खानदान 67

खानदान 67

हरियाणे से गाड़ी खरीदने के बाद रमेश हमेशा की तरह दिल्ली पहुँच गया था। मुकेशजी सफ़ारी गाड़ी को देखते ही हैरान और चिन्तित हो गये थे.. आख़िर financier थे.. गाड़ियों का बिज़नेस था.. मुकेशजी का। मुकेशजी गाड़ी को देखते ही समझ गये थे.. गाड़ी फाइनेंस की है.. चोरी की। उन्होंने...
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खानदान 66

“ ऐसी ही सफ़ारी हम रमेश को भी दिलवा देंगें”। दर्शनाजी ने सुनीता से कहा था। हालाँकि सुनीता को विनीत की नई सफ़ारी से कोई भी लेना-देना नहीं था.. लेकिन दर्शनाजी अपने परिवार के नाटकों के हिसाब से ही दिमाग़ लगाए जा रहीं थीं। गाड़ी कंपनी के नाम थी.. इसलिये रमेश को बहला दिया...
खानदान 67

खानदान 65

घर में पुलिस आ जाए.. या फ़िर पुलिस का बाप!.. माँ-बेटों के ड्रामे बुलंदी पर थे। वैस देखा जाए.. तो कमाल ही था.. एक अनपढ़ गँवार औरत ने सारे घर को अपने पालतू कुत्ते के साथ मिलकर छोटी अँगुली पर नचा रखा था। प्रॉपर्टी न हो गई.. जैसे तमाशा ही हो गया हो.. फैक्ट्री क्या खड़ी कर...

कानू और नन्हें किराएदार

Image by OpenClipart-Vectors on Pixabay पेड़- पौधों का तो हमें बचपन से ही शौक था.. सिर्फ़ देखने का.. लगाने का नहीं। बड़े हुए, ब्याह के बाद ही भोपाल आ गए थे। संयुक्त परिवार होने के कारण हमें हमारे सास-ससुर ने ऊपर कमरा बनवा कर दे दिया.. साथ में एक बड़ी और खुली छत्त भी...
खानदान 67

खानदान 64

सुबह आराम से आठ बजे दोबारा चाय पीकर सो जाना.. दोपहर को फैक्ट्री के लिये तैयार होकर मातारानी के साथ मिलकर सारे घर की चुगली करना और सबको बेहिसाब गालियाँ देकर काम पर जाना रमेश का रोज़ का रूटीन बन गया था। रमेश की माँ अपने फ़ायदे के लिये रमेश का बुरी तरह से फ़ायदा उठाये चल...