तितली

तितली

एक नन्हीं तितली जो रोज़ मेरे आँगन में आ जाती है कहीं वो तुम तो नहीं बहुत प्यार से मुझे देख फ़िर एक फूल से दूसरे पर उड़ जाती है कहीं वो तुम तो नहीं तितली को देखते ही तुम्हारी ममता का अहसास हो आता है माँ!! ऐसा लगता है तितली के रूप में कहीं तुम तो नहीं क्या कहती हो तुम...
तुम संग होली

तुम संग होली

हर त्यौहार के साथ ही मुझे अपना बचपन याद आ जाता है। और सारे साल भर के त्यौहार मेरी आँखों के आगे घूम जाते हैं.. कैसे मैं अपने माँ-बापू संग और अपने भाइयों संग ख़ुश होकर सारे त्यौहार मनाया करती थी। सभी त्यौहारों में होली का दिन ख़ास हुआ करता था। माँ! तुम्हें याद है.. जब...
खानदान 72

खानदान 72

करवाचौथ जैसे पवित्र त्यौहार को रमेश ने त्यौहार न रखकर नाटक में परिवर्तित कर दिया था। सुनीता का करवाचौथ को लेकर सारा जायका ही ख़राब हो गया था.. नतीजा यह हुआ था.. कि सुनीता ने करवाचौथ का व्रत रखना ही बन्द कर दिया था। हालाँकि सुनीता परिवार में थी.. और दर्शनाजी जैसी...
तुम संग होली

कानू संग होली

होली है, हो रंग बरसे… भीगे कानू रानी रंग बरसे होली है…. अरे केने मारी पिचकारी कानू की भीगी अंगिया ओ रंग रसिया, रंग रसिया हो हर मौसम और उससे जुड़े तीज त्यौहार और खान-पान सबका एक अलग ही मज़ा होता है। साल के पूरे आठ महीने गर्मी चलती है.. उसके बाद जब शरद ऋतु का आगमन होता...
खानदान 72

खानदान 71

रंजना नाम के काँटे को सुनीता के गृहस्थ में फंसे लगभग एक साल हो आया था।” ये लड़की पापा को आप के लिये सिखाती है.. और आप की जगह लेना चाहती है!”। प्रहलाद ने सुनीता से रमेश के लिये कहा था। प्रहलाद समझने लगा था.. कि रमेश रंजना पर पैसे लुटाने लगा है। बच्चों को भी अब रमेश के...