खानदान 9

खानदान 9

एक दिन सुनीता के मुहँ से यूँहीं निकल पड़ा था,जब सुनीता और रमेश एकसाथ कमरे में अकेले बैठे थे,”ये अम्मा की प्रॉपर्टी!!” और रमेश का इसी बात पर कहना हुआ था,” हाँ! इसके कोई भाई थोड़े ही है,तीन बहनें ही तो हैं.. ये गाँव में। इसका जो भी खेत का पैसा होगा वो...
खानदान 9

खानदान 8

अब सुनीता और रमेश के ब्याह को करीबन एक महीना होने को आया था। इतने करोड़पति होने के बावजूद रमेश सुनीता को कहीं अच्छी जगह घूमाने ही नहीं ले गया था,एक आध बार सुनीता ने धीमे से स्वर में रमेश से कहा भी था”हनीमून भी तो होता है”। इस पर रमेश ने पलट कर तुरंत ही...
खानदान 9

खानदान 7

सुनीता अपना मन बनाकर रमेश के और उसके परिवार के साथ पूरी तरह से एडजस्ट कर घर बसाने की कोशिश में लगी हुई थी। पारिवारिक नाटक साथ ही साथ चल रहे थे, जिसमें अहम भूमिका निभा रहीं थीं..दर्शनाजी। रमेश को रोज़ शाम को फैक्ट्री से आने के बाद सुनीता ने आज क्या-क्या किया की सारी ख़बर...
क़ानू!!!

क़ानू!!!

भोपाल हरा-भरा मस्त शहर है। बरसातों का मौसम यहाँ बेहद रँगीन हो जाता है। चारों तरफ़ मस्त फुहार और हरियाली छाई होती है। क़ानू-मानू को बारिशों का मौसम बेहद पसन्द आता है। बारिश में खेलना क़ानू का मन पसन्द काम था। हम तो क़ानू को बारिश में जाने से रोकते ही रह जाते थे,कि क़ानू...
खानदान 9

खानदान 6

सुनीता रमेश और रमेश के परिवार के साथ पूरी तरह से एडजस्टमेंट करने की कोशिश कर रही थी। एक दो बार रमेश सुनीता को बाहर घुमाने भी ले गया था,लेकिन ज़्यादा दूर तक नहीं बस यूहीं आसपास तक ही,उसी गाड़ी में जो मुकेश जी ने दहेज में दी थी। एक बात खटकने वाली फ़िर से थी,और यह कि रमेश...