by Rachna Siwach | Apr 20, 2019 | Uncategorized
रमेश की कही हुई रंजना को लेकर बातें आगे विनीत, रमा और दर्शनाजी तक पहुँच रहीं थीं। इन लोगों को भी रमेश के ऐश आराम से बहुत दिक्कत आ रही थी। सुनीता को भी रमेश का रंजना के साथ यूँ घूमना-फिरना पसन्द नहीं आ रहा था.. जो कि उसे शुरू से ही नहीं आता था। अब तो सुनीता ने पूरे घर...
by Rachna Siwach | Apr 20, 2019 | Uncategorized
गाड़ी का क़िस्सा अभी यहीँ ख़त्म नहीं हुआ था.. अब इस गाड़ी के किस्से को घर में मुद्दा बना लिया गया था। “ मन्ने तो लागे से झूठ बोले से यो! बक़वास करे है! किते न दिये होंगें इसने साढ़े-चार लाख!”। दर्शनाजी और रमेश में अब थाने में दिये हुए, पैसों को लेकर मीटिंग शुरू हो गई...
by Rachna Siwach | Apr 18, 2019 | Uncategorized
“ तेरे बाप ने कमाए थे, क्या…???” रमेश को विनीत साढ़े-चार लाख सफ़ारी के देकर घर लेकर आ गया था, अब क्योंकि रमेश के लिये पैसे फैक्ट्री से निकले थे.. तो घर में तो हंगामा होना ही था। रामलालजी तो दुनिया में अब रहे नहीं थे, बटवारा कोई भी वो करके नहीं गए थे.. इसलिये...
by Kumar Gaurav | Apr 17, 2019 | Uncategorized
बेहद आकुल व्याकुल बैठे उन, बेबस शान्त नितान्त अनेक मन | मन ही मन विस्मित हो हो कर , वह रह जाते मन मसोसकर || हे ! इन्द्रदेव हे ! वरुणदयामय, करो दया इन आर्त जनों पर | असमय बारिस और हवा से, दुस्प्रभाव पड़ता फसलों पर || ~ कुमार...
by Rachna Siwach | Apr 17, 2019 | Uncategorized
सुनीता और दर्शनाजी विनीत की दस-लाख वाली बात सुनकर अभी वहीं खड़े थे। “ अगर आपको मेरे गहनों की ज़रूरत पड़े तो मुझे बता देना!”। सुनीता ने दर्शनाजी से कहा था। “ एक बार विनीत ने घरां आ लेन दे! दखां! के बात बनी से!”। इंतेज़ार ख़त्म हो जाता है.. और विनीत घर आ जाता है। “ घणी...
by Rachna Siwach | Apr 17, 2019 | Uncategorized
“ रमेश ने अंदर बिठा लिया से!”। दर्शनाजी सुनीता के पास ऊपर भागी-भागी आयीं थीं, उनके साथ विनीत भी था। रमेश को थाने में बैठा लेंगे ऐसा सुनीता ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, इसलिये दर्शनाजी की बातें सुन और विनीत को दर्शनाजी के संग देख सुनीता घबरा गई थी। “ उनको निकालने...