खानदान 110

खानदान 110

अभी थोड़ी सी देर के लिए मामला शांत हो गया था.. और लोग समझ गए थे, कि सुनीता अपनी ग़लती बिल्कुल भी नहीं मानेगी। हाँ! बहस के दौरान सुनीता ने सबके सामने यह ज़रूर कहा था,” वो क्यों बैठ कर घूमेगी हमारे दादू की गाड़ी में!”। सुनीता को रंजना का रमेश के संग गाड़ी...
खानदान 110

खानदान 109

” गड्डी के पहिये में जमा चाकू मार राखे थे.. पहिए चाकू ते पंक्चर कर राखे सैं!”। रमेश भी अब हो रही पंचायत में शामिल हो चुका था.. रमेश का साफ़-साफ़ शब्दों में यही कहना था, कि गाड़ी के पहियों को चाकू मार-मार कर ही पंक्चर किया गया था.. पंक्चर ठीक करने वाले शख्स...
मेट्रो यात्रा

मेट्रो यात्रा

इंसान अपना बचपन माँ- बाप के राज़ में की गई मस्ती और अपनी जवानी के कुछ मस्ती भरे पल कभी नहीं भूलता। उम्र का पहिया आगे दौड़ता ही चला जाता है… और कुछ मीठी यादें हमारे साथ सदा ही रहतीं हैं। बस! कुछ ऐसा ही हुआ था.. बहुत दिनों के पश्चात दिल्ली शहर जाना हो गया था। अब जब बचपन...
भोली-भाली

भोली-भाली

भोली सी तुम प्यारी सी तुम कितनी सच्ची न्यारी सी तुम रूप में सुंदर सलोनी प्यारी माँ तुम सबसे न्यारी-प्यारी फ़िर से बच्ची कर दे माँ तू तू भी फ़िर से प्यारी हो जा आजा माँ लौट कर फ़िर से मन होता है वापस जाकर तेरे भोले चेहरे के संग बैठूँ सच! भोली थीं तुम प्यारी थीं तुम पर...
खानदान 110

खानदान 108

” यो के कर राख्या से! जमा ये दो टायर पंक्चर हो रे सें.. किसकी हरकत से यो!”। रमेश शाम के वक्त एकबार फ़िर रंजना से मिलने के लिये सज-धज कर तैयार होकर निकला था.. गाड़ी को देखते ही जनाब आग बबूला हो उठे थे.. और होते भी क्यों नहीं.. एक तो मैडम राह देख रहीं थीं,...
खानदान 110

खानदान 107

रमेश काफ़ी देर से घर आने लगा था.. सुनीता को डर के मारे बुरी तरह से चिन्ता हो जाया करती थी.. परिवार में और कोई भी साथ देने वाला नहीं था.. सभी मज़े लेने वाले दर्शक थे। इसी तरह के तमाशों के चलते एक बार रमेश पूरे दो दिन  बाद घर में दाख़िल हुआ.. सुनीता का ग़ुस्सा काबू...