by Rachna Siwach | Mar 23, 2019 | Uncategorized
अब संयुक्त बिज़नेस परिवार था, और पैसों का चक्कर होने के कारण रमेश को तो अपने पैर को लेकर अपने पिता के आगे खड़े होना ही था। रमेश की बात को नकारते हुए.. रामलालजी ने उसी कंपाउंडर को बुलवा भेजा था.. जिससे वो अपने इंजेक्शन लगवाया करते थे। कंपाउंडर ने रामलालजी को आश्वासन...
by Rachna Siwach | Mar 22, 2019 | Uncategorized
रमेश का पैर तेज़ी से लाल होता जा रहा था, और सूजता जा रहा था.. ऐसा लग रहा था.. मानो पैर ही फट जाएगा। सुनीता रमेश के नज़दीक बैठकर लगातार ही सूजते हुए पैर को देखे जा रही थी.. पैर को तेज़ी से सूजता देख, सुनीता ने रमेश को मलहम घिसने से मना किया, और कहा था,” मुझे तो कोई और...
by Rachna Siwach | Mar 22, 2019 | Uncategorized
आज न छोड़ेंगे बस हमजोली खेलेंगे हम होली चाहे भीगे कानू की चुनरिया चाहे भीगे रे कानू खेलेंगे हम होली होली है!“ बिना नाश्ता खाये होली खेलने नहीं जाना! आज हमनें सबके लिये गर्म-गर्म पकौड़े बनाए हैं!”। “ अरे! वाह! फ़िर तो आज कानू के भी मज़े आ गए, कानू भी हमारे संग पकौड़े...
by Kumar Gaurav | Mar 21, 2019 | Uncategorized
मन में उमंग और तन में तरंग है, देह पर नेह और हर्ष संग संग है | होली पर रोली और बोली का ही रंग है, बाजत है बाजने ढोल और मृदंग है || ~कुमार...
by Rachna Siwach | Mar 20, 2019 | Uncategorized
रामलालजी पूरी तरह से बिस्तर में आ गए थे.. बस! इंजेक्शनों पर ही चल रहे थे। ऐसे परिवार में जहाँ पैसों को ही महत्व दिया जाता हो.. रामलालजी अपनी हिम्मत पर ही सांसें ले रहे थे.. ऊपर से उनकी जीवन साथी के तो कहने ही क्या थे। खैर! चल ही रही थी.. दादू की ज़िन्दगी दवाइयों...
by Rachna Siwach | Mar 20, 2019 | Uncategorized
आज बहुत दिनों बाद तुम्हारा फोटो देखा.. वही तुम्हारा और पिताजी के संग की फोटो.. यह फ़ोटो तुम्हारी मेरे पास नहीं थी, माँ! वो तो अचानक ही मैने सिद्गार्थ का एकाउंट देख लिया.. तो तुम और पिताजी मुझे उस फ़ोटो में नज़र आ गए.. थे। सच! माँ! तुम्हें और पिताजी को संग देखकर तस्वीर...