खानदान 41

खानदान 41

अब माँ की कही हुई बातों पर सुनीता आराम से अमल कर रही थी। बाहरी अमल करते हुए सुनीता अपने संग सेतू को लिये घूम रही थी। सुनीता की सोच उसके चेहरे पर छपती जा रही थी.. जिसको देख अनिताजी ने एक बार सुनीता को फ़िर से समझाया था,” कोई बात नहीं घूमने दे लड़की के साथ! पर तू आराम...
खानदान 41

खानदान 40

घर में गेट का डिज़ाइन सुनीता के सामने रोज़ रमेश के द्वारा दिखाया जाता था। रमेश गेट को लेकर काफ़ी सीरियस था। आख़िर एक दिन सुनीता ने पूछ ही लिया था,” किस के घर के लिये बन रहा है.. गेट!”। “ अरे! वो अपनी है! न सेतू! बस! उन्हीं के लिये बना रहा हूँ। अरे! इतनी क्या पूछताछ कर...
खानदान 41

खानदान 39

विवाह के बाद जब सुनीता का रामलालजी के घर में गृह-प्रवेश हुआ था.. तो सुनीता का चेहरा एकदम मस्त और गोल-मोल था। खाते-पीते और भरे-पूरे खानदान की जो थी.. सुनीता। सुनीता के चेहरे पर एक आत्मविश्वास अलग ही झलका करता था। सुनीता के रामलाल विला में आने के बाद से ही सुनीता के...
कानू और तिरंगा

कानू और तिरंगा

जन-गण- मन अधिनायक जय है, भारत- भाग्य- विधाता । पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग । “ यह हमारा राष्ट्रीय गान है, जिसे रवींद्रनाथ ठाकुर ने लिखा था। बच्चों पहले भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था.. हमारे देश पर सबकी नज़र थी.. कि इस सोने की चिड़िया को कैसे लूटा...
खानदान 41

खानदान 38

सुनीता प्रहलाद के लालन-पालन में लगी रहती थी.. और रमेश शाम को सज-धज कर तैयार हो कर सफ़ेद रंग की मारुति कार में बैठकर जो सुनीता दहेज में लेकर आई थी..  निकल जाता था। सुनीता ने कभी रमेश से उसके जाने पर कोई भी सवाल नहीं पूछा था। लेकिन थोड़ा-थोड़ा रमेश के व्यवहार में बदलाव...