by Rachna Siwach | Feb 25, 2019 | Uncategorized
घर में ज़मीन बेच-बेच कर अच्छे पैसे आ रहे थे.. रमेश का एन्जॉयमेंट भी अच्छा चल रहा था। अब ऐसे ज़मीन बेच कर आए हुए पैसों से घर तो सुनीता का बसना ही नहीं था.. और वैसे भी एक-एक रुपये की ख़बर दर्शनाजी के पास थी.. आख़िर सासू-माँ उस्तादों की उस्ताद थीं.. रमेश के पैसे उड़ाने...
by Rachna Siwach | Feb 25, 2019 | Uncategorized
बचपन एक ऐसी चीज़ होता है.. जो इंसान कभी नहीं भुला पाता। बचपन की वो खट्टी-मीठी यादें.. यादों में हमेशा के लिये अमर होकर रह जातीं हैं। हमें भी हमारा अनमोल बचपन अक्सर याद आता है.. और फ़िर बहुत देर के लिये हम अपनी मीठी यादों में खो-कर रह जातें हैं। बचपन भी कभी-कभी ही हमसे...
by Rachna Siwach | Feb 23, 2019 | Uncategorized
बहुत सी बातें करनी थीं, तुमसे और तुम चलीं गयीं, मन की मन में ही रह गई और तुम चलीं गयीं, मन होता है लेने आऊँ तुमको बिन बताये न जाने कहाँ पर तुम चलीं गयीं, न जाने क्या सोचा तुमनें कुछ भी न कहा, और तुम चलीं गईं क्या सोच रहीं थीं? कह तो देतीं! मुड़ कर एक बार देख तो लेतीं,...
by Rachna Siwach | Feb 23, 2019 | Uncategorized
घर मे वही माहौल था.. आधे दिन सास की चिक-चिक, सुनीता का दिमाग़ इसी तैयारी में लगा रहता था.. नीचे जाकर कौन सी बात का क्या जवाब देना है। बच्चों में शाम हो जाया करती थी.. शाम होते ही रमेश के माँ की सीख के हिसाब से नाटक शुरू हो जाया करते थे,” रमेश आज या फ़िर उस बिल्ली ने...
by Rachna Siwach | Feb 22, 2019 | Uncategorized
सुनीता पिताजी की कोई भी मदद न होने के कारण बहुत ही दुखी हो गई थी। मायका मुसीबत में होने के कारण चाह कर भी कोई भी मदद नहीं कर पा रही थी, सुनीता अपने परिवार की। अंदर ही अंदर बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी.. सुनीता को। “ रमेश बता रिया था.. चौधरी.. दो लाख रुपये मांगें...