by Major Krapal Verma | Jul 3, 2023 | स्नेह यात्रा
“सुनो! साले सब नेता चोर हैं!” मैंने भभक कर कहा है। “वाह-वाह! क्या सच्चाई उगली है।” भट्ठा वाले ने ऊंचे स्वर में कहा है। “चोर-चोर को नहीं पहचानेगा तो क्या तेरी मां को मानेगा?” जकारिया ने ढीले पाजामे को दोनों टांगों के ऊपर खिसकाते हुए...
by Major Krapal Verma | Jul 2, 2023 | स्नेह यात्रा
“बड़ी देर लगा दी यार!” भट्ठा वाले ने हंस कर तहमत थोपी है – जो आज का आम रिवाज है। “सीधा चला आ रहा हूँ बे!” मैंने उसे कुनिहा कर सीधा कर लिया है। एक अट्टहास की हंसी में हम सब हंस पड़े हैं। लगा है एक के बल पर दूसरा मैदान के मैदान जीतता चला जा...
by Major Krapal Verma | Jun 27, 2023 | स्नेह यात्रा
क्यों नहीं लिखोगे इसका भी कारण मैं जानती हूँ। तुम जाते ही गोरख धंधे में फंंस गए होगे और भारत को अमेरिका बनाने के प्रयत्न में भूल गए होगे कि अमेरिका में कुछ पीछे छोड़ गए हो। जानना चाहते हो तो सुनो – दिल! जी हां ये हमारे पास गिरवी रक्खा है। सच दलीप मैं तो उस मनहूस...
by Major Krapal Verma | Jun 26, 2023 | स्नेह यात्रा
“वो जो इस मीटिंग के सुझावों से सहमत नहीं अब हाथ खड़ा करें!” मुक्तिबोध ने दोबारा घोषणा की है। “हाथ खड़ा नहीं – मैं आवाज बुलंद करना चाहती हूँ!” आवाज के तीखेपन से और दिशा से ही मैं जान गया हूँ कि बोलने वाला शीतल के अलावा और कोई नहीं है।...
by Major Krapal Verma | Jun 25, 2023 | स्नेह यात्रा
इसका मतलब मैं एक ही निकाल पाया हूँ कि यहां लोग जो भी कदम उठाते हैं निजी स्वार्थ पहले देखते हैं। आगामी उथल-पुथल या राजनीतिक परिवेश का विश्लेषण कर, तार्किक शक्ति पर तोल और जनता का मन पढ़ कर ही हर निर्णय लेते हैं। त्यागी के लिए मैं एक जाना माना सोर्स हूँ और वह भी चाहता...