स्नेह यात्रा भाग आठ खंड पांच

स्नेह यात्रा भाग आठ खंड पांच

“सुनाओ गोपाल, क्या हाल है?” मैंने लेवल रूम में प्रवेश किया है। “चल रहा है, मालिक!” गोपाल ने हंस कर उत्तर दिया है। “आज तुम हमें काम करने दो! थोड़ा सिखाओ फिर तुम्हारी तरह हम भी ..” “नहीं सर! आप मालिक हैं ..” “तभी तो...
स्नेह यात्रा भाग आठ खंड पांच

स्नेह यात्रा भाग आठ खंड चार

“देट्स राइट!” मुक्ति राजी हो गया है। बहुत सोच विचार के बाद मुक्ति का संताप हरने हेतु मैंने उसे आगे की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। जिम्मेदारी की चादर स्वयं ओढ़ नया तरीका संभाल और अपनी योजना पेट में पचाए मैं मुक्ति को फिर से अमेरिका की सैर करा रहा...
स्नेह यात्रा भाग आठ खंड पांच

स्नेह यात्रा भाग आठ खंड तीन

कमरे में सब कुछ नया सा लगा है। नए नौकर के आगमन से मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि सब कुछ वैसा ही होगा जैसा पहले था। हर बार नए आदमी को सिखा पढ़ा कर अपने योग्य बनाना भी मुझे अब भारी काम लगा है। मैं पता नहीं क्यों पुरानी पीढ़ियों की तरह पुराने नौकरों से चिपका रहना चाहता...
स्नेह यात्रा भाग आठ खंड पांच

स्नेह यात्रा भाग आठ खंड दो

हवाई जहाज लंबी यात्रा की उड़ान से थक कर कबूतर की तरह जमीन पर जा टिका है। गुर्राती मशीन शांत हो गई है। सांयसांय करते पंखे धीरे-धीरे विश्राम की स्थिति में लौट रहे हैं। इस कार्यान्वित होते दृश्य में मैं भी अब तक पिसता रहा था। पंखों की चरखियों पर चढ़ा घूमता रहा था और पता...
स्नेह यात्रा भाग आठ खंड पांच

स्नेह यात्रा भाग आठ खंड एक

जम्बोजेट रुपहले बादलों के ऊपर तैरता सा लग रहा है। अति संवेग से मैं भारत की ओर बढ़ रहा हूँ। लग रहा है सोफी से दूर चला जा रहा हूँ। लाख कोशिश करने के बाद भी मैं सोफी को भुला नहीं पा रहा हूँ। अपने आप को मिल तथा देश कल्याण के मुद्दों से बांध नहीं पा रहा हूँ। वही कमीना शब्द...