खानदान 14

खानदान 14

वक्त थोड़ा सा और बीता था, समय ने अंगड़ाई ले ली थी। घर वालों के रोज़ के नाटक, दर्शनाजी की बक़वास और विनीत ने पूरी तरह से सुनीता को कंफ्यूज कर के रख दिया था। उधर मायके से सुनीता की माँ, जो कि एक पूजा-पाठ वाली महिला थीं… ने सुनीता को ऑर्डर सा दे रखा था, उनका सुनीता से...
Kaanu  weds  Jerry

Kaanu weds Jerry

शरद ऋतु का आगमन हो चुका है, और अब तो पहले से थोड़ी सी सर्दी भी बढ़ गई है। सर्दी के मौसम में अक्सर हम सब अन्दर कमरे में न बैठ कर बाहर ही अपनी छत्त पर धूप का आनंद लेते रहते हैं। बच्चे भी वहीं अपनी पढ़ाई- लिखाई करते रहते हैं… और हम भी धूप में ही अपनी सब्ज़ियों को काटने...
खानदान 14

खानदान 12

ऐसा कोई भी दिन नहीं जाता था,जब घर में नाटक न हो,सुनीता के मन में तो सुबह होते ही दर्शनाजी का भय बैठ जाया करता था। रमा के मुताबिक”अरे!यह तो कुछ भी नहीं है,पहले जब में नई-नई आयी थी, तब देखना था इसका रूप..जब भी मैं कभी दोपहर के वक्त सो जाया करती थी,तो दरवाज़े पर ज़ोर...
खानदान 14

खानदान 11

ब्याह से पहले सुनीता के पिताजी ने जो कुण्डली बनवाई थी,सुनीता को अच्छी तरह से याद है..उसमें साफ-साफ लिखा था,कि होने वाले जीवन साथी के कोई आदर्श असूल नहीं होंगें। सुनीता ने मन में ही कहा था,”हाँ!यह लाइन तो बिल्कुल रमेश से मैच खाती है,वाकई कोई आदर्श असूल तो लगते ही...
खानदान 14

खानदान 10

हाँ! दर्शनाजी को अपने पालतू कुत्तों से बेहद लगाव था। सुनीता के घर में तो कभी कुत्ते पाले न थे,इसलिए वो तो अक्सर दूर ही रहा करती थी कुत्तों से। ब्याह के बाद सुनीता ने रमेश के घर में ही कुत्ते देखे थे, उसे अब रामलाल जी की कही हुई बात भी याद आ रही थी,”हमारे यहाँ तो...