खानदान 37

खानदान 37

फैक्ट्री का कबाड़ा बेच-बेच कर रमेश के पास अब पैसे आना शुरू हो गए थे.. इन पैसों से रमेश अब प्रहलाद और अपना छोटा-मोटा ख़र्चा चला रहा था। रमेश के पास लगभग  कितने पैसे आते हैं.. यह जानकारी सुनीता को छोड़कर सारे घर को थी.. कारोबार जो था.. उनका। इन पैसों से सुनीता और...
सबसे मिली

सबसे मिली

पर्दा उठता है.. स्वर्ग लोक का एक सुन्दर दृश्य.. सभी मकान लाइन से बने हैं.. एक ख़ास मकान का महूर्त दिखाया जा रहा है। घन्टी बजती है.. टींग!!  टोंग!!… मम्मीजी! गेट खोलिए! लगता है.. मेहमान आने शुरू हो गए!”। “ हाँ! हाँ! ला! ठहर देखूं”। मम्मीजी दरवाज़े तक जातीं...
खानदान 37

खानदान 36

विनीत की दो बेटियों के बाद घर में पोता हुआ था.. न ही प्रहलाद का कोई नामकरण ही करवाया गया था, और अब जब बच्चे का पहला जन्मदिन आ रहा था. तो घर में कोई भी जन्मदिन को लेकर उल्लास और रौनक ही नज़र नहीं आ रही थी। अनिताजी के बार-बार सुनीता के लिये फ़ोन आ रहे थे,” बेटा! प्रहलाद...
कानू का पासपोर्ट

कानू का पासपोर्ट

आज इतवार का दिन था.. सभी घर पर थे, और फूल छुट्टी मनाने का मन हो रहा था। अब सभी संडे मनाने के मूड में आ गए थे, तो हमनें भी सोचा था, चलो! पूरा परिवार इकट्ठा है, तो क्यों न भोजन में आज कुछ विशेष बनाया जाय। अब भोजन भी सारे परिवार की पसन्द का होना चाहये था.. ऐसे थोड़े ही...
खानदान 37

खानदान 35

खैर! जो भी हो प्रहलाद दादी-दादा के लाड़ में दिन रोज़ बड़ा हो रहा था। अब क्योंकि रमेश दर्शनाजी का ख़ास था.. इस हिसाब से तो कहना चाहये कि प्रहलाद का लालन-पालन एकदम शाही ढँग से हो रहा था। फैक्ट्री में से रमेश कबाड़ा बेच कर रुपये-पैसों का इंतेज़ाम तो कर ही रहा था.. आमदनी...