by Rachna Siwach | May 11, 2019 | Uncategorized
पुराने डब्बे बोतल पेपर, पुराना सामान दे दो..!! कबाड़ी..!! कबाड़ी वाला..!! ” आ, जाओ! माँ! कबाड़ी वाला आ गया है! हमनें रोका हुआ है!”। ” आते हैं! थोड़ा ठहरो! पुरानी तुम्हारी स्कूल की किताबें समेट रहें हैं!”। गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी...
by Rachna Siwach | May 11, 2019 | Uncategorized
रमेश पूरी तरह से हरियाणे जाने को तैयार हो गया था.. दिवाली के बाद सर्दियों में जाना तय हुआ था। दीवाली का त्यौहार हमेशा की तरह से ही रामलाल विला में धूम-धाम से मनाया जा रहा था.. कि अचानक ही दिवाली से अगले दिन ही.. रमेश के फ़ोन पर घंटी बजी थी.. ” वा कोनी...
by Rachna Siwach | May 11, 2019 | Uncategorized
” थाणे में चला गया.. और उसनें हरिजन एक्ट लगा दिया.. तो तेरे लेने के देने पड़ जांगे.. मैं बतान लाग रया!”। ” कर ले! जो करना हो!”। अब रमेश को बटवारे की इस कदर जल्दी लग रही थी.. जैसे कि कोई ट्रैन निकली जा रही हो.. पर दर्शनाजी और विनीत भी बेहद...
by Rachna Siwach | May 4, 2019 | Uncategorized
पूरा हंगामा चीखना-चिल्लाना अब सब हो चुका था.. सारी दुनिया को ख़बर भी लग गई थी.. कि भई! हाँ! एक और दहेज का मोटा कड़ा निकल गया है। इस बार भी रमेश का कुछ नहीं बिगाड़ पाई थी.. सुनीता! मोटा माल बेचकर रमेश की कई दिन की ज़रूरतें भी हो गईं थीं.. पर कमाल की बात तो यह थी.. की...
by Rachna Siwach | May 3, 2019 | Uncategorized
” मुझे तलाक चाहिये! अभी और इसी वक्त!”। रमेश ने इस कदर नाटक रचा.. कि सुनीता का दिमाग़ गर्म होता ही चला गया था.. और गर्म दिमाग़ पर काबू न पाते हुए, सुनीता बौखला कर चिल्ला उठी थी.. और चिल्लाते हुए.. तलाक की माँग कर बैठी थी। रमेश और सुनीता के बीच हो रहे झगड़े...
by Rachna Siwach | May 3, 2019 | Uncategorized
पंख फड़फड़ाते थे चिड़िया के उड़ना चाहती नन्ही चिड़िया माँ तू क्यों रोके है मुझको आसमान में उड़ना मैं चाहती छू लूं मैं नभ के उस शिखर को जो कभी थी तू छूना चाहती डर के कैद रही पिंजरे में नहीं तो तू भी गगन चूमती फड़फड़ा रहें हैं पंख मेरे अब नन्ही चिड़िया उड़ना चाहती तोड़...