स्नेह यात्रा भाग सात खंड बीस

स्नेह यात्रा भाग सात खंड बीस

मेरा मन आया है कि पूछ लूं – टोनी कौन था? एयरपोर्ट पर खड़ा मैं अब भी साहस बटोर रहा हूँ कि अंतिम बार पूछता ही चलूं कि टोनी कौन था। पता नहीं क्यों टोनी मेरा प्रतिद्वंद्वी जैसा बन गया है और मुझे चुनौती दे रहा है। मर कर भी टोनी की आत्मा मुझे किसी सहम से भरती जा रही...
स्नेह यात्रा भाग सात खंड बीस

स्नेह यात्रा भाग सात खंड उन्नीस

देखते देखते लस्सी लंबे लंबे गिलासों में भरी सफेद झागों से सजी गोरे काले होंठों से आ लगी है। हम सब ने तृप्त हो कर संगत का धन्यवाद किया है। “अब तो मुझे ठिकाना मिल गया। जब भी स्टेट्स आऊंगा यहीं रुकूंगा!” मैंने अपना निश्चित किया निर्णय कह सुनाया है।...
स्नेह यात्रा भाग सात खंड बीस

स्नेह यात्रा भाग सात खंड अठारह

एक भीड़ ने मुझे चारों ओर से घेर लिया है। प्रश्नों की बौछार मुझ पर इस तरह होने लगी है जिस तरह से उमंग के साथ सावन में बरसात की झड़ी टपर-टपर के शब्दों से भद्र आवाजें करती रहती है। “किन्नी तरक्की हुई है जी, साडी?” बुढऊ का प्रश्न है। नयन विस्फारित मैं उसे इस...
स्नेह यात्रा भाग सात खंड बीस

स्नेह यात्रा भाग सात खंड सत्रह

“स्टॉकटन से कुछ दूर ये हिन्दुस्तानियों की ही बस्ती है। ये लोग खास कर पंजाबी हैं। बड़े ही दिलचस्प लोग हैं!” मुझे मिसेज रॉबर्ट ने बताया है। “पंजाबी बहुत दिल वाले होते हैं।” मैंने समर्थन किया है। “तुम भी पंजाबी हो क्या?”...
जीने की राह एक सौ तीस

जीने की राह एक सौ तीस

अमरपुर आश्रम को अपनी समाज सेवाओं के क्षेत्र में अद्भुत सफलताएं मिली थीं। जहां एक ओर संस्कृत महाविद्यालय देश के युवाओं को मुफ्त में शिक्षा प्रदान कर रहे थे और साहसी और चरित्रवान नागरिक बना रहे थे वहीं श्रावणी मां औषधालय आयुर्वेद के प्रचार प्रसार के साथ साथ मुफ्त सेवाएं...