by Rachna Siwach | Jan 30, 2019 | Uncategorized
कुछ भी हुआ हो.. और रमेश कैसा भी हो!.. एक बार फ़िर सुनीता को लेने दिल्ली आ रहा था। रमेश को स्टेशन मुकेशजी और सुनील दोनों ही लेने जाने वाले थे। स्टेशन पर रमेश सुनीलजी को मुकेशजी के साथ देखकर एकदम सकपका सा गया था। सकपकाया हुआ रमेश एकदम ही बोल उठा था,” अरे! हा! हा! आप भी...
by Rachna Siwach | Jan 30, 2019 | Uncategorized
मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ, मैं। आजकल यह पंक्तियाँ हम अपनी प्यारी कानू के लिये ही गुनगुनाते रहते हैं.. जब भी हम अपनी भोली और गुड़िया कानू की तरफ़ देखते हैं.. तो हमें ऐसा लगता है.. मानो हमारी रानी बेटी कानू हमसे यही कह रही हो” माँ! आप मुझे अपने गले से लगा लो!.....
by Rachna Siwach | Jan 30, 2019 | Uncategorized
“ अरे! माँ यहाँ झीने में खड़ी होकर क्या कर रही हो! आओ! चलो! अन्दर चलें। कैसी हो!.. माँ!.. आज बहुत दिनों बाद तुमसे मुलाकात हुई!.. कहाँ चलीं गईं..थीं.. तुम!”। “ मैं तो यहीँ थी.. अरे! वाह! फूल तो तूने बहुत सुंदर लगा रखे हैं.. याद है!.. आसाम में हमारा कितना सुन्दर टेरेस...
by Rachna Siwach | Jan 27, 2019 | Uncategorized
सेतू का मामला अभी शान्त न हुआ था.. हर दिन मुकेशजी के परिवार में अब चर्चा का विषय बन गया था। सुनीता का दिमाग़ पूरी तरह से पैक हो गया था.. पता नहीं क्यों सुनीता के दिमाग़ में अब नए विचारों के घुसने की जगह ही न बची थी.. सब कुछ सामने दिखते हुए भी सही और गलत पता ही नहीं...
by Rachna Siwach | Jan 27, 2019 | Uncategorized
रात का समय हो चुका था.. परिवार में इंदौर किए गए फ़ोन पर अभी चर्चा चल रही थी। सुनील ने सुनीता से साफ़-साफ़ शब्दों में कह डाला था.. कुछ भी हो इंदौर से अगर तुम्हारे लिये कोई फ़ोन आता है, तो तुम बिल्कुल भी बात मत करना.. और फ़ोन भी मत उठाना। अगर कोई फ़ोन उठाएगा तो वो...