by Rachna Siwach | Mar 25, 2019 | Uncategorized
सुनीता और विनीत रमेश को अस्पताल में भर्ती करवा कर घर आ गए थे। दर्शनाजी ने नाटक की पूर्ति के लिये विनीत को दो या तीन बार अस्पताल में फ़ोन करके रमेश के बारे में जानना चाहा था.. दिखाना चाह रहीं थीं.. कि रमेश की कितनी शुभचिंतक हैं। वैसे कुछ भी हो! दर्शनाजी अपने हुनर की...
by Rachna Siwach | Mar 25, 2019 | Uncategorized
रमेश, विनीत और सुनीता अस्पताल पहुँच गए थे। रमेश को व्हीलचेयर पर ले लिया गया था.. विनीत अंदर डॉक्टर को देखने चला गया था.. डॉक्टर के आने में थोड़ा समय था.. सुनीता रमेश के साथ ही खड़ी थी.. थोड़े समय बाद डॉक्टर अपने केबिन में आ जाता है.. और विनीत को डॉक्टर से परमिशन मिलते...
by Rachna Siwach | Mar 23, 2019 | Uncategorized
अब संयुक्त बिज़नेस परिवार था, और पैसों का चक्कर होने के कारण रमेश को तो अपने पैर को लेकर अपने पिता के आगे खड़े होना ही था। रमेश की बात को नकारते हुए.. रामलालजी ने उसी कंपाउंडर को बुलवा भेजा था.. जिससे वो अपने इंजेक्शन लगवाया करते थे। कंपाउंडर ने रामलालजी को आश्वासन...
by Rachna Siwach | Mar 22, 2019 | Uncategorized
रमेश का पैर तेज़ी से लाल होता जा रहा था, और सूजता जा रहा था.. ऐसा लग रहा था.. मानो पैर ही फट जाएगा। सुनीता रमेश के नज़दीक बैठकर लगातार ही सूजते हुए पैर को देखे जा रही थी.. पैर को तेज़ी से सूजता देख, सुनीता ने रमेश को मलहम घिसने से मना किया, और कहा था,” मुझे तो कोई और...
by Rachna Siwach | Mar 22, 2019 | Uncategorized
आज न छोड़ेंगे बस हमजोली खेलेंगे हम होली चाहे भीगे कानू की चुनरिया चाहे भीगे रे कानू खेलेंगे हम होली होली है!“ बिना नाश्ता खाये होली खेलने नहीं जाना! आज हमनें सबके लिये गर्म-गर्म पकौड़े बनाए हैं!”। “ अरे! वाह! फ़िर तो आज कानू के भी मज़े आ गए, कानू भी हमारे संग पकौड़े...