach | Dec 6, 2018 | Uncategorized
सुनीता रमेश और रमेश के परिवार के साथ पूरी तरह से एडजस्टमेंट करने की कोशिश कर रही थी। एक दो बार रमेश सुनीता को बाहर घुमाने भी ले गया था,लेकिन ज़्यादा दूर तक नहीं बस यूहीं आसपास तक ही,उसी गाड़ी में जो मुकेश जी ने दहेज में दी थी। एक बात खटकने वाली फ़िर से थी,और यह कि रमेश...