खानदान 83

खानदान 83

सुनीता और विनीत रमेश को अस्पताल में भर्ती करवा कर घर आ गए थे। दर्शनाजी ने नाटक की पूर्ति के लिये विनीत को दो या तीन बार अस्पताल में फ़ोन करके रमेश के बारे में जानना चाहा था.. दिखाना चाह रहीं थीं.. कि रमेश की कितनी शुभचिंतक हैं। वैसे कुछ भी हो! दर्शनाजी अपने हुनर की...
खानदान 83

खानदान 82

रमेश, विनीत और सुनीता अस्पताल पहुँच गए थे। रमेश को व्हीलचेयर पर ले लिया गया था.. विनीत अंदर डॉक्टर को देखने चला गया था.. डॉक्टर के आने में थोड़ा समय था.. सुनीता रमेश के साथ ही खड़ी थी.. थोड़े समय बाद डॉक्टर अपने केबिन में आ जाता है.. और विनीत को डॉक्टर से परमिशन मिलते...
खानदान 83

खानदान 81

अब संयुक्त बिज़नेस परिवार था, और पैसों का चक्कर होने के कारण रमेश को तो अपने पैर को लेकर अपने पिता के आगे खड़े होना ही था। रमेश की बात को नकारते हुए.. रामलालजी ने उसी कंपाउंडर को बुलवा भेजा था.. जिससे वो अपने इंजेक्शन लगवाया करते थे। कंपाउंडर ने रामलालजी को आश्वासन...
खानदान 83

खानदान 80

रमेश का पैर तेज़ी से लाल होता जा रहा था, और सूजता जा रहा था.. ऐसा लग रहा था.. मानो पैर ही फट जाएगा। सुनीता रमेश के नज़दीक बैठकर लगातार ही सूजते हुए पैर को देखे जा रही थी.. पैर को तेज़ी से सूजता देख, सुनीता ने रमेश को मलहम घिसने से मना किया, और कहा था,” मुझे तो कोई और...
हैप्पी होली!!  कानू!!!

हैप्पी होली!! कानू!!!

आज न छोड़ेंगे बस हमजोली खेलेंगे हम होली चाहे भीगे कानू की चुनरिया चाहे भीगे रे कानू खेलेंगे हम होली होली है!“ बिना नाश्ता खाये होली खेलने नहीं जाना! आज हमनें सबके लिये गर्म-गर्म पकौड़े बनाए हैं!”। “ अरे! वाह! फ़िर तो आज कानू के भी मज़े आ गए, कानू भी हमारे संग पकौड़े...