by Rachna Siwach | Dec 22, 2018 | Uncategorized
अब रमेश वो सौ रुपये वाली बात सुनीता के कानों में डाल दोनों बहन-भाई के साथ घर पहुँच गया था। घर पहुँचने के बाद ऊपर वाले कमरे में जाकर… ऊपर वाला कमरा यानी के मुकेशजी का दिल्ली में फ्लैट हुआ करता था, अब दिल्ली जैसी जगह पर कोठी खरीदनी कोई आसान थोड़ी ही है। उस टाइम का...
by Rachna Siwach | Dec 20, 2018 | Uncategorized
सुनीता अब पिताजी के साथ मायके आ गई थी। मुकेशजी के दिमाग़ से विनीत का किया हुआ इंदौर में बर्ताव निकल नहीं रहा था। यह बात उन्होंने अनिताजी से भी बाँटी थी, अनिताजी का जवाब था,” अब जैसे चल रहा है, चलने दो, देख लेंगें”। अब सुनीता अपने मायके में आराम से दिन बिताने लगी थी…...
by Rachna Siwach | Dec 20, 2018 | Uncategorized
शुरू के महीने में ही पारिवारिक नाटक ज़ोर और रंग पकड़ गया था। दर्शनाजी के कई तरह के रंग सामने आ रहे थे… एक बार सुनीता का यूहीं फ्रूटी पीने का मन हुआ था… खाते-पीते घर की लड़की थी, अभी ससुराल की भूखी नंगी मानसिकता जिसकी नींव उसकी खुद की सास ने ही रखी थी… वाकिफ़ न थी। सो,...
by Rachna Siwach | Dec 20, 2018 | Uncategorized
रौशन तुम्हीं से दुनिया रौनक हो तुम जहाँ की फूलों में पलने वाली रानी हो गुलिस्ताँ की प्यारी कानू वाकई में तुम हमें जान से भी ज़्यादा प्यारी हो गयी हो। सुबह होते ही जब हमें हमारा सफेद गुलाब का फूल नज़र आता है… तो हमारा मन खुशी और प्यार से भर जाता है। तुम्हारे वो मुलायम...
by Rachna Siwach | Dec 19, 2018 | Uncategorized
सुनीता अभी कुल बाईस साल की ही तो थी, जब उसे अपने माँ बनने की खबर का अहसास हुआ था। सुनीता को यह अहसास अपने मायके दिल्ली में रहते हुए हुआ था। ख़बर पक्की होते ही उसने रमेश को यह बात फ़ोन पर ही बता दी थी। कुछ दिन दिल्ली में रहने के बाद सुनीता अपनी ससुराल वापिस इंदौर आ गयी...