by Rachna Siwach | Dec 26, 2018 | Uncategorized
Jingle bells, jingle bells Jingle all the way, Santa claus is coming along, Riding on a sleigh, Jingle bells, jingle bells, Jingle all the way, Kaanu-maanu is coming along, Riding on a sleigh. पिछले साल हमारे यहाँ इन्हीं दिनों हमारे पड़ोसी जैकब साहब के यहाँ से ड्राई...
by Rachna Siwach | Dec 26, 2018 | Uncategorized
गर्भवती सुनीता इंदौर में अपना समय रमेश के साथ चुप-चाप बिताने लगी थी,अभी सुनीता के लिये सारे परिवार को समझना थोड़ा मुश्किल हो रहा था.. इस बार सुनीता को सारे परिवार के सदस्य अच्छे लगने लगे थे, बस! दर्शनाजी को छोड़कर। दर्शनाजी ने तो एक अजीब सा आतंक फैला रखा था, सारे घर...
by Rachna Siwach | Dec 23, 2018 | Uncategorized
कहाँ रह गईं हो तुम माँ! आ जाओ वापिस अब तुम्हें हम सब को छोड़ कर गए हुए एक साल होने को आया है। बहुत याद आती है, तुम्हारी। मान लिया माँ कि तुम्हारा वहाँ उन लोगों में मन लग गया है, जहाँ तुम हम सब को छोड़ कर चली गई हो.. पर क्या वह लोग जो तुम्हें लेने आए थे, वह इतने...
by Rachna Siwach | Dec 23, 2018 | Uncategorized
“ तुनो कानू, बन्दर तुकन्दर मानू… आप कहाँ दाना ताती ओ”। यह भाषा हमारी प्यार की भाषा हुआ करती है, जब भी हम अपनी प्यारी और सबसे न्यारी कानू को संबोधित करते हैं। यहाँ हमारा कहने का मतलब है… सुनो कानू, बन्दर चुकन्दर मानू.. आप कहाँ जाना चाहती हो। सारा दिन शौतानी में बिताना...
by Rachna Siwach | Dec 22, 2018 | Uncategorized
हरियाणे से लौट कर सुनीता रमेश के साथ अब वापस दिल्ली आ गई थी। रमेश हरियाणे सुनीता को घूमाकर आज थोड़ा खुश नज़र आ रहा था, उसने सुनीता की तारीफ़ में अनिताजी से कहा भी था,” मम्मीजी आज तो सुनीता बहुत ही अच्छी लग रही थी, एकदम टीचर जैसी”। रमेश के मुहँ से तारीफ़ के शब्द...