by Rachna Siwach | Apr 30, 2019 | Uncategorized
कुछ तुमसे कहूँ कुछ तुम सुनोगी अब क्या कहूँ मैं तुम क्या सुनोगी बचपन निकल गया उड़ते-उड़ते जवानी तुम संग खेले खाए फ़िर वो निकल गई उड़ते-उड़ते ब्याह दिया माँ परदेस में मुझको तुम्हारा साथ छूट गया चलते-चलते गिने दिनों में छोड़ गईं तुम तुमसे माँ का रिश्ता ख़त्म हो गया...
by Rachna Siwach | Apr 30, 2019 | Uncategorized
तुमसे मिलके ऐसा लगा तुमसे मिलके अरमां हुए पूरे दिल के सचमुच बहुत ही प्यारा सा गीत है.. और जिस फ़िल्म का यह गीत है, यानी के परिंदा.. अपने ज़माने की मशहूर फ़िल्म हुआ करती थी। यह फ़िल्म हम भी अपने पतिदेव के साथ सिनेमा हॉल में देखने गए थे.. और हमें भी बेहद पसन्द आई थी। पर...
by Rachna Siwach | Apr 27, 2019 | Uncategorized
“ जी पिताजी! आप भी अपना ध्यान रखना!” “ मैं आपके लिये ईश्वर से प्रार्थना करूँगी!”। बस! इतनी सी बात करने पर ही मेरी आँखें आँसुओं से भर गईं थीं.. और पिताजी के आगे मै अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाई थी। हालाँकि भाईसाहब के साथ पिताजी से मिलने जाते वक्त मैं अपने आप को समझाकर...
by Sanskriti Verma | Apr 25, 2019 | Uncategorized
MY TWO OLDEST FRIENDS Sorrow and Pain, My two oldest friends, Please leave me alone tonight, For now I have tasted love, And happiness. Tonight I will sing and dance, And I won’t let my tears dry out, All alone staring at the stars, Pretending to be a lone wolf....
by Rachna Siwach | Apr 23, 2019 | Uncategorized
रमेश ने अपनी पैसों की ज़रूरत को पूरा करने के लिये.. दहेज में दी हुई, मुकेशजी की गाड़ी का सौदा कर दिया था.. गाड़ी बेचने से रमेश के पास अच्छे-ख़ासे पैसे आ गए थे। सीधी भोली सुनीता एक बार फ़िर से बेवकूफ़ बन गई थी। गाड़ी बेचने के लिये.. रमेश ने सुनीता से ही गाड़ी के...
by Rachna Siwach | Apr 23, 2019 | Uncategorized
रामलाल विला में हर सदस्य का दिमाग़ अभी हिस्से को लेकर ही काम कर रहा था.. और घर का हरएक सदस्य जिसमें दर्शनाजी भी शामिल थीं.. रमेश को नियंत्रित करने के चक्कर में और कहीं अच्छी तरह से फ़साने के चककर में घूम रहा था.. ताकि एक हिस्सेदार हमेशा के लिये ख़त्म हो जाए.. और...