खानदान 17

खानदान 17

अब रमेश वो सौ रुपये वाली बात सुनीता के कानों में डाल दोनों बहन-भाई के साथ घर पहुँच गया था। घर पहुँचने के बाद ऊपर वाले कमरे में जाकर… ऊपर वाला कमरा यानी के मुकेशजी का दिल्ली में फ्लैट हुआ करता था, अब दिल्ली जैसी जगह पर कोठी खरीदनी कोई आसान थोड़ी ही है। उस टाइम का...
खानदान 17

खानदान 16

सुनीता अब पिताजी के साथ मायके आ गई थी। मुकेशजी के दिमाग़ से विनीत का किया हुआ इंदौर में बर्ताव निकल नहीं रहा था। यह बात उन्होंने अनिताजी से भी बाँटी थी, अनिताजी का जवाब था,” अब जैसे चल रहा है, चलने दो, देख लेंगें”। अब सुनीता अपने मायके में आराम से दिन बिताने लगी थी…...
खानदान 17

खानदान 13

शुरू के महीने में ही पारिवारिक नाटक ज़ोर और रंग पकड़ गया था। दर्शनाजी के कई तरह के रंग सामने आ रहे थे… एक बार सुनीता का यूहीं फ्रूटी पीने का मन हुआ था… खाते-पीते घर की लड़की थी, अभी ससुराल की भूखी नंगी मानसिकता जिसकी नींव उसकी खुद की सास ने ही रखी थी… वाकिफ़ न थी। सो,...
प्यारी क़ानू

प्यारी क़ानू

रौशन तुम्हीं से दुनिया रौनक हो तुम जहाँ की फूलों में पलने वाली रानी हो गुलिस्ताँ की प्यारी कानू वाकई में तुम हमें जान से भी ज़्यादा प्यारी हो गयी हो। सुबह होते ही जब हमें हमारा सफेद गुलाब का फूल नज़र आता है… तो हमारा मन खुशी और प्यार से भर जाता है। तुम्हारे वो मुलायम...
खानदान 17

खानदान 15

सुनीता अभी कुल बाईस साल की ही तो थी, जब उसे अपने माँ बनने की खबर का अहसास हुआ था। सुनीता को यह अहसास अपने मायके दिल्ली में रहते हुए हुआ था। ख़बर पक्की होते ही उसने रमेश को यह बात फ़ोन पर ही बता दी थी। कुछ दिन दिल्ली में रहने के बाद सुनीता अपनी ससुराल वापिस इंदौर आ गयी...