पंछी

पंछी

जी करता है नन्हीं चिड़िया बनकर तुमसे मिलने आऊँ माँ फ़िर किसी टहनी पर तुम संग नया नीड़ बनाऊँ माँ मानव बन कर देख लिया अब पंछी बन कर रहेंगें तुम संग तुम उड़ना दूर गगन में मइया तुम्हें देख उड़ना सीखेंगे फ़िर हम कितना अच्छा होगा यह जीवन अपना तुम चिड़िया हम नन्हें चूज़े...
खानदान 70

खानदान 70

सुनीता का थोड़े से दिनों के लिये बीच में दिल्ली जाना हुआ था.. सुनीता ने एक बार फ़िर अपनी माँ अनिताजी को रंजना के विषय में बता दिया था।” माँ!.. रमेश कहता है.. मेरा रिश्ता है.. रंजना के साथ!”। अनिताजी ने पूरी विस्तार से कहानी सुनी थी..  कहानी सुनने के बाद अनिताजी...
खानदान 70

खानदान 69

रंजना के जाने के बाद सुनीता को रमेश को लेकर अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। रमेश के चेहरे पर सुनीता रंजना को लेकर एक निराली सी ख़ुशी और चमक देख रही थी। “ कौन थी… ये! मम्मी पापा के साथ!”। प्रहलाद और नेहा ने सुनीता से सवाल किया था।” अच्छी दीदी थी!”। ख़ुद ही सवाल का...
खानदान 70

खानदान 68

रमेश और सुनीता प्रहलाद के साथ स्कूल से लौट रहे थे.. अचानक ही रमेश गाड़ी में ज़ोर-ज़ोर से बोलना शुरू हो गया था,” उसका भाई बॉक्सर है..!!.. गोल्ड मैडलिस्ट है.. !! .. उसकी मौसी मिनिस्टर है.. इस जायदाद का एक और वारिस आ गया है.. !!.. देखना वो आएगी.. बैठेगी मेरे साथ गाड़ी...
तुम्हारी खुशबू .. तुम्हारा प्यार

तुम्हारी खुशबू .. तुम्हारा प्यार

कभी सपने में भी नहीं सोचा था.. ऐसा कुछ हो जाएगा.. तुम यूँ अचानक ही हमेशा के लिये छोड़कर हमें कहीं और चली जाओगी। वैसे देखा जाए.. माँ!.. तुम चुपके से ही छोड़कर चलीं गयीं। एक-साल से भी ऊपर हो आया है.. तुम्हारी झलक तक देखने को नहीं मिली है। हाँ!. आ जाती हो तुम भूले से...