by Rachna Siwach | Mar 14, 2019 | Uncategorized
माँ का इशारा पा रमेश फ़िर उसी दो-कौड़ी के रूप में आ गया था। सुनीता अपनी अक्ल पर पछतावा करते हुए.. फ़िर सोच में डूब गई थी।” आप ने फ़िर बेवकूफ़ी करके उस आदमी को क्यों बचाया! हो गए न फ़िर से ड्रामे शुरू! अरे! दिल्ली भी बता देते और फ़िर मज़ा चाखवाते इसे!’ प्रहलाद ने एक...
by Rachna Siwach | Mar 13, 2019 | Uncategorized
“ मुझे यहाँ से निकाल! नहीं तो अपनी गर्दन में कुछ घोंप डालूँगा!”। रमेश का पूरा शरीर काँप रहा था.. बेहद डरे हुए.. रमेश ने सुनीता से कहा था.. पर सुनीता ने रमेश की बात का कोई भी जवाब नहीं दिया था। पुलिस वाले अब रमेश के ऊपर करवाई करने के लिये एकदम सीधे खड़े हो गए थे.. रमेश...
by Rachna Siwach | Mar 13, 2019 | Uncategorized
डर के कारण तुमको खोया डर के कारण ख़ुद को खोया और भी बहुत कुछ खोया, मैने डर से इसी डर के कारण कहीं मुझसे अब, रिश्ते न खोयें तुम मेरी मदद कर मुझे इस डर से उभारो...
by Rachna Siwach | Mar 12, 2019 | Uncategorized
सुनीता पुलिस स्टेशन में पुलिस डिपार्टमेंट के लोगों के साथ अपना केस डिसकस करने में लगी हुई थी.. प्रहलाद भी अपनी माँ के साथ आना चाहता था.. पर सुनीता ने बेटे को थाने लाना अपने साथ ठीक न समझा था। वैसे हमारे समाज में महिलाओं का पुलिस स्टेशन में यूँ बैठना अच्छा नहीं समझा...
by Rachna Siwach | Mar 11, 2019 | Uncategorized
नाटक तो खैर! रामलाल विला में छोटे और बडे सारे साल चलते ही रहते थे। इस परिवार में सब कुछ एक तरफ़ छोड़कर बस एक ही बात अच्छी थी.. कि यहाँ पर सभी साल में आने वाले त्यौहार एक अपने अलग ही अंदाज़ में मनाए जाते थे। अब ये तो न कहना चाहये कि त्यौहार आने से पहले नाच-गाने ही शुरू...